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रमन सिंह : मुस्कुराकर बाजी पलट देते हैं

Fri, 09 Nov 2018 08:21 PM IST
शशिधर पाठक, अमर उजाला डिजिटल ब्यूरो
शशिधर पाठक, अमर उजाला डिजिटल ब्यूरो Updated Fri, 09 Nov 2018 08:21 PM IST
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raman singh, who changes the game with a smile
रमन सिंह, मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ - फोटो : अमर उजाला

रमन सिंह छत्तीसगढ़ के पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री हैं। सात दिसंबर 2003 को वह राज्य के मुख्यमंत्री बने थे और अब तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर अंगद के पांव बने हुए हैं। हालांकि भाजपा में भी उन्हें मुख्यमंत्री पद की कुर्सी से हटाने वालों की कोई कमी नहीं है।

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यह रमन सिंह की विशेषता है कि वह विपरीत हालात से नहीं घबराते और समय के साथ सबको साध लेते हैं। रमन सिंह के दुश्मन उनकी बारीक राजनीतिक शैली के कायल हैं। हालांकि माना जा रहा है कि तीन बार के चुनाव विजेता, तीन बार के मुख्यमंत्री रमन सिंह के तमाम दांव चलने के बाद भी चौथी पारी थोड़ा कड़वी चुनौती दे रही है।
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आयुर्वेद में स्नातक की डिग्री लेने वाले चिकित्सक डॉ. रमन सिंह का स्वभाव बेहद सरल है। उनके साथ काम कर चुके छत्तीसगढ़ सरकार के पूर्व मुख्य सचिव का कहना है कि जटिल परिस्थितियों में भी रमन सिंह धैर्य रखकर आगे बढ़ते हैं। सिंह पहली बार 1990 में म.प्र. विधानसभा के लिए चुने गए थे।
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1993 के विधानसभा चुनाव में वह फिर चुने गए, लेकिन किस्मत को उन्हें कहीं और ले जाना था। 1999 के आम चुनाव में रमन सिंह ने राजनांदगांव से लोकसभा के लिए सफलता हासिल की। विधायक से सांसद बने रमन सिंह सरकार में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय में राज्यमंत्री बनाए गए। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। समय के साथ रमन सिंह राजनीतिक करियर में भी छलांग लगाते चले गए।

केन्द्र सरकार के मंत्री

रमन सिंह को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कैबिनेट में जगह मिली थी। वह वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय में राज्यमंत्री थे। छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी हैं लेकिन पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री रमन सिंह हैं। विलासपुर, बस्तर, रायपुर, दुर्ग संभाग जैसे क्षेत्रों में बस्तर को छोड़कर बाकी हर संभाग में भाजपा का प्रदर्शन अच्छा रहा है। 

रमन सिंह 2018 का चुनाव भी राजनांदगांव से लड़ रहे हैं। उनके मुकाबले में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भांजी करुणा शुक्ला हैं। करुणा शुक्ला कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रही है। इस बार चुनाव में नामांकन के समय रमन सिंह ने उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आमंत्रित किया था। योगी आए भी और रमन सिंह ने उनके पांव छुए। यह छत्तीसगढ़ में चर्चा का विषय भी बना।

बिना धार की तलवार

रमन सिंह को बिना धार की तलवार कहा जाता है। उनके व्यक्तित्व की खासियत है कि वह तमाम आरोपों को झेल जाते हैं। दुश्मन को भी अपनी चाल का एहसास नहीं होने देते और उसे आसानी से चित कर देते हैं। कहा जाता है कि रमन सिंह बिना धार की तलवार रखते हैं, लेकिन उसका वार बहुत चोखा होता है। 

बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद एक बार रमन सिंह भी निशाने पर आ गए थे। कयास लगने लगे थे कि वह जल्द ही मनोहर परिकर की तरह केंद्र सरकार का हिस्सा होंगे। रमन सिंह सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोपों की संख्या भी बढ़ गई था, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हो पाया। पूरे छत्तीसगढ़ में यह चर्चा आम है कि रमन सिंह ने कांग्रेस पार्टी में सेंध लगा रखी है। 

यहां तक कि अजित जोगी के राजनीतिक कदम में भी कुछ हद तक रमन सिंह का हाथ बताया जाता है। हालांकि यह सब केवल चर्चा ही है। वह इस चुनाव को भी अपने चेहरे पर लड़ रहे हैं और इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार का जनमत संग्रह नहीं मानते। सच बस इतना है कि जब से वह मुख्यमंत्री बने हैं, हर चुनाव जीते हैं। चुनाव जीतने के बाद छत्तीसगढ़ में हर बार मुख्यमंत्री बने हैं।
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