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एंजेल वन की रिपोर्ट: आरबीआई की ओर से ब्याज दरों में और ढील देने के आसार, बैंकों का एनपीए बढ़ने की संभावना
Sun, 15 Jun 2025 05:56 AM IST
शुभम कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शुभम कुमार
Updated Sun, 15 Jun 2025 05:56 AM IST
सार
एंजेल वन की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही में आरबीआई तरलता बढ़ा सकता है। मई में महंगाई दर 2.82% रही, जो अप्रैल से कम है। पहली तिमाही में महंगाई 2.9% रहने का अनुमान है। इसलिए ब्याज दरों में जल्द राहत संभव है।
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भारतीय रिजर्व बैंक
- फोटो : ANI
विस्तार
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से ब्याज दरों में और ढील दिए जाने की संभावना है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही में अतिरिक्त तरलता की आवश्यकता हो सकती है। एंजेल वन की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में महंगाई 2.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। अप्रैल और मई महीने की औसत महंगाई इस अनुमान के करीब पहुंच रही है।
रिपोर्ट में कहा गया कि आरबीआई थोड़े समय के विराम के बाद ब्याज दरों में और अधिक ढील देगा, क्योंकि दूसरी छमाही में अधिक तरलता की आवश्यकता होगी। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) महंगाई में बीते महीने मई में सालाना आधार पर उल्लेखनीय कमी आई, जो अप्रैल में 3.16 प्रतिशत से कम होकर 2.82 प्रतिशत हो गई है। महंगाई में भी थोड़ी कमी आई है, जो पिछले महीने के 4.36 प्रतिशत की तुलना में 4.28 प्रतिशत पर आ गई है।
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बैंकों का एनपीए बढ़ने की संभावना
देश की बैंकिंग प्रणाली में गैर निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में थोड़ी बढ़ने की संभावना है। इसका मुख्य कारण रिटेल लोन सेगमेंट (खुदरा ऋण खंड) विशेष रूप से असुरक्षित निजी और माइक्रोफाइनेंस ऋणों में बढ़ता तनाव है।
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रिपोर्ट में कहा गया कि आरबीआई थोड़े समय के विराम के बाद ब्याज दरों में और अधिक ढील देगा, क्योंकि दूसरी छमाही में अधिक तरलता की आवश्यकता होगी। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) महंगाई में बीते महीने मई में सालाना आधार पर उल्लेखनीय कमी आई, जो अप्रैल में 3.16 प्रतिशत से कम होकर 2.82 प्रतिशत हो गई है। महंगाई में भी थोड़ी कमी आई है, जो पिछले महीने के 4.36 प्रतिशत की तुलना में 4.28 प्रतिशत पर आ गई है।
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बैंकों का एनपीए बढ़ने की संभावना
देश की बैंकिंग प्रणाली में गैर निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में थोड़ी बढ़ने की संभावना है। इसका मुख्य कारण रिटेल लोन सेगमेंट (खुदरा ऋण खंड) विशेष रूप से असुरक्षित निजी और माइक्रोफाइनेंस ऋणों में बढ़ता तनाव है।
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