Navy Day: 'भारतीय संस्कृति के अनुसार बदला जाएगा नौसेना में रैंकों का नाम', नौसेना दिवस पर PM मोदी ने की घोषणा
Navy Day: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत का इतिहास 1000 की गुलामी का नहीं बल्कि भारत का इतिहास विजय, शौर्य, ज्ञान-विज्ञान, कला, सृजन कौशल और सामुद्रिक सामर्थ्य का इतिहास है। सैकड़ों वर्ष पहले जब ऐसे संसाधन नहीं थे तब उस जमाने में समुंदर को चीरकर सिंधुदुर्ग जैसे कितने किले बनाए गए।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को घोषणा की कि भारतीय संस्कृति के अनुसार नौसेना में रैंकों का नाम बदला जाएगा। उन्होंने सिंधुदुर्ग में नौसेना दिवस समारोह को संबोधित करते समय यह एलान किया। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि हम अपने सशस्त्र बलों में महिला शक्ति को बढ़ाने पर भी काम कर रहे हैं। उन्होंने जहाज पर देश की पहली महिला कमांडिंग अफसर नियुक्त करने पर नौसेना को बधाई दी। बता दें कि एक साल पहले प्रधानमंत्री ने छत्रपति शिवाजी महाराज से प्रेरित होकर नौसेना का नया ध्वज जारी किया था।
राजकोट किले में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का अनावरण करने के बाद नौसेना दिवस 2023 पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने नौसेना को ताकतवर बनाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि नौसेना के ध्वज की प्रतिकृति में छत्रपति शिवाजी महाराज की राजमुद्रा का चिह्न है। लेकिन नौसेना अधिकारी जो एपॉलेट पहनते हैं, उसमें भी अब छत्रपति शिवाजी महाराज की झलक दिखाई देगी।
उन्होंने आगे कि सरकार सशस्त्र बलों में महिलाओं की संख्या बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने जब समुद्र पर नियंत्रण खोया कमजोर हुए। इस खोये हुए गौरव का वापस पाना हमारा लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज को भरोसा था कि जिसने समुद्र पर नियंत्रण पा लिया वह सर्वशक्तिमान है। इसलिए, उन्होंने एक शक्तिशाली नौसेना बनाई। उनसे प्रेरणा लेकर आज भारत गुलामी की मानसिकता को छोड़कर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि विदेशियों ने हमारी शक्ति को निशाना बनाया। नाव और जहाज बनाने की हमारी कला को ठप कर दिया गया। आज जब हम विकसित भारत के लक्ष्य पर आगे बढ़ रहे है तो इस खोये हुए गौरव को फिर से पाकर रहना है। सरकार इस दिशा में आगे बढ़ रही है। सागरमाला के तहत पौर्टलैंड डेवलपमेंट हो रहा है। मेरीटाईम विजन के तहत देश अपने सागरों के पूरे सामर्थ्य का इस्तेमाल करने की ओर आगे बढ़ रहा है। मर्चेंट शिपिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने नए नियम बनाए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का भारत अपने लिए बड़े लक्ष्य तय कर रहा है। उसे पाने के लिए पूरी शक्ति लगा रहा है। भारत के पास इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए 140 करोड़ के विश्वास और दुनिया की सबसे बड़े लोकतंत्र की ताकत है।
तीन राज्यों (राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़) के चुनाव नतीजों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कल आपने देखा जब लोगों की भावनाएं और आकांक्षाएं जुड़ती हैं तो कितने सार्थक परिणाम दिखते हैं। सभी राज्य राष्ट्र प्रथम की भावना से ओतप्रोत हैं। देश आगे बढ़ेगा तो हम आगे बढ़ेगा यह भावना हर नागरिक के मन में है। यही प्रण विकसित भारत की ओर ले जाएगा। मोदी ने तारकर्ली समुद्र तट से भारतीय नौसेना के जहाजों, पनडुब्बियों, विमानों और विशेष बलों के अभियानगत प्रदर्शन को देखा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विकसित भारत की यात्रा और तेज करनी है जिसमें सुरक्षित, समृद्ध और शक्तिशाली हो सके। पूर्व की सरकारों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पहले ये कार्यक्रम दिल्ली में मनाए जाते रहे हैं। मैने उस परंपरा को बदला है। मेरी कोशिश है कि सेना, वायु सेना और नौसेना दिवस देश के अलग-अलग हिस्से में हो। उसी के तहत सिंधुदुर्ग में नौसेना दिवस मनाया जा रहा है इस पवित्र भूमि पर हो रहा है जहां पर नेवी का जन्म हुआ है। अब देश के लोगों का सिंधुदुर्ग के प्रति एक तीऱ्थ का भाव पैदा होगा। जिस नेवी पर हम गर्व करते हैं उसकी मूल धारा शिवाजी महाराज से शुरू होती है। इसके लिए रक्षामंत्री को बधाई देता हूं। विदेशी मेहमानों के लिए भी यह नई चीज होगी कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने नेवी का कांसेप्ट शुरू किया था।
अंतरिक्ष हो या समंद, दुनिया को दिख रहा भारत का सामर्थ्य
पीएम मोदी ने कहा कि ये भारत के इतिहास का वो कालखड है जो 5-10 वर्ष नहीं बल्कि आने वाली सदियों का भविष्य लिखने वाला है। अंतरिक्ष हो या समंदर दुनिया को भारत का सामर्थय दिख रहा है। पूरी दुनिया भारत मिडिल ईस्ट और यूरोप कॉरीडोर का चर्चा है। उन्होंने कहा कि मेड इन इंडिया की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। तेजस विमान हो या किसान ड्रोन, यूपीआई सिस्टम हो या फिर चंद्रयान 3, हर जगह हर सेक्टर में मेड इन इंडिया की धूम है। प्रधानमंत्री ने देश की पहली महिला कमांडिग अफसर की तैनाती के लिए नौसेना को बधाई दते हुए कहा कि सरकार सशस्त्र बलों में महिलाओं की संख्या बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारत का इतिहास गुलामी का नहीं...
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत का इतिहास 1000 की गुलामी का नहीं बल्कि भारत का इतिहास विजय, शौर्य, ज्ञान-विज्ञान, कला, सृजन कौशल और सामुद्रिक सामर्थ्य का इतिहास है। सैकड़ों वर्ष पहले जब ऐसे संसाधन नहीं थे तब उस जमाने में समुंदर को चीरकर सिंधुदुर्ग जैसे कितने किले बनाए गए। गुजरात के लोथल में मिला सिंधुघाटी की सभ्यता का पौथ हमारी बड़ी विरासत है। सूरत के बंदरगाह पर 80 देशों से ज्यादा जहाज लंगर डालकर रहा करते थे। चोल साम्राज्य ने इसी के बल पर कई देशो में व्यापार बढ़ाया। पूरी दुनिया भारत मिडिल ईस्ट और यूरोप कॉरीडोर की चर्चा है।