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RTI: नोटबंदी के सुझाव बताने में कतराया आरबीआई

Wed, 28 Dec 2016 05:01 AM IST
अमित कुमार निरंजन, नई दिल्ली
अमित कुमार निरंजन, नई दिल्ली Updated Wed, 28 Dec 2016 05:01 AM IST
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rbi didn't give answer to rti query regarding who give demontiezation suggestion
नोटबंदी के जरिए केन्द्र सरकार भ्रष्टाचार मिटाने का दावा कर रही है। लेकिन इस बारे में जानकारी देने में केन्द्र ने हाथ खड़े कर दिए। एक आरटीआई एक्टिविस्ट के आरटीआई आवेदन को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने यह कहते हुए जानकारी देने से मना कर दिया कि यह मामला देश की संप्रुभता से जुड़ा है। एक्टिविस्ट ने नोटबंदी को लेकर हुई मीटिंग के बारे में जानकारी मांगी थी।
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8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मादी ने देश में 500 और 1000 के पुराने नोट बंद करने का ऐलान किया था। जिसे लेकर देशभर में अलग-अलग प्रतिक्रिया हुई। इस मामले में सरकार की ओर से बयान आने शुरू हुए कि नोटंबदी करने को लेकर उन्हें अलग-अलग संस्थाओं से कई सुझाव और सलाह मिले।
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इसी संबंध में सीएचआरआई के सदस्य और आरटीआई एक्टिविस्ट वेंकटेश नायक ने 14 नवंबर को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) में आरटीआई आवेदन लगाया। जिसमें उन्होंने नोटबंदी को लेकर सरकार को मिलने वाले सुझाव की जानकारी मांगी। यह भी पूछा कि यह सुझाव किसने दिए, इस संबंध में होने वाली मीटिंग का पूरा ब्योरा दीजिए।
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इसकी जानकारी देने से आरटीबीआई ने आरटीआई एक्ट की धारा 8(1)(अ) और 7 (9) का हवाला देकर वेंकटेश को जानकारी देने से मना कर दिया। आरटीआई एक्ट की धारा 8(1)(अ) के जनसूचना अधिकारी उन सूचनाओं को देने के लिए बाध्य नहीं जो देश की संप्रुभता और अखंडता से जुड़े हों।

वहीं धारा 7 (9) के तहत अगर सूचना को देने में ज्यादा खर्चा आता हो तो इस प्रकार की सूचना देने के लिए जन सूचना अधिकारी बाध्य नहीं है। इन दोनों धाराओं का सहारा लेते हुए आरबीआई ने जानकारी देने से मना कर दिया।
    
आरटीआई एक्टिविस्ट वेंकटेश का कहना है कि नोटबंदी का फैसला पूरे देश पर लागू हुआ इसिलिए यह सार्वजनिक जानकारी साझा करने के दायरे में आता है।     इसके अलावा जनसूचना अधिकारी सार्वजनिक हित की जानकारी साझा करने में संप्रुभता-अखंडता का कारण क्या सोच कर बताया यह समझ से परे है। अगर नोटबंदी के फैसले की मीटिंग की जानकारी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से दी जा सकती थी। इस बारे में आवेदक ने पहली अपील फाइल करेंगे।

    
दरअसल आरटीआई से निकली यह जानकारी इसिलए और अहम हो जाती है क्योंकि सरकार की ओर से बार-बार बयान आ रहे हैं कि नोटबंदी के तरीके और फैसले पर सवाल करने की बजाय इससे मिलने वाले परिणाम पर ध्यान देने की जरूरत है। इस तरह का बयान वित्त मंत्रालय के सेक्रेटरी शक्तिकांता दास ने दिया है। 
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