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प्रधानमंत्री मोदी और राहुल गांधी की सभा बदल सकती है बिहार विधानसभा चुनाव की धार
Fri, 23 Oct 2020 08:40 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Fri, 23 Oct 2020 08:40 PM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी
- फोटो : पीटीआई
इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में यह पहला मौका है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के नेता राहुल गांधी की चुनावी सभा एक साथ एक राज्य में हो रही है। इससे विकास और रोजगार आदि पर जारी बहस और इन्हीं मुद्दों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष में जमकर चल रहे आरोप-प्रत्यारोप के बीच आज चर्चा का चेहरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बन गए हैं।
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शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन अलग-अलग चुनावी सभाएं कीं। पहली सभा सासाराम के डेहरी शहर में थी। यहां से वे एनडीए के सभी 25 प्रत्याशियों से वर्चुअली जुड़े। यहां से भाजपा और जदयू के 12-12 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं और एक उम्मीदवार वीआईपी पार्टी का है। दूसरी सभा गया में थी जहां वे एनडीए के 19 प्रत्याशियों से वर्चुअली जुड़े। यहां भाजपा के नौ, जदयू के छह और हम के चार उम्मीदवार खड़े हैं। तीसरी सभा भागलपुर में थी। यहां से एनडीए के कुल 24 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं जिनमें भाजपा के 10, जदयू के 13 और हम का एक प्रत्याशी मैदान में है।
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सासाराम के डेहरी में प्रधानमंत्री ने अपने लगभग 40 मिनट के भाषण में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काम और नेतृत्व की सराहना कर उनके प्रतिनिधत्व और उनके खिलाफ चल रही विरोध की लहर को थामने की कोशिश की। वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी अपने संबोधन में राज्य सरकार की योजनाओं से अधिक केंद्रीय योजनाओं की ही चर्चा की। जाहिर है कभी बिहार भाजपा को अपनी अंगुलियों पर नचाने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार के इस चुनाव का भविष्य प्रधानमंत्री मोदी के हवाले कर दिया है।
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महागठबंधन के नेताओं के बीच पहले से ही बेचैनी थी कि कहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुद्दे का चेहरा ही न बदल दें, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। महागठबंधन इस पर अब तक पूरी सतर्कता बरतता रहा था और हरसंभव प्रयास भी कर रहा था कि पीएम को चर्चा का विषय ही नहीं बनने दिया जाए। लेकिन, आज के संबोधन के बाद प्रधानमंत्री बिहार चुनाव के संदर्भ में चर्चा का बड़ा चेहरा बन कर तो सामने आए, लेकिन चुनावी मुद्दे यथावत बने हुए हैं।
विपक्ष पुराने लोकसभा और अलग-अलग विधानसभा चुनाव के अनुभव के आधार पर इस बात को लेकर आश्वस्त था कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चर्चा का चेहरा बनते हैं तो वे मतदाताओं पर गहरा असर छोड़ सकते हैं। यही वजह रही कि प्रदेश में विपक्ष का कोई भी नेता पीएम मोदी या केंद्र सरकार पर बोलने से बचता रहा था।
बिहार में चुनावी सभा शुरू होने के बाद देखें तो महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी प्रसाद यादव के निशाने पर नीतीश कुमार ही रहे हैं। दो तरफा हमले में नीतीश, लालू-राबड़ी शासनकाल की याद दिलाकर अपने 15 साल के कार्यकाल को साबित करना चाहते हैं तो तेजस्वी प्रसाद यादव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की 15 साल की सत्ता विरोधी लहर पर सवार होना चाहते हैं।
उधर लोक जनशक्ति पार्टी के एनडीए से अलग चुनावी राह पकड़ने के बाद से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी पार्टी के लिए परेशानी का सबब बनने वाली पार्टी के नेता चिराग पासवान अब तक मोदी की लोकप्रियता की चादर ओढ़कर चुनावी मैदान में थे। लेकिन, प्रधानमंत्री मोदी ने बिना उनका नाम लिए यह बता दिया है कि इस चुनाव में एनडीए एक है और उसका अटूट हिस्सा भाजपा-जदयू-हम-वीआईपी ही हैं। जाहिर है पीएम मोदी की पहली चुनावी सभा ने एनडीए के स्वरूप को साफ कर दिया है और उस पर लगाई जा रही अटकलों से भी पर्दा उठा दिया है।