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तो ये है एनएसजी पर भारत के खिलाफ ड्रैगन की असली खुन्नस!

Mon, 27 Jun 2016 05:27 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 27 Jun 2016 05:27 PM IST
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Real Game Plan of China for India and the NSG

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पीएम मोदी तस्वीरों में हाथ मिलाते और साथ में मुस्कुराते भले ही दिखें, लेकिन ड्रैगन की भारत के प्रति खुन्नस जगजाहिर है। चीन किसी भी कीमत पर नहीं चाहता कि भारत आर्थिक या समारिक क्षेत्र में उससे जरा भी आगे निकले। यही वजह है कि प्रधानमंत्री मोदी ने एढ़ी से चोटी का जोर लगा लिया, अमेरिका ने खुलेतौर पर भारत के पक्ष में आवाज बुलंद की, 48 में 41 देश भारत के पक्ष में राय बनाते दिखे, लेकिन ड्रैगन टस से मस नहीं हुआ। परमाणु अप्रसार संधि में भारत के दस्तखत न होने का हवाला देकर चीन कुछ देशों को भारत के खिलाफ भड़काने में सफल रहा और भारत से हाथ में आती दिख रही बाजी पलट गई।  

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दरअसल, भारत की खिलाफत करने वाले चीन की असली खुन्नस कुछ और ही है। इस खुन्नस के तार जुड़े हैं अमेरिका से, मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजाइम (एमटीसीआर) से।
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पहली वजह है कि 48 देशों वाले परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत नहीं है और चिरप्रतिद्वंदी चीन है।

दूसरी और असली वजह है- भारत मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजाइम (एमटीसीआर) का सदस्य बन चुका है, लेकिन चिरप्रतिद्वंदी चीन अब तक इस उपलब्धि से दूर है। 
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माजरा यह है कि चीन भी एमटीसीआर का सदस्य बनना चाहता था। उसने 2004 में एमटीसीआर में शामिल होने के लिए दावेदारी पेश की थी। लेकिन समूह के सदस्यों को चीन की मंशा ठीक नहीं लगी। अमेरिका नहीं चाहता था कि चीन एमटीसीआर में शामिल हो। अमेरिका की नॉन पार्टीशन ऑर्गनाइजेशन आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन ने एमटीसीआर में शामिल होने को लेकर चीन की योग्यता पर सवाल उठाए गए थे।

एनएसजी पर भारत के खिलाफ ड्रैगन का गेम प्लान

Real Game Plan of China for India and the NSG

एमटीसीआर के सदस्यों की जानकारी में ये बात रही कि चीन लगातार उन मुल्कों को संवेदनशील तकनीकी और सामान मुहैया कराता है जो अपने नापाक मंसूबों के लिए बैलिस्टिक मिसाइल बनाते हैं। इन मुल्कों में उत्तर कोरिया का नाम भी शामिल है। एमटीसीआर ने सिरफिरे उत्तर कोरिया को ऐसी किसी भी बैलिस्टिक मिसाइल और असलहा-बारूद को देने से साफ मना किया, जिन्हें परमाणु, रासायनिक या जैविक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके।

साल 2004 की एमटीसीआर मीटिंग से हफ्तों पहले अमेरिका ने चीन की आठ कंपनियों पर भी परमाणु प्रसार के लिए प्रतिबंध लगा दिए थे। इन आठ कंपनियों में से एक जिंकशीदाई खासतौर पर मिसाइल के प्रसार करने की दोषी थी। दो कंपनियों को बुश प्रशासन ने पहले ही ईरान के साथ परमाणु प्रसार करने की वजह से प्रतिबंधित कर दिया था।

लेकिन तभी साल 2004 में चीन को परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह यानी एनएसजी में सदस्यता मिल गई। 

तब से चीन इसी एमएसजी के जरिए मजबूत हो रहे भारत के आगे अड़ंगा डालता रहता है और अमेरिका के प्रति मन ही मन खुन्नस भी निकालता रहता है।

Published By Rohit Kumar Porwal

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