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Aviation: हवाई सफर करने वालों के लिए राहत, महंगे टिकट पर सरकार रख रही नजर; यात्री यहां करें शिकायत
Thu, 23 Jul 2026 11:18 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Thu, 23 Jul 2026 11:18 PM IST
सार
विमानन क्षेत्र में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनाए रखने की जिम्मेदारी भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की है। आयोग बाजार में प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को रोकने, किसी कंपनी के दबदबे के गलत इस्तेमाल पर नजर रखने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा का काम करता है।
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विमानन नियामक डीजीसीए
- फोटो : dgca.gov.in
विस्तार
हवाई किराये में बढ़ोतरी और यात्रियों की शिकायतों को देखते हुए सरकार ने निगरानी व्यवस्था मजबूत कर दी है। घरेलू एयरलाइनों के किराये पर नजर रखने के लिए डीजीसीए की टैरिफ मॉनिटरिंग यूनिट काम कर रही है। वहीं, ज्यादा किराये से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए एयर सेवा प्लेटफॉर्म पर एयर फेयर मॉड्यूल शुरू किया गया है।
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नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, मार्च 1994 में वायु निगम अधिनियम खत्म होने के बाद देश का घरेलू विमानन क्षेत्र पूरी तरह नियंत्रण मुक्त कर दिया गया था। इसके बाद एयरलाइन कंपनियां अपनी जरूरत और व्यावसायिक संभावनाओं के आधार पर विमान, रूट और नेटवर्क तय कर सकती हैं। हालांकि, विमानन कंपनियों को सरकार की रूट डिस्पर्सल गाइडलाइंस, एयरपोर्ट ऑपरेटर की ओर से तय स्लॉट और डीजीसीए की मंजूरी का पालन करना होता है।
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मंत्रालय ने संसद में बताया, सरकार सामान्य तौर पर हवाई किराया तय नहीं करती है। एयरलाइन कंपनियां अपनी लागत, सेवा और मुनाफे को ध्यान में रखकर किराया तय करती हैं। सरकार असाधारण परिस्थितियों में किराये के मामले में हस्तक्षेप कर सकती है। कोविड महामारी, महाकुंभ, पहलगाम घटना और इंडिगो की उड़ानों में आई परेशानी के समय सरकार ने किराया सीमा तय करने और उड़ानों की संख्या बढ़ाने जैसे कदम उठाए थे। डीजीसीए की टैरिफ मॉनिटरिंग यूनिट हर महीने 78 चुनिंदा हवाई मार्गों पर एयरलाइनों की वेबसाइट के जरिए किराये की निगरानी करती है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि एयरलाइन कंपनियां अपने घोषित किराये के दायरे से बाहर जाकर शुल्क न लें।
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वहीं, विमानन क्षेत्र में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनाए रखने की जिम्मेदारी भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की है। आयोग बाजार में प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को रोकने, किसी कंपनी के दबदबे के गलत इस्तेमाल पर नजर रखने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा का काम करता है।