{"_id":"5761daf04f1c1bae4711b89f","slug":"ramvriksh-become-rich-by-the-money-of-donation","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिना कोई काम करे कैसे मालामाल हुआ रामवृक्ष यादव, आप भी जान लीजिए","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
बिना कोई काम करे कैसे मालामाल हुआ रामवृक्ष यादव, आप भी जान लीजिए
पुनीत शर्मा/अमर उजाला, मथुरा
Updated Thu, 16 Jun 2016 01:43 PM IST
विज्ञापन
जयगुरुदेव के नाम पर देश भर से पैसा इकट्ठा किया गया।
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, मथुरा-बरेली
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जवाहर बाग हिंसा के सूत्रधार रामवृक्ष यादव और उसके गुर्गे चंदनबोस और राकेश गुप्ता ने चंदे के धंधे से खूब माल कमाया। बाबा जयगुरुदेव के नाम पर देश भर से पैसा इकट्ठा किया गया। चंदनबोस ने तो कई बड़े कारोबारियों से भी पैसा लिया है। पुलिस ने जवाहर बाग से चार जून को जो रजिस्टर बरामद किया था वह जालसाजी के पूरे नेटवर्क का खुलासा कर रहा है।
विज्ञापन
जवाहर बाग में बैठकर रामवृक्ष यादव ने खूब पैसा वसूला है। कभी भंडारे के नाम पर कारोबारियों से चंदा लिया तो कभी तिरपाल के नाम पर। बाबा जयगुरुदेव के पोस्टर छपवाने के नाम पर भी उड़ीसा से पैसा आया था। हालांकि जो रजिस्टर जवाहर बाग से पुलिस को मिला था उसमें पैसा देने वाले का नाम तो नहीं लिखा है, लेकिन माना जा रहा है कि वह जयगुरुदेव के अनुयायी रहे होंगे। रजिस्टर में जो लिखा गया है उसमें गुप्तदान का ज्यादा उल्लेख है। यानी पैसा देने वाले सामने नहीं आना चाहते थे।
विज्ञापन
जवाहर बाग से मिले रजिस्टर के मुताबिक
- गुप्त दान आया 224460 (उड़ीसा)।
- गुप्त दान आया 45000 (झारखंड)।
- गुप्त दान आया 28000 (बिहार)।
- गुप्त दान आया 80000 ( दिल्ली)।
- गुप्तदान आया 50000 (पंजाब)।
- गुप्तदान आया 80000 ( उत्तराखंड)।
- तिरपाल खरीदने को हुआ 25000 का गुप्तदान।
- भंडारे की सेवा और काफिले के लिए दान 155200।
- कन्नौज, अलीगढ़, बरेली, बदायूं, लखीमपुर खीरी, सहारनपुर, मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, कुशीनगर, गोरखपुर, बस्ती, देवरिया, आजमगढ़, कानपुर नगर से आया दान 32550।
विज्ञापन
- पोस्टर खर्च के लिए आया पैसा 38250।
- लुधियाना से एक कारोबारी ने दिया पैसा-14440।
रामवृक्ष यादव: गाजीपुर जिले के गांव रामपुर बांगसुर का निवासी। गांव में दो बीघा जमीन (कई साल से हल तक नहीं चला)। पंद्रह साल पहले तक आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। अब गाड़ियों में घूमता था। तीन बोलेरो गाड़ी थीं रामवृक्ष पर। उसने चार प्राइवेट अंगरक्षक भी रख रखे थे। बेटा सीपीएमटी के लिए पढ़ाई कर रहा है। गाजीपुर में मकान बना लिया। कई जगह प्लाट भी बताए जा रहे हैं।
राकेश गुप्ता उर्फ सचिव: बदायूं के दातागंज तहसील क्षेत्र का निवासी। पहले आर्थिक स्थिति सामान्य थी, अब बदायूं के सिविल लाइंस इलाके में कोठी है। कई प्लाट भी उसने खरीद लिए हैं। उसके पास दो शस्त्र लाइसेंस और स्कार्पियो गाड़ी भी है उसके पास।
चंदनबोस: आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी, यह साइकिल से चलता था। आज चार पहिया गाड़ी से घूमता है। मकान भी बना लिया है। उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों से चंदा वसूली का काम करता है।