कोरोना का खौफ: रामनवमी पर भी सूना रह गया राम का दरबार, भक्तों के बिना खाली रह गए मंदिर
कोरोना संक्रमण को देखते हुए धार्मिक जलसों पर प्रशासन ने लगाई है रोक, नवरात्रों पर भी नहीं खुले मंदिरों के कपाट...
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रामनवमी के पावन अवसर पर भी भगवान राम का दरबार अधूरा है। उनके भक्त चाहकर भी मंदिरों तक नहीं पहुंच सकते हैं क्योंकि कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए प्रशासन ने राजधानी में किसी भी धार्मिक जलसे पर प्रतिबंध लगा रखा है। कोरोना संक्रमण के कारण यह लगातार दूसरा साल है जब नवरात्र और रामनवमी पर मंदिरों के कपाट भक्तों के लिए बंद हैं। इससे मंदिरों, धार्मिक संगठनों के पुजारियों से लेकर सामान्य भक्तों तक में निराशा का माहौल है।
राजधानी के झंडेवालान मंदिर प्रशासन ने नवरात्र की शुरुआत से ही मंदिरों के द्वार भक्तों के लिए बंद कर दिए थे। इस दौरान मंदिरों के पुजारी धार्मिक रीति-रिवाज से देवी की पूजा-अर्चना करते रहे। इस पूजा का यू-ट्यूब और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लाइव प्रसारण किया गया, लेकिन मंदिर तक भक्तों का पहुंचना पूरी तरह से रोक दिया गया था। रामनवमी के अवसर पर भी यही विधि अपनाई गई।
कालकाजी मंदिर, बिड़ला मंदिर, गुफा वाला मंदिर, नीलम माता मंदिर और अन्य सभी प्रमुख मंदिरों में भी इसी प्रकार सूनापन छाया रहा। मंदिरों के प्रशासकों ने ही पूजा-अर्चना का कार्यक्रम किया।
अयोध्या के संत आचार्य मधुप ने अमर उजाला से कहा कि यह बेहद दुर्भाग्य की बात है कि भगवान राम के सबसे पवित्र त्योहार पर भी मंदिरों के कपाट बंद हैं। लोग चाहकर भी मंदिरों के लिए नहीं आ सकते। उन्होंने कहा कि यह पूरी इंसानियत के लिए बहुत कठिन घड़ी है। उन्होंने बताया कि इसी दौरान अयोध्या में रामनवमी पर काफी संख्या में भक्त पहुंचे और उन्होंने भगवान के दर्शन किये।
देश के अन्य हिस्सों में लॉकडाउन न होने से वहां के मंदिरों में पूजा-पाठ का कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न कराया जा रहा है। इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं। लोग भगवान राम की पूजा के साथ-साथ अनेक लोग आज ही नवरात्रों का समापन भी करते हैं, इसलिए लोग आज ही हवन भी कर रहे हैं। लोगों ने माता दुर्गा से इस कोरोना की महामारी से दुनिया को बचाने की अपील की।