{"_id":"5be1a3d7bdec2269a00ad649","slug":"rbi-is-seat-belt-for-the-government-autonomy-should-be-respected","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकार के लिए सीट बेल्ट है आरबीआई, स्वायत्तता का करना चाहिए सम्मान : रघुराम राजन","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सरकार के लिए सीट बेल्ट है आरबीआई, स्वायत्तता का करना चाहिए सम्मान : रघुराम राजन
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Tue, 06 Nov 2018 07:53 PM IST
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raghuram rajan
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भारतीय रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय के बीच बढ़ती तनातनी को देखते हुए पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने मंगलवार को कहा कि रिजर्व बैंक, कार में सीट बेल्ट की तरह है, इसके बिना दुर्घटना हो सकती है। वहीं सरकार द्वारा आरबीआई अधिनियम की धारा 7 के उल्लेख पर उन्होंने कहा कि अच्छा होता यदि दोनों पक्ष एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करते।
ऐतिहासिक तौर पर देखें तो सरकार को आरबीआई द्वारा तय की गई सीमाओं के तहत विकास में वृद्धि लाने की दिशा में काम करना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि आरबीआई की सीमाएं वित्तीय स्थिरता पर निर्धारित होती हैं। दबाव बनाकर सरकार की कोशिश होती है कि आरबीआई का रुख नरम किया जाए। आरबीआई भी वित्तीय संकट की स्थिति का आंकलन करते हुए बेहद करीब से उनका अध्ययन करना चाहिए।
हमारे ऊपर वित्तीय स्थिरता की जिम्मेदारी होती है और इसलिए हमारे पास ना कहने का अधिकार होता है। उन्होंने कहा कि आरबीआई सीट बेल्ट की तरह है। वहीं सरकार चालक की तरह है। यह संभव है कि आप सीट बेल्ट ना लगाएं लेकिन अगर आप सीट बेल्ट नहीं लगाते हैं तो आप दुर्घटना के शिकार हो सकते हैं और दुर्घटना गंभीर हो सकती है।
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राजन ने कहा कि आरबीआई बिना मतलब ना नहीं कह सकती है। उसने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि उसने स्थिति का आंकलन किया और माना कि इस कदम से बहुत अधिक आर्थिक स्थिरता पैदा हो जाएगी। एक बार आपने उप गवर्नर और गवर्नर की नियुक्ति कर दी तो आपको उनकी बात सुननी चाहिए क्योंकि आपने उन्हें उसी लिए नियुक्त किया है और वे आपके सेफ्टी बेल्ट हैं।
सिद्धू नहीं, राहुल द्रविड़ बने बोर्ड
19 नवंबर को होने वाली आरबीआई बोर्ड की बैठक से पहले राजन ने कहा कि ऐतिहासिक तौर पर इसकी भूमिका निर्णय लेने की बजाय व्यापक रणनीति तैयार करने के साथ सुशासन सुनिश्चित करना है। इसलिए मेरा मानना है कि बोर्ड का उद्देश्य दूसरों के हितों को पूरा करना नहीं बल्कि संस्थान की रक्षा करना है। बोर्ड को राहुल द्रविड़ बनना चाहिए ना कि नवजोत सिंह सिद्धू।
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ऐतिहासिक तौर पर देखें तो सरकार को आरबीआई द्वारा तय की गई सीमाओं के तहत विकास में वृद्धि लाने की दिशा में काम करना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि आरबीआई की सीमाएं वित्तीय स्थिरता पर निर्धारित होती हैं। दबाव बनाकर सरकार की कोशिश होती है कि आरबीआई का रुख नरम किया जाए। आरबीआई भी वित्तीय संकट की स्थिति का आंकलन करते हुए बेहद करीब से उनका अध्ययन करना चाहिए।
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हमारे ऊपर वित्तीय स्थिरता की जिम्मेदारी होती है और इसलिए हमारे पास ना कहने का अधिकार होता है। उन्होंने कहा कि आरबीआई सीट बेल्ट की तरह है। वहीं सरकार चालक की तरह है। यह संभव है कि आप सीट बेल्ट ना लगाएं लेकिन अगर आप सीट बेल्ट नहीं लगाते हैं तो आप दुर्घटना के शिकार हो सकते हैं और दुर्घटना गंभीर हो सकती है।
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राजन ने कहा कि आरबीआई बिना मतलब ना नहीं कह सकती है। उसने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि उसने स्थिति का आंकलन किया और माना कि इस कदम से बहुत अधिक आर्थिक स्थिरता पैदा हो जाएगी। एक बार आपने उप गवर्नर और गवर्नर की नियुक्ति कर दी तो आपको उनकी बात सुननी चाहिए क्योंकि आपने उन्हें उसी लिए नियुक्त किया है और वे आपके सेफ्टी बेल्ट हैं।
सिद्धू नहीं, राहुल द्रविड़ बने बोर्ड
19 नवंबर को होने वाली आरबीआई बोर्ड की बैठक से पहले राजन ने कहा कि ऐतिहासिक तौर पर इसकी भूमिका निर्णय लेने की बजाय व्यापक रणनीति तैयार करने के साथ सुशासन सुनिश्चित करना है। इसलिए मेरा मानना है कि बोर्ड का उद्देश्य दूसरों के हितों को पूरा करना नहीं बल्कि संस्थान की रक्षा करना है। बोर्ड को राहुल द्रविड़ बनना चाहिए ना कि नवजोत सिंह सिद्धू।