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Ram Temple: 'देश के लिए गौरवान्वित पल होगा', मंदिर से जुड़े किस्सों पर बोले मुख्य वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा
Thu, 02 Nov 2023 03:59 PM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Thu, 02 Nov 2023 03:59 PM IST
सार
राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा को लेकर मुख्य वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा ने कहा, यह पूरे देश के लिए गर्व का पल होगा। मंदिर में 5 मंडप और मुख्य गर्भगृह अष्टकोणीय आकार में है, जो भगवान विष्णु के आठ रूपों को दर्शाता है।
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राम मंदिर निर्माण
- फोटो : amar ujala
विस्तार
अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण तेजी से हो रहा है। प्राण प्रतिष्ठा को लेकर मुख्य वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा ने कहा, 22 जनवरी 2023 का दिन पूरे देश के लिए गर्व का पल होगा। मूर्तियों की स्थापना एक लम्बे संघर्ष का परिणाम है। मंदिर में उत्तर और मध्य भारत की नागर शैली वास्तुकला का उपयोग किया गया है। मंदिर में 5 मंडप और मुख्य गर्भगृह अष्टकोणीय आकार में है, जो भगवान विष्णु के आठ रूपों को दर्शाता है।
साथ ही राम मंदिर के मुख्य वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा ने अयोध्या में मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया को याद करते हुए कहा, आज से ठीक 32 वर्ष पहले अशोक सिंघल मुझे अपने साथ ले गए। उस दौरान उन्होंने मुझे राम मंदिर के निर्माण के लिए एक योजना तैयार करने के लिए कहा था। उस समय वहां एक संरचना थी, लेकिन हमें माप लेने की अनुमति नहीं थी। मंदिर निर्माण की योजना से जुड़ी दिलचस्प बातों को साझा करते हुए उन्होंने कहा, अनुमति न मिलने के कारण हमने उस क्षेत्र को पैरों से मापा और उस स्थान के क्षेत्रफल का अनुमान लगाया। हमने उस समय की योजना को कुंभ मेले में साझा किया था। लेकिन कुछ वर्षों में यह काम धीमा पड़ गया। अदालत में मामला निलंबित था। लेकिन अदालत के आदेश के बाद हमने अपनी योजना पर काम फिर से शुरू कर दिया। मंदिर निर्माण का कार्य 50 प्रतिशत से ज्यादा हो गया है। व्यक्तिगत रूप से हमने उम्मीद खो दी थी, संशय था कि मंदिर बनेगा या नहीं।
अयोध्या में भक्तों को अब भाषा मित्र का मिलेगा साथ
श्री राम जन्म भूमि में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को भाषायी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्हें यहां भाषा मित्रों का साथ मिलेगा। आमतौर पर किसी भी पर्यटक स्थल या प्रसिद्ध धर्मस्थल पर जाने के बाद देश के विभिन्न प्रांतों के श्रद्धालुओं को भाषाई समस्या से जूझना पड़ता है। प्रायः वहां पहुंचने वाले भक्त की भाषा कोई और होती है, जबकि उस प्रदेश की भाषा कुछ और। ऐसे में उन्हें हर कदम पर दिक्कत होती है। पर्यटक या भक्त जहां गए हैं वह वहां की भाषा नहीं समझ पाते और स्थानीय लोग उनकी बोली से अनजान होते हैं। अयोध्या आने वाले भक्तों को इस तरह की दिक्कत न होने पाए, इसकी पहल भारत भारती नामक संस्था ने की है।
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साथ ही राम मंदिर के मुख्य वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा ने अयोध्या में मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया को याद करते हुए कहा, आज से ठीक 32 वर्ष पहले अशोक सिंघल मुझे अपने साथ ले गए। उस दौरान उन्होंने मुझे राम मंदिर के निर्माण के लिए एक योजना तैयार करने के लिए कहा था। उस समय वहां एक संरचना थी, लेकिन हमें माप लेने की अनुमति नहीं थी। मंदिर निर्माण की योजना से जुड़ी दिलचस्प बातों को साझा करते हुए उन्होंने कहा, अनुमति न मिलने के कारण हमने उस क्षेत्र को पैरों से मापा और उस स्थान के क्षेत्रफल का अनुमान लगाया। हमने उस समय की योजना को कुंभ मेले में साझा किया था। लेकिन कुछ वर्षों में यह काम धीमा पड़ गया। अदालत में मामला निलंबित था। लेकिन अदालत के आदेश के बाद हमने अपनी योजना पर काम फिर से शुरू कर दिया। मंदिर निर्माण का कार्य 50 प्रतिशत से ज्यादा हो गया है। व्यक्तिगत रूप से हमने उम्मीद खो दी थी, संशय था कि मंदिर बनेगा या नहीं।
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अयोध्या में भक्तों को अब भाषा मित्र का मिलेगा साथ
श्री राम जन्म भूमि में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को भाषायी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्हें यहां भाषा मित्रों का साथ मिलेगा। आमतौर पर किसी भी पर्यटक स्थल या प्रसिद्ध धर्मस्थल पर जाने के बाद देश के विभिन्न प्रांतों के श्रद्धालुओं को भाषाई समस्या से जूझना पड़ता है। प्रायः वहां पहुंचने वाले भक्त की भाषा कोई और होती है, जबकि उस प्रदेश की भाषा कुछ और। ऐसे में उन्हें हर कदम पर दिक्कत होती है। पर्यटक या भक्त जहां गए हैं वह वहां की भाषा नहीं समझ पाते और स्थानीय लोग उनकी बोली से अनजान होते हैं। अयोध्या आने वाले भक्तों को इस तरह की दिक्कत न होने पाए, इसकी पहल भारत भारती नामक संस्था ने की है।
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