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नृत्य वीरांगनाओं की कहानी का मंचन: पारंपरिक कला के जरिए दिखाया महिलाओं का संघर्ष

Mon, 20 Jun 2022 02:01 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 20 Jun 2022 02:01 PM IST
सार

नृत्यांगना डॉ सोनल मानसिंह ने इस कार्यक्रम की परिकल्पना की और निर्देशन किया। तंजौर की मुत्थूपर्णी को कुचीपुड़ी शास्त्रीय संगीतमय नृत्य शैली में, केरल की तात्री की कहानी मोहिनी अट्टम शैली में प्रस्तुत किया गया। मैडम मेनका और रुक्मणी देवी को भी दिखाया गया...

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Renowned dancer Sonal Mansingh performed a dance show
नृत्यांगना सोनल मानसिंह कार्यक्रम पेश करते हुए। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

प्रसिद्ध नृत्यांगना सोनल मानसिंह ने रविवार को एक प्रस्तुति देते हुए भारत की नृत्यकलाओं का प्रदर्शन किया। इसमें चार विशिष्ट नृत्यों के जरिए भारत की चार महान नर्तकियों के जीवन संघर्ष को दिखाया गया कि कैसे उन्होंने नृत्य को न केवल अपनी अभिव्यक्ति, बल्कि सामाजिक समस्याओं को चित्रित करने का माध्यम बना लिया। राज्यसभा के उपसभापति डॉ. हरिवंश और मल्लिका नड्डा सहित कई गणमान्य लोगों ने कार्यक्रम की सराहना की।     

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इनकी कहानी का हुआ मंचन

कामाख्या कला पीठ (सेंटर फॉर इंडियन क्लासिकल डांसर्स) के तत्वाधान में ‘कहानी नृत्य-वीरांगनाओं की’ का मंचन हुआ। नृत्यांगना डॉ सोनल मानसिंह ने इस कार्यक्रम की परिकल्पना की और निर्देशन किया। तंजौर की मुत्थूपर्णी को कुचीपुड़ी शास्त्रीय संगीतमय नृत्य शैली में, केरल की तात्री की कहानी मोहिनी अट्टम शैली में प्रस्तुत किया गया। मैडम मेनका और रुक्मणी देवी को भी दिखाया गया।

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संस्कृति की पूर्ण जानकारी

कार्यक्रम के बाद डॉ. हरिवंश ने कहा कि महिलाओं ने नृत्य को सामाजिक समस्याओं को चित्रित करने का सशक्त माध्यम बना लिया था। मल्लिका नड्डा ने कहा कि यह हमारी संस्कृति का पूर्ण मिश्रण था। देश में विभिन्न क्षेत्रों के परिवर्तन की गाथा वर्तमान में लोगों को प्रेरणा देने वाली है। केंद्रीय राज्य मंत्री एसपीएस बघेल ने कहा कि हमें अपनी विधा का सम्मान करना चाहिए। 12वीं सदी के बाद हमारी कला थोड़ी कमज़ोर पड़ी। उन्होंने कहा कि यह लोक कला लोकभाषा लोक-संस्कृति के पुर्नजागरण का काल है।

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