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बालाकोट: फैक्टरी में तैयार मानव बम भारत, अफगानिस्तान, ईरान और बलूचिस्तान में भेजे जाते थे

Thu, 28 Feb 2019 12:27 AM IST
Avdhesh Kumar जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली  Published by: Avdhesh Kumar Updated Thu, 28 Feb 2019 12:27 AM IST
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Ready made human bombs were sent to India, Afghanistan, Iran and Balochistan from balakot
Indian Airforce - फोटो : File Photo
भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने पर बमबारी कर उसे उड़ा दिया। यह वही जगह थी कि जहां पर खूंखार आतंकी तैयार होते थे। आतंक की इस फैक्टरी में तैयार मानव बम या फिदायीन दस्ते न केवल भारत, बल्कि अफगानिस्तान, ईरान और बलूचिस्तान में भेजे जाते थे। 
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बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों को आईएसआई व पाकिस्तानी आर्मी की मदद से ट्रेनिंग दी जाती थी। पिछले पांच साल में करीब 225 आतंकी बालाकोट से कश्मीर में भेजे गए थे। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, इस शिविर में प्रशिक्षित 36-41 फिदायीन आतंकी जल्द ही भारतीय सीमा में प्रवेश करने की तैयारी कर रहे थे।  
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सेना, आईबी, रॉ, एनआईए और जम्मू-कश्मीर के सुरक्षा बलों की संयुक्त रिपोर्ट पर चर्चा करने के बाद ही पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक की योजना बनाई गई थी। सुरक्षा एजेंसियों के पास जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी कैंप के दर्जनों फोटो और वीडियो मौजूद थे। केंद्र सरकार ने संबंधित एजेंसियों और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) के साथ बैठक कर एयर स्ट्राइक को अंजाम दिया है। 
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सेना और बीएसएफ के जवानों पर निशाना साधने वाले बैट (बॉर्डर एक्शन टीम), जिसे जैश का सहयोगी माना जाता था, के सदस्य भी बालाकोट में ही तैयार होते थे। पहाड़ी पर करीब आठ एकड़ में बने इस कैंप में करीब छह सौ लोगों के एक साथ रहने का इंतजाम था। कैंप के अंदर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी तैनात रहते थे, जबकि बाहर स्थानीय पुलिस और आर्मी लगी रहती थी। ले. जन शंकर प्रसाद (सेवानिवृत) का कहना है कि भारतीय एजेंसियों के पास यह पुख्ता जानकारी थी कि इस कैंप में आतंकियों की ट्रेनिंग हमेशा चलती रहती है।

सर्दियों में यहां से प्रशिक्षित आतंकियों को सीमा पार कराया जाता था। अगर भारत अब यह एयर स्ट्राइक नहीं करता तो बालाकोट की आतंकी फ़ैक्टरी से दर्जनों मानव बम भारतीय सीमा में प्रवेश कर जाते। वायु सेना ने बालाकोट पर बड़ा सोच समझकर टारगेट किया है। जैश-ए-मोहम्मद के अलावा आईएसआई को यह लग रहा था कि भारतीय वायु सेना सीमा से सटे इलाकों में बने शिविरों पर ही हमला करेगी। उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि वायु सेना के विमान सीमा के इतने अंदर घुस कर आतंकी शिविर को निशाना बना सकते हैं। 

दूसरी ओर, रॉ और आईबी को यह जानकारी मिल चुकी थी कि सीमा से लगते ट्रेनिंग कैंपों से आतंकियों को पहाड़ी पर बने कैंप में शिफ़्ट कर दिया गया था।भारतीय वायु सेना ने इसी कैंप पर बम बरसा दिए। मेजर जन. योगी बहल (सेवानिवृत) का कहना है कि यह स्ट्राइक बहुत जरूरी थी। जैश के इस कैम्प में तैयार आतंकी ईरान और पाक के क्रॉस बॉर्डर पर भी अपनी हरकत करते हैं। बलूचिस्तान में कथित तौर पर राजनीतिक हत्या, वहां के नागरिकों में दहशत फैलाना और बम विस्फोट जैसी घटनाओं को अंजाम देने के लिए भी बालाकोट से ही आतंकी बुलाए जाते थे।

रणनीतिकार कमर आगा का कहना है कि आतंकियों के कैंपों को खत्म करने के लिए पड़ोसी देश को कई बार चेताया गया था। हर बार पाकिस्तान यह कह कर अपना पल्ला झाड़ लेता कि उसके यहां पर कोई ट्रेनिंग कैंप नहीं चल रहा है। बाकायदा अंतरराष्ट्रीय मंचों से भी यह अपील की गई थी, लेकिन पाकिस्तान ने उसे अनसुना कर दिया। जब उसने आतंकी कैंपों को खत्म नहीं किया तो भारत ने वायु सेना का इस्तेमाल कर स्ट्राइक कर दी। आगा के मुताबिक, इसमें गलत क्या है। यही वजह है कि एयर स्ट्राइक के बाद दुनिया के अधिकांश देशों ने भारत की कार्रवाई को जायज ठहराया है।

सैन्य विशेषज्ञ राज कादियान का भी यही कहना है कि पाकिस्तान, आतंकवाद पर हमेशा डायलॉग करने की बात कहता है। परवेज मुशर्रफ जो कि राष्ट्रपति भी थे और सेना अध्यक्ष भी, ने कहा था कि पांच-छह साल में आतंकियों के ट्रेनिंग कैंप खत्म कर देंगे। वे कैंप अभी तक चल रहे हैं। भारत की यह कार्रवाई जायज है। पाकिस्तान अगर आतंक के खिलाफ कुछ करना चाहता है तो उसे सबसे पहले मसूद अजहर, हाफिज सईद और दाउद जैसे आतंकी भारत को सौंपने होंगे।
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