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रिजर्व बैंक की ‘ना’ कहने की ताकत को बचाना जरूरी : राजन
टीम डिजिटल, अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sat, 03 Sep 2016 05:49 PM IST
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रघुराम राजन
- फोटो : Reuters
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रिजर्व बैंक के गवर्नर का पद छोड़ने वाले रघुराम राजन ने कहा है कि केंद्रीय बैंक में सरकार के आला नेताओं और विभागों को ना कहने की जो क्षमता है, उसे संरक्षित किया जाना चाहिए। देश को एक मजबूत और स्वतंत्र बैंक की जरूरत है इसलिए ऐसा करना जरूरी है।
रविवार को दिल्ली के सेंट स्टीफन्स कॉलेज में केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता पर एक व्याख्यान के दौरान राजन ने कहा कि केंद्रीय बैंक बिल्कुल खुल कर काम नहीं कर सकता क्योंकि उसे सरकार की ओर से बनाए फ्रेमवर्क में काम करना होता है। लेकिन उसकी आजादी जरूरी है। उन्होंने पूर्ववर्ती डी. सुब्बाराव की नीतिगत मतभेदों से जुड़ी टिप्पणियों का जिक्र करते कहा कि वह थोड़ा और आगे जाना चाहेंगे। वह यह कहना चाहेंगे कि रिजर्व बैंक के ना कहने की जो ताकत है उसे अगर बरकरार नहीं रखा गया तो केंद्रीय बैंक का अस्तित्व ही नहीं रहेगा।
राजन ने डॉ. सुब्बाराव के उस बयान की याद दिलाई, जब उन्होंने कहा था कि मुझे अंदाजा है कि एक दिन वित्त मंत्री कहेंगे कि मैं रिजर्व बैंक से निराश हो चुका हूं। इतना निराश कि मैं वॉक पर जाना चाहता हूं चाहे मुझे अकेले ही क्यों न चलना पड़े। आप को बता दें कि पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम् ने बाद में ऐसा बयान दिया भी था। जब आरबीआई ने बार-बार कहने पर भी ब्याज दरों में कटौती नहीं की तो उन्होंने कहा कि था कि वह अकेले चलना पसंद करेंगे।
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रविवार को दिल्ली के सेंट स्टीफन्स कॉलेज में केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता पर एक व्याख्यान के दौरान राजन ने कहा कि केंद्रीय बैंक बिल्कुल खुल कर काम नहीं कर सकता क्योंकि उसे सरकार की ओर से बनाए फ्रेमवर्क में काम करना होता है। लेकिन उसकी आजादी जरूरी है। उन्होंने पूर्ववर्ती डी. सुब्बाराव की नीतिगत मतभेदों से जुड़ी टिप्पणियों का जिक्र करते कहा कि वह थोड़ा और आगे जाना चाहेंगे। वह यह कहना चाहेंगे कि रिजर्व बैंक के ना कहने की जो ताकत है उसे अगर बरकरार नहीं रखा गया तो केंद्रीय बैंक का अस्तित्व ही नहीं रहेगा।
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राजन ने डॉ. सुब्बाराव के उस बयान की याद दिलाई, जब उन्होंने कहा था कि मुझे अंदाजा है कि एक दिन वित्त मंत्री कहेंगे कि मैं रिजर्व बैंक से निराश हो चुका हूं। इतना निराश कि मैं वॉक पर जाना चाहता हूं चाहे मुझे अकेले ही क्यों न चलना पड़े। आप को बता दें कि पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम् ने बाद में ऐसा बयान दिया भी था। जब आरबीआई ने बार-बार कहने पर भी ब्याज दरों में कटौती नहीं की तो उन्होंने कहा कि था कि वह अकेले चलना पसंद करेंगे।
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