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रामवृक्ष : कुशीनगर से चुनाव लड़ा, भटनी में की थी डॉक्टरी
ब्यूरो/अमर उजाला , कुशीनगर/ देवरिया/ गाजीपुर
Updated Sun, 05 Jun 2016 03:54 AM IST
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- फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, गाजीपुर
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मथुरा कांड का मुख्य आरोपी रामवृक्ष यादव 2009 में पडरौना संसदीय सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ा था। पूर्व गृह राज्यमंत्री और स्वामी प्रसाद मौर्या समेत 18 उम्मीदवारों के इस चुनाव में 5955 वोट जुटाकर वह नवें नंबर पर रहा था। उस वक्त करीब दो महीने तक कुशीनगर में सक्रिय रहा रामवृक्ष ‘रुपया फ्राड है’ विषय पर तकरीर और प्रचार से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचता था। खानपान का सामान और विस्तर अपने प्रचार रथ में रखकर गांव-गांव घूमा था, हालांकि चुनाव बाद इलाके के लोगों ने उसकी शक्ल नहीं देखी।
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नामांकन के वक्त घोषणा पत्र में रामवृक्ष ने खुद को गाजीपुर में मरदह स्थित पचोत्तर नेशनल इंटर कॉलेज से इंटर पास बताया था। उम्र 54 साल बताते हुए अपने पास एक लाख नकदी, पत्नी के पास 100 ग्राम सोना, 500 ग्राम चांदी थी। छह डिस्मिल जमीन और एक कच्चे मकान का स्वामी बताया था।
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नाम सुर्खियों में आते ही देवरिया जिले के लोगों ने रामवृक्ष यादव के भटनी में होम्योपैथी चिकित्सक के रूप में सक्रिय रहने की जानकारी साझा की। लोगों ने बताया कि करीब छह साल पहले हरीकीर्तन मोहल्ले में एक होम्योपैथ डॉक्टर की क्लीनिक पर सप्ताह में एक दिन मौजूद रहकर वह डॉक्टर के अंदाज में रोगियों को देखता था और होम्योपैथी की दवाएं देता था। भटनी के घनश्याम ने बताया कि उस दौरान करीब दो साल की सक्रियता में वह जय गुरुदेव की संस्था से लोगों को जोड़ने के लिए प्रचार भी करता था।
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होम्योपैथ चिकित्सा की आड़ में गोलबंदी करता था रामवृक्ष
बुजुर्गा और भटनी बाजार में खोल रखा था दवाखाना
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, मथुरा-बरेली
जवाहरबाग कांड का मुख्य आरोपी रामवृक्ष जयगुरुदेव के नाम की आड़ में चिकित्सा जैसे पवित्र पेशे को हथियार बनाकर अपनी गोलबंदी कर रहा था। गाजीपुर के बुजुर्गा, सराय और गोकुलरोड तथा देवरिया के भटनी बाजार को उसने अपना प्रमुख केंद्र बना रखा था। इन दोनों स्थानों पर खोले गए होम्योपैथिक दवाखाने में इलाज के बहाने लोगों से संपर्क और निकटता बढ़ाता था। उसके करीबियों की माने तो गाजीपुर और भटनी दोनों केंद्रों से 50 से अधिक लोगों को वह मथुरा ले गया था। यह कार्य वह चिकित्सक बन धर्म की आड़ में बड़े गुपचुप तरीके से करता था।
खास बात यह है कि दोनों स्थानों पर दवाखाना खोलकर लोगों का इलाज करने वाले रामवृक्ष के पास होम्योपैथ की डिग्री थी कि नहीं यह उसके नजदीकी लोगों को भी पता नहीं है। वैसे इस बात की पुष्टि अब काफी लोग करने लगे हैं कि गाजीपुर तथा देवरिया जिले से बहुतों को लेकर वह मथुरा गया था। इन केंद्रों के आस-पास रामवृक्ष ने अपनी छवि ऐसी बना रखी थी कि लोगों को अब भी इस बात पर विश्वास नहीं हो रहा है कि उसने ऐसा कृत्य किया होगा। उसके एक निकट सहयोगी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि रामवृक्ष बुजुर्गा तथा भटनी बाजार में जयगुरुदेव के प्रचार-प्रसार के लिए कठिन परिश्रम करता था।
साथ ही महीने में एक बार लोगों की बैठकें भी लेता था। उसे जानने वाले कुछ लोग दबी जुबान से यह भी कह रहे हैं कि वह गोलबंदी करने का काम बहुत ही सुनियोजित तरीके से करता था। सूरत इतनी भोली बनाए रहता था कि उसने ऐसा किया है विश्वास नहीं होता। जवाहरबाग की घटना के बाद सभी कहने लगे हैँ कि भोले चेहरे के पीछे रामवृक्ष इतना क्रूर था यह तो अब पता चला है।
खास बात यह है कि दोनों स्थानों पर दवाखाना खोलकर लोगों का इलाज करने वाले रामवृक्ष के पास होम्योपैथ की डिग्री थी कि नहीं यह उसके नजदीकी लोगों को भी पता नहीं है। वैसे इस बात की पुष्टि अब काफी लोग करने लगे हैं कि गाजीपुर तथा देवरिया जिले से बहुतों को लेकर वह मथुरा गया था। इन केंद्रों के आस-पास रामवृक्ष ने अपनी छवि ऐसी बना रखी थी कि लोगों को अब भी इस बात पर विश्वास नहीं हो रहा है कि उसने ऐसा कृत्य किया होगा। उसके एक निकट सहयोगी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि रामवृक्ष बुजुर्गा तथा भटनी बाजार में जयगुरुदेव के प्रचार-प्रसार के लिए कठिन परिश्रम करता था।
साथ ही महीने में एक बार लोगों की बैठकें भी लेता था। उसे जानने वाले कुछ लोग दबी जुबान से यह भी कह रहे हैं कि वह गोलबंदी करने का काम बहुत ही सुनियोजित तरीके से करता था। सूरत इतनी भोली बनाए रहता था कि उसने ऐसा किया है विश्वास नहीं होता। जवाहरबाग की घटना के बाद सभी कहने लगे हैँ कि भोले चेहरे के पीछे रामवृक्ष इतना क्रूर था यह तो अब पता चला है।
रामवृक्ष ने आखिरी बार अप्रैल में ली 15 हजार रुपये पेंशन
सपा की जिस सरकार ने मथुरा कांड के मास्टर माइंड रामवृक्ष यादव को लोकतंत्र रक्षक सेनानी का सम्मान दिया। उसे पेंशन दी। उसी सरकार को जवाहरबाग से कब्जा हटवाने में उसने नाको चने चबवा दिए। पूरी रात चली कार्रवाई के बाद भी पुलिस उसे जिंदा नहीं पकड़ पाई। हालांकि जीवन आराम से गुजारने के लिए सरकार से पेंशन के 15 हजार रुपये उसे पिछले माह ही उसके खाते में भेजे गए हैं।
एडीएम (वित्त एवं राजस्व) आनंद कुमार ने बताया कि रामवृक्ष को खाते में अप्रैल तक की पेंशन भेजी गई है। आपातकाल के दौरान जेल जाने वाले लोगों को सपा की सरकार ने लोकतंत्र रक्षक सेनानी का दर्जा देते हुए उन्हें पेंशन देने का निर्णय लिया था। वर्ष 2012 के अप्रैल माह से उसे पेंशन दी जा रही थी। सरकार ने इस वर्ष अप्रैल महीने से इसे दस हजार से बढ़ा कर15 हजार रुपये कर दिया था।
एडीएम (वित्त एवं राजस्व) आनंद कुमार ने बताया कि रामवृक्ष को खाते में अप्रैल तक की पेंशन भेजी गई है। आपातकाल के दौरान जेल जाने वाले लोगों को सपा की सरकार ने लोकतंत्र रक्षक सेनानी का दर्जा देते हुए उन्हें पेंशन देने का निर्णय लिया था। वर्ष 2012 के अप्रैल माह से उसे पेंशन दी जा रही थी। सरकार ने इस वर्ष अप्रैल महीने से इसे दस हजार से बढ़ा कर15 हजार रुपये कर दिया था।