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विरल आचार्य को रिजर्व बैंक का पद पहले ही छोड़ देना था

Mon, 24 Jun 2019 07:58 PM IST
शशिधर पाठक शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: शशिधर पाठक Updated Mon, 24 Jun 2019 07:58 PM IST
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rbi deputy governor of india viral acharya always speaks his mind
विरल आचार्य - फोटो : ANI
मुंबई आईआईटी के कंप्यूटर इंजीनियर और रिजर्व बैंक के सबसे युवा डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य को पिछले साल ही पद छोड़ देना था। रिजर्व बैंक से जुड़े वरिष्ठ सूत्र के अनुसार अक्टूबर 2018 में आरएसएस विचारधारा से जुड़े अर्थशास्त्री और केंद्रीय बैंक के पार्ट टाइम निदेशक एस गुरूमूर्ति के साथ रिजर्व बैंक की स्वायत्तता को लेकर विवाद में आए विरल आचार्य तो कुछ ज्यादा ही टिक गए। 17 जून 2017 को रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल की सलाह से डिप्टी गवर्नर का पदभार संभालने वाले विरल पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन के अर्थशास्त्र के कायल हैं। विरल का पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल से अच्छा तालमेल था और रिजर्व बैंक की स्वायत्ता को लेकर विरल ने खूब बोला। केंद्रीय बैंक के डिप्टी गवर्नर को तत्कालीन बैंक के गवर्नर का सहयोग भी मिला और बताते हैं 10 दिसंबर 2018 को उर्जित पटेल के इस्तीफा देने के बाद विरल का जाना तय माना जा रहा था।
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खूब बोले विरल आचार्य

कम उम्र, यू कहें की 42 साल की उम्र में रिजर्व बैंक का तीन साल के लिए डिप्टी गवर्नर बनना। 1995 में राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित होना। कुछ तो खूबियां रही होंगी न्यूयार्क विश्वविद्यालय से डाक्टरेट विरल आचार्य में। लेकिन इसके साथ-साथ जोश और जज्बा भी खूब था। विरल उन डिप्टी गवर्नरों में रहे जो गरीब, गरीबी और गरीबों की स्थिति को समझते थे। संगीत में रुचि थी और खुद की बनाई म्यूजिक सीडी से हुई आमदनी को परोपकार में दे दिया था। यह सोच उनके अर्थशास्त्र में दिखती थी। 
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बताते हैं मुद्रास्फीति की दर को लेकर चिंतित रहने वाले विरल आचार्य मौद्रिक नीति में मंहगाई दर को लेकर नरम रुख अपनाने पर विरोध में उतर आते थे। खुद को गरीबों का रघुराम राजन बता चुके हैं। कहा जा सकता है कि पिछले कुछ दशक में रिजर्व बैंक में मौद्रिक नीति, आर्थिक नीति और स्वायत्तता को लेकर किसी भी डिप्टी गवर्नर ने इतना बोलने की हिम्मत नहीं जुटाई। पिछले साल 26 अक्टूबर को भी उन्होंने खुलकर बयान दे दिया था। यह बयान केंद्रीय बैंक और सरकार के बीच में टकराव के तौर पर देखा जाने लगा था। 
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विरल अपना पक्ष रखने में कभी नहीं चूके। पिछले साल का उनका कटाक्ष एक संस्मरण है। इसमें विरल ने कहा था कि जो सरकारें केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता का सम्मान नहीं करती, उन्हें देर-सबेर वित्तीय बाजारों के आक्रोश का सामना करना ही पड़ता है। विरल का यह बयान उनके इस्तीफा देने के बाद भी खूब याद किया जा रहा है।

दरअसल सरकार के आर्थिक सलाहकारों का एक तबका चाह रहा था कि केंद्रीय बैंक अपने रिजर्व से कुछ राशि जारी करे और इसका इस्तेमाल लघु, मध्यम और मझोले उद्योगों के कारोबार को बढ़ाने में हो। विरल का पक्ष था कि सरकार वित्तीय फंडामेंटल को न छेड़े, क्योंकि यह आने वाली आपात स्थितियों से निबटने के लिए है। 

कैसे रिजर्व बैंक में आए थे विरल आचार्य

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रिजर्व बैंक
रिजर्व बैंक में गवर्नर के बाद चार डिप्टी गवर्नर होते हैं। इनकी नियुक्ति सरकार गवर्नर की राय को अहमियत देते हुए करती है। परंपरा है कि चार डिप्टी गवर्नर में दो केंद्रीय बैंक के ही अधिकारी होते हैं। एक डिप्टी गवर्नर कामर्शियल बैंकिंग क्षेत्र से आता है। जैसे इस समय महेश कुमार जैन हैं। चौथा डिप्टी गवर्नर कोई जाना माना अर्थशास्त्री होता है। यही चौथे डिप्टी गवर्नर के रूप में विरल आचार्य 20 जनवरी 2017 को तीन साल के लिए चुने गए थे। 

मौजूदा समय में जैन के अलावा रिजर्व बैंक के पास दो गवर्नर बचे हैं। इसमें एक बीपी कानूनगो हैं। सबसे वरिष्ठ डिप्टी गवर्नर एनएस विश्वनाथन हैं। विश्वनाथन का कार्यकाल अगले महीने समाप्त हो रहा है। विश्वनाथन के स्थान पर नये डिप्टी गवर्नर की नियुक्ति अभी नहीं हो सकी है। इस तरह से सरकार के सामने दो नए डिप्टी गवर्नर को नियुक्ति करने की जिम्मेदारी आ गई है। समझा जा रहा है कि ऐसी स्थितियों में केंद्र सरकार विश्वनाथन को कुछ समय का सेवा विस्तार भी दे सकती है।

अमेरिका लौट सकते हैं

विरल आचार्य के बारे में कहा जा रहा है कि नीतिगत मामलों में गहराई से रुचि लेते थे। स्थापित अर्थशास्त्र की अवधारणाओं को लेकर उनके पास एक सोच थी। बाजारोन्मुखी अर्थशास्त्र की बारीकियों के बारे में जानकारी रखकर बेबाकी से अपनी राय रखते थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार माइक्रो और मैक्रो इकोनॉमिक्स और इकोनॉमिकल मैनेजमेंट में रुचि रखने वाले विरल शिक्षण की दुनिया में लौट सकते हैं। उन्हें जानने वाले कुछ सहयोगियों का अनुमान है कि वह अमेरिका में जाकर पठन-पाठन का चयन कर सकते हैं। इस बारे में अभी न तो विरल ने ही कोई जानकारी दी है और न ही कोई तथ्य सामने आया है।
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