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भारत-चीन के रिश्ते सामान्य होने के लिए पीएलए का लद्दाख में पीछे हटना जरूरी
Sat, 27 Jun 2020 07:25 PM IST
Rajeev Rai
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Rajeev Rai
Updated Sat, 27 Jun 2020 07:25 PM IST
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भारत चीन सीमा तनाव
- फोटो : PTI
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पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर इसी महीने हुई खूनी झड़प के बाद अब यहां स्थिति फिलहाल सामान्य है। हालांकि तनाव कम होने के बीच भारत अभी भी इस इंतजार में है कि चीनी सेना छह जून की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए 1,597 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा से पीछे हटे।
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लद्दाख में नियंत्रण रेखा पर फॉरवर्ड पोस्ट में दोनों सेनाएं आमने-सामने हैं, हालांकि चार स्टैंड ऑफ पॉइंट में से दो में दोनों सेनाओं के बीच तनाव में थोड़ी कमी आई है लेकिन इसके बावजूद दोनों देशों की सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं।
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एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'सीमा की स्थिति गतिशील बनी हुई है और यह पीएलए के लिए मौजूदा समझौतों और विश्वास निर्माण उपायों के साथ पिछले महीने में एकतरफा जमीनी स्थिति को बदलने की कोशिश के बाद यथास्थिति बहाल करने के लिए है।'
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नरेंद्र मोदी सरकार बहुत स्पष्ट है कि पीएलए ने एलएसी पर सामान्य स्थापित नहीं बनाया है और वह चाहता है कि सीमा पर शांति बहाल करने के लिए वो पहले के अपने स्थान पर वापस चला जाए और द्विपक्षीय संबंधों को बहाल किया जाए। यह पीएलए द्वारा यथास्थिति बहाल करने में लगने वाले समय को भी देख रहा है।
दोनों पक्ष किसी भी सकारात्मक स्तर पर आने से पहले राजनयिक और सैन्य चैनलों के माध्यम से बातचीत कर रहे हैं। डरबुक-श्योक दौलत बेग ओल्डी (डीएसडीबीओ) सड़क पूरी होने के साथ, भारतीय सेना के इंजीनियर अब गश्त करने वाली चौकियों को सड़कों से जोड़ रहे हैं ताकि सीमा पार से किसी भी एकतरफा कार्रवाई का जवाब देने के लिए सैनिकों की क्षमता और कई गुना बढ़ जाए।
चीन द्वारा मई में अक्साई चिन में सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को तैनात करने के साथ ही भारत ने भी 3,488 किलोमीटर एलएसी के साथ लंबी दूरी के हथियारों की तैनाती के साथ उसे उसी अंदाज में जवाब दिया है।