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रामायण रिसर्च काउंसिल: बिहार में 55 एकड़ भूमि चिह्नित; सीतामढ़ी में माता सीता के भव्य मंदिर निर्माण की योजना
Fri, 22 Mar 2024 06:51 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीतामढ़ी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीतामढ़ी
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Fri, 22 Mar 2024 06:51 PM IST
सार
रामायण रिसर्च काउंसिल ने बताया है कि बिहार में 55 एकड़ भूमि पर माता सीता का भव्य मंदिर बनवाने की योजना है। काउंसिल के प्रमुख स्वामी सांदीपेंद्र ने बताया कि 25 एकड़ जमीन चिह्नित हो चुकी है। उन्होंने बताया कि सीतामढ़ी में माता सीता के भव्य मंदिर निर्माण की योजना के संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे।
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सीतामढ़ी में माता सीता का भव्य मंदिर बनवाने की योजना
- फोटो : social media
विस्तार
रामायण रिसर्च काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष परमहंस स्वामी सांदीपेंद्र ने कहा है कि माता सीता के प्राकट्य क्षेत्र सीतामढ़ी में माता सीता की भव्य प्रतिमा एवं उन्हें भवगती के रूप में स्थापित करने के लिए काउंसिल को 30 एकड़ भूमि उपलब्ध हो गई है। 25 एकड़ भूमि को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि कुछ ही दिनों में यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। स्वामी सांदीपेंद्र स्वयं सीतामढ़ी आकर मंदिर-निर्माण की जगह, परियोजना के चरण और प्रारूप की घोषणा की जाएगी। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव समाप्त होते ही वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस संबंध में भेंट करेंगे। पीएम मोदी को सीतामढ़ी में उक्त स्थल पर भूमि-पूजन का प्रस्ताव दिया जाएगा।
सीतामढ़ी में माता सीता की 251 फीट ऊंची प्रतिमा
काउंसिल के अध्यक्ष स्वामी सांदीपेंद्र मध्य प्रदेश में नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी सिद्धपीठ प्रांगण के संत हैं। उन्होंने बताया, ‘वह लंबे समय से सीतामढ़ी में माता सीता की 251 फीट ऊंची प्रतिमा तथा संबंधित क्षेत्र को तीर्थ, पर्यटन एवं शक्ति के रूप में स्थापित करने को लेकर पहल कर रहे थे। इसके लिए भूमि की उपलब्धता एक बड़ा विषय था। लगातार हुए प्रयासों के बाद काउंसिल को सफलता प्राप्त हुई है’। उन्होंने कहा, वे माता सीता की प्रतिमा भगवती के रूप में स्थापित करना चाहते थे, इसलिए काउंसिल के अंतर्गत ‘श्रीभगवती सीता तीर्थ क्षेत्र समिति’ का गठन किया गया। समिति ही इसका निर्माण कार्य देखेगी।
51 शक्तिपीठों से मिट्टी और जल लाने की योजना
स्वामी सांदीपेंद्र ने कहा, हम पहले से कहते आए हैं कि काउंसिल के तत्वावधान में 51 शक्तिपीठों से मिट्टी और जल लाएंगे, नलखेड़ा से मां पीताम्बरा की ज्योत लाएंगे और श्रीलंका, इंडोनेशिया, बाली समेत उन सभी स्थानों से मिट्टी व जल लाएंगे, जहां से भगवान श्रीराम और मां जानकी का नाता रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि आज काउंसिल अपने उद्देश्य की ओर तेजी से अग्रसर हो रही है।
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काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी सांदीपेंद्र ने कहा, ‘वर्ष 2018 में जब उन्होंने सीतामढ़ी में काउंसिल के तत्वावधान में इस प्रयास की शुरूआत की थी, तब माता सीता को लेकर बस बातें ही होती थीं, आज काउंसिल की लगातार पहल के बाद कई संस्थाएं जागृत हुई हैं। इसे सकारात्मक रूप में लिया जाना चाहिए। हाल में बिहार सरकार भी इस ओर सजग हुई है, उन्हें इसका बहुत हर्ष है।'
उन्होंने कहा कि कुछ लोग काउंसिल से ही प्रेरित होकर मां सीता को भगवती के रूप में स्थापित करने की सलाह भी दे रहे हैं, जो स्वागत-योग्य है और यह काउंसिल की सतत जागरूकता का ही परिणाम है। उन्होंने कहा कि जितने मंदिर बने, हमारे सनातन के लिए उनता ही अच्छा है। उन्होंने कहा, हर तरफ से प्रयास होता रहे, लेकिन काउंसिल का जो अपना संकल्प है, उसे हर हाल में पूरा करना उनके जीवन का लक्ष्य है।
आपको बता दें कि काउंसिल की पहल पर अयोध्या में प्रभु श्रीराम मंदिर निर्माण से जुड़े आर्किटेक्ट आशीष सोमपुरा भी सीतामढ़ी का दौरा कर चुके हैं। विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार भी काउंसिल के प्रकल्प को हरसंभव सहयोग की घोषणा कर चुके हैं। काउंसिल के इस विषय को वर्तमान सांसद सुनील कुमार पिंटू ने हाल में संसद में भी उठाया था। पिंटू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिलकर इस भव्य मंदिर के निर्माण हेतु भूमि-पूजन का आग्रह कर चुके हैं। वहीं अयोध्या में रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी को भी काउंसिल की ओर से कई बार इस विषय से अवगत कराया जा चुका है। उनका मार्गदर्शन भी मिला है।
काउंसिल के कार्यालय के मुताबिक, संस्था ने कुछ दिनों पूर्व ही सभी समितियों को भंग कर दिया था। काउंसिल के मुख्य मार्गदर्शक रहे परमहंस स्वामी सांदीपेंद्र को नया अध्यक्ष चुना गया था। काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष के मुताबिक वह बहुत जल्द सभी समितियों का नए सिरे से गठन करेंगे। पूरे देश में काउंसिल का विस्तार किया जाएगा।
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सीतामढ़ी में माता सीता की 251 फीट ऊंची प्रतिमा
काउंसिल के अध्यक्ष स्वामी सांदीपेंद्र मध्य प्रदेश में नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी सिद्धपीठ प्रांगण के संत हैं। उन्होंने बताया, ‘वह लंबे समय से सीतामढ़ी में माता सीता की 251 फीट ऊंची प्रतिमा तथा संबंधित क्षेत्र को तीर्थ, पर्यटन एवं शक्ति के रूप में स्थापित करने को लेकर पहल कर रहे थे। इसके लिए भूमि की उपलब्धता एक बड़ा विषय था। लगातार हुए प्रयासों के बाद काउंसिल को सफलता प्राप्त हुई है’। उन्होंने कहा, वे माता सीता की प्रतिमा भगवती के रूप में स्थापित करना चाहते थे, इसलिए काउंसिल के अंतर्गत ‘श्रीभगवती सीता तीर्थ क्षेत्र समिति’ का गठन किया गया। समिति ही इसका निर्माण कार्य देखेगी।
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51 शक्तिपीठों से मिट्टी और जल लाने की योजना
स्वामी सांदीपेंद्र ने कहा, हम पहले से कहते आए हैं कि काउंसिल के तत्वावधान में 51 शक्तिपीठों से मिट्टी और जल लाएंगे, नलखेड़ा से मां पीताम्बरा की ज्योत लाएंगे और श्रीलंका, इंडोनेशिया, बाली समेत उन सभी स्थानों से मिट्टी व जल लाएंगे, जहां से भगवान श्रीराम और मां जानकी का नाता रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि आज काउंसिल अपने उद्देश्य की ओर तेजी से अग्रसर हो रही है।
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काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी सांदीपेंद्र ने कहा, ‘वर्ष 2018 में जब उन्होंने सीतामढ़ी में काउंसिल के तत्वावधान में इस प्रयास की शुरूआत की थी, तब माता सीता को लेकर बस बातें ही होती थीं, आज काउंसिल की लगातार पहल के बाद कई संस्थाएं जागृत हुई हैं। इसे सकारात्मक रूप में लिया जाना चाहिए। हाल में बिहार सरकार भी इस ओर सजग हुई है, उन्हें इसका बहुत हर्ष है।'
उन्होंने कहा कि कुछ लोग काउंसिल से ही प्रेरित होकर मां सीता को भगवती के रूप में स्थापित करने की सलाह भी दे रहे हैं, जो स्वागत-योग्य है और यह काउंसिल की सतत जागरूकता का ही परिणाम है। उन्होंने कहा कि जितने मंदिर बने, हमारे सनातन के लिए उनता ही अच्छा है। उन्होंने कहा, हर तरफ से प्रयास होता रहे, लेकिन काउंसिल का जो अपना संकल्प है, उसे हर हाल में पूरा करना उनके जीवन का लक्ष्य है।
आपको बता दें कि काउंसिल की पहल पर अयोध्या में प्रभु श्रीराम मंदिर निर्माण से जुड़े आर्किटेक्ट आशीष सोमपुरा भी सीतामढ़ी का दौरा कर चुके हैं। विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार भी काउंसिल के प्रकल्प को हरसंभव सहयोग की घोषणा कर चुके हैं। काउंसिल के इस विषय को वर्तमान सांसद सुनील कुमार पिंटू ने हाल में संसद में भी उठाया था। पिंटू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिलकर इस भव्य मंदिर के निर्माण हेतु भूमि-पूजन का आग्रह कर चुके हैं। वहीं अयोध्या में रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी को भी काउंसिल की ओर से कई बार इस विषय से अवगत कराया जा चुका है। उनका मार्गदर्शन भी मिला है।
काउंसिल के कार्यालय के मुताबिक, संस्था ने कुछ दिनों पूर्व ही सभी समितियों को भंग कर दिया था। काउंसिल के मुख्य मार्गदर्शक रहे परमहंस स्वामी सांदीपेंद्र को नया अध्यक्ष चुना गया था। काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष के मुताबिक वह बहुत जल्द सभी समितियों का नए सिरे से गठन करेंगे। पूरे देश में काउंसिल का विस्तार किया जाएगा।