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महू में बोले राष्ट्रपति कोविंद- बाबा साहेब कहते थे मैं भारतीय हूं, इसलिए हिंदू हूं
राजेश चतुर्वेदी, भोपाल
Updated Sat, 14 Apr 2018 08:23 PM IST
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का जन्मदिन
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महू में बाबा साहेब आंबेडकर की प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित करने के बाद देश भर से पहुंचे लाखों अनुयायियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि जय भीम का मतलब है बाबा साहेब के आदर्श। कोविंद ने कहा, बाबा साहेब कहा करते थे कि मैं भारतीय हूं। अत: हिंदू हूं, अमीर या गरीब हूं, ये शब्द हमें नहीं कहना चाहिए। ये शब्द विभाजनकारी हैं।
उन्होंने कहा कि उनका बनाया संविधान आजादी के साथ जीवन जीने का अधिकार देता है।
शिक्षा का अधिकार भी इन अधिकारों में शामिल है। बाबा साहेब का मानना था कि मनुष्य के लिए शिक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है। शिक्षा के बिना विकास मुमकिन ही नहीं है। आजादी के बाद नेहरू जी की पहली कैबिनेट में बाबा साहेब विधि मंत्री बनाए गए थे। कैबिनेट के सभी सदस्यों में सर्वाधिक डिग्रियां उन्हीं के पास थीं। इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि आंबेडकर जी शिक्षा को कितना महत्व देते थे।
राष्ट्रपति भवन को हर भारतीय की धरोहर बताते हुए कोविंद ने जयंती समारोह में उपस्थित अनुयायियों से कहा कि वे जब भी दिल्ली आएं तो राष्ट्रपति भवन जरूर देखें। उनका यह भी कहना था कि आंबेडकर जयंती पर उनके जन्म स्थान पर पहुंचने वाले वह प्रथम राष्ट्रपति हैं। उन्होंने कहा कि उनके जीवन में 14 के अंक का सुखद अनुभव है। वह देश के 14वें राष्ट्रपति हैं और 14 अप्रैल को महू पहुंचने का सौभाग्य भी उन्हें मिला है।
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आंबेडकर को साक्षी मानकर रचाई शादी
बाबा साहेब आंबेडकर की जन्मस्थली महू में आज एक अनोखा विवाह भी देखने को मिला। इस जोडे़ ने तय किया था कि आंबेडकर जयंती पर ही वह शादी के बंधन में बंधेंगे। सो, बगैर किसी आडंबर के सूर्यदेव जयसिंह और रचना सुमन ने बाबा साहेब को साक्षी मानकर एक दूसरे को माला पहनाई और स्वर्ग मंदिर के फेरे लिए। इसके बाद अतिथियों को आंबेडकर की फोटो और देश के संविधान की कापियां बांटी गईं।
आगोकनगर के रहने वाले सूर्यदेव बिजली कंपनी में सहायक अभियंता हैं और धार की रचना सुमन नगरीय प्रशासन विभाग में सब इंजीनियर हैं। सूर्यदेव ने पांच साल पहले ही तय कर लिया था कि वह महू में और इसी अंदाज में शादी करेंगे। रचना भी इसके लिए राजी हो गईं। उन्होंने इसे आदर्श विवाह का नाम दिया। इस दौरान दोनों के परिवार भी सहमत हो गए।
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उन्होंने कहा कि उनका बनाया संविधान आजादी के साथ जीवन जीने का अधिकार देता है।
शिक्षा का अधिकार भी इन अधिकारों में शामिल है। बाबा साहेब का मानना था कि मनुष्य के लिए शिक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है। शिक्षा के बिना विकास मुमकिन ही नहीं है। आजादी के बाद नेहरू जी की पहली कैबिनेट में बाबा साहेब विधि मंत्री बनाए गए थे। कैबिनेट के सभी सदस्यों में सर्वाधिक डिग्रियां उन्हीं के पास थीं। इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि आंबेडकर जी शिक्षा को कितना महत्व देते थे।
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राष्ट्रपति भवन को हर भारतीय की धरोहर बताते हुए कोविंद ने जयंती समारोह में उपस्थित अनुयायियों से कहा कि वे जब भी दिल्ली आएं तो राष्ट्रपति भवन जरूर देखें। उनका यह भी कहना था कि आंबेडकर जयंती पर उनके जन्म स्थान पर पहुंचने वाले वह प्रथम राष्ट्रपति हैं। उन्होंने कहा कि उनके जीवन में 14 के अंक का सुखद अनुभव है। वह देश के 14वें राष्ट्रपति हैं और 14 अप्रैल को महू पहुंचने का सौभाग्य भी उन्हें मिला है।
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आंबेडकर को साक्षी मानकर रचाई शादी
बाबा साहेब आंबेडकर की जन्मस्थली महू में आज एक अनोखा विवाह भी देखने को मिला। इस जोडे़ ने तय किया था कि आंबेडकर जयंती पर ही वह शादी के बंधन में बंधेंगे। सो, बगैर किसी आडंबर के सूर्यदेव जयसिंह और रचना सुमन ने बाबा साहेब को साक्षी मानकर एक दूसरे को माला पहनाई और स्वर्ग मंदिर के फेरे लिए। इसके बाद अतिथियों को आंबेडकर की फोटो और देश के संविधान की कापियां बांटी गईं।
आगोकनगर के रहने वाले सूर्यदेव बिजली कंपनी में सहायक अभियंता हैं और धार की रचना सुमन नगरीय प्रशासन विभाग में सब इंजीनियर हैं। सूर्यदेव ने पांच साल पहले ही तय कर लिया था कि वह महू में और इसी अंदाज में शादी करेंगे। रचना भी इसके लिए राजी हो गईं। उन्होंने इसे आदर्श विवाह का नाम दिया। इस दौरान दोनों के परिवार भी सहमत हो गए।