Rajnath Singh: राजनाथ सिंह बोले- हम देश की सांस्कृतिक चेतना की कीमत पर विकास नहीं चाहते; जानें और क्या कहा
रक्षा मंत्री असम के तेजपुर विश्वविद्यालय के 21वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा, चरित्र सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने युवाओं से देश के नवनिर्माण में जुटने का आह्वान किया।
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि हम भारत का विकास तो चाहते हैं, लेकिन भारत की सांस्कृतिक चेतना की कीमत पर नहीं। हम भारत का विकास भारत की चेतना की कीमत पर नहीं करना चाहते। भारत की जो सांस्कृतिक चेतना है, उसे हम किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं होने देंगे। हम भारत में विकास तो चाहते हैं, लेकिन विकास ऐसा नहीं चाहते कि कहीं भारत वह भारत न रह जाए।
उन्होंने कहा कि पहले के भारत और नए भारत में वैसे तो अनेक भिन्नताएं हैं। रक्षा मंत्री ने बिना किसी का नाम लिए पहले की सरकारों पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि लोग पहले की सरकार और आज की सरकार में सबसे बड़ा अंदर देख रहे हैं, वह है सोच का। वह सोच, जिसके अंतर्गत पहले देश की सुरक्षा, विकास और सार्वजिनक हित के प्रति चलता है, की भावना से काम होता था, जबकि आज की सरकार सुरक्षा, विकास और सार्वजिनक हित के प्रति करना है, कि भावना से काम कर रही है। हम करना चाहिए कि नहीं बल्कि हमें करना है, कि भावना से काम कर रहे हैं। हमारी सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहले टारगेट फिक्स करते हैं और फिर उसे पूरा करने में जी-जान से जुट जाते हैं।
उन्होंने कहा कि एक जमाना था, जब हम विदेशों से हथियार खरीदते थे, लेकिन आज हम कई मामलों में हथियार निर्यातक देश बन गए हैं। रक्षा मंत्री असम के तेजपुर विश्वविद्यालय के 21वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा, चरित्र सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने युवाओं से देश के नवनिर्माण में जुटने का आह्वान किया।
राजनाथ सिंह ने कहा कि हम भारत का विकास भारत की चेतना की कीमत पर नहीं करना चाहते। भारत की जो सांस्कृतिक चेतना है, उसे हम किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं होने देंगे। हम भारत में विकास तो चाहते हैं, लेकिन विकास ऐसा नहीं चाहते कि कहीं भारत वह भारत न रह जाए। ऐसा विकास भी हमको मंजूर नहीं। हम भारत का ऐसा विकास और सुरक्षा नहीं चाहते, जिससे भारत की सांस्कृतिक चेतना धूमिल होती हुई नजर आए। हम विकास चाहते हैं, लेकिन सब कुछ भारतीय सांस्कृतिक चेतना के दायरे में। हम भारत को भौगोलिक सीमा के रूप में नहीं देखते, हम इसे सांस्कृतिक पहचान के रूप में देखते हैं। आज भी हमारे ऊपर सांस्कृतिक हमले जारी है। एक सरकार की जिम्मेदारी केवल भौगोलिक सीमाओं की रक्षा करनी ही नहीं है, बल्कि उस राष्ट्र की सांस्कृतिक चेनना की सुरक्षा करना भी सरकार का दायित्व है।
समय से पूरी हो रही हैं योजनाएं
उन्होंने कहा, एक समय था जब अकार्य को भी एक कार्य माना जाता था, लेकिन हमारी सरकार ने इसे सोच को पूरी तरह से बदला है। हम कुछ नहीं करने का करना नहीं कहते। हम तो कुछ करने को भी करना नहीं कहते। बल्कि हम दिन-रात करते रहने को ही करना कहते हैं, बल्कि कार्य हो जाने को करना कहते हैं। आज लोग जानते हैं कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 घंटे काम करते हैं। इसके अलावा उनके कैबिनेट मंत्री भी दिनरात सार्वजिनिक हित के लिए जितना भी समय मिलता है, समय देते हैं। लेकिन हम समझते हैं कि काम के घंटों से भी कहीं ज्यादा हमारे लिए रिजल्ट महत्वूपूर्ण है। हमारी सराकर एक टारगेट को लेकर चलती है और सफलता पाने तक अपने सारा जोर लगाने की कोशिश करती है। इसलिए हमारी योजनाएं पैरालिसिस का शिकार नहीं हो पातीं, बल्कि समय से पहले ये पूरी हो रही हैं। सार्वजिनिक हितों के कामों को समय पर पूरा करके जनता को सौंपना ही हमारी यूएसपी है।
सार्वजिनिक सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता
उन्होंने कहा कि हम समाज के अंतिम व्यक्ति तक इसिलए पहुंच पाए हैं, क्योंकि हमने सार्वजिनिक सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता मानते हुए उनके लिए मेहनत की है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि जब सार्वजिक जीवन में जाएं तो सार्वजिनक सेवाओं को सुप्रीम ड्यटी मानकर ही काम करें।
कथनी और करनी में किसी तरह का अंतर नहीं
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने कथनी और करनी में किसी तरह का अंतर नहीं रखा। उन्होंने कहा अगर किसी व्यक्ति की कथनी और करनी में अंतर होता है तो एक विश्वास का संकट पैदा होती है। किसी भी विश्वसनीय संस्था को विश्वसनीयता के संकट को एक चुनौती के रूप में लेना चाहिए। इसिलए भारत की राजनीति में आई विश्वसनीयता के संकट को हमने एक चुनौती के रूप स्वीकार किया है और उस पर विजय प्राप्त की है। हम राजनीति में एथिक्स लाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। हमने अपने काम से लोगों में विश्वास पैदा करने की कोशिश की है।
पंचवर्षीय योजनाओं का युग बीता
उन्होंने कहा कि अब वह समय बीत गया जब पंचवर्षीय योजनाए बनती थीं। उसकी समाप्ति पर जब उसकी समीक्षा होती थी तो पाया जाता था कि टारगेट पूरे ही नहीं हुए हैं। उन्हें फिर अगेल पांच वर्षों के लिए डाल दिया जाता था, लेकिन यह नया भारत है। नए भारत में योजनाओं का समय तय किए जाते हैं। ऐसा नहीं है कि हमें असफलताएं नहीं मिलीं, लेकिन देश की जनता ने हमारी उस अफलता में भी हमारे काम के प्रति गंभीरता को देखा है। असफलताओं से हमने सीख कर आगे बढ़ने की कोशिश की है। उन्होंने चंद्रयान का उदाहरण देकर लोगों को समझाने की कोशिश की।
रक्षा क्षेत्र में बड़ा टारगेट तय किया
रक्षा मंत्री ने कहा कि हमने सरकार में आते ही रक्षा क्षेत्र में बड़ा टारगेट तय कर लिया। वह टारगेट था रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्म निर्भर बनाना। उन्होंने कहा, जब तक हम डिफेंस इंडस्ट्रियल इको सिस्टम को ठीक से खड़ा नहीं करेंगे। तब तक हम रणनीतिक इकोनमी नहीं बन पाएंगे। हम पहली ऐेसी सरकार हैं, जिसने हथियारों की खरीद पर खुद पर रोक लगाई है। यह हमारी नई सोच ही है कि हमने पांच लिस्ट जारी की है, जिसके तहत 509 रक्षा इक्यूपमेंट चिन्हित किए हैं, जिनका निर्माण भारत में होगा। हमने डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंगस के लिए भी एक लिस्ट भी जारी की है, जिसके तहत 4666 ऐसे आइटम चिन्हित किए हैं, जिनका निर्माण हमारे देश में ही होगी।
टॉप 23 निर्यातकों की कतार में भारत
उन्होंने कहा कि पहले भारत दुनिया का सबसे बड़ा हथियार का खरीदार था, आज वह भारत दुनिया के टॉप 23 निर्यातक की कतार में आकर खड़ा हो गया है।
उन्होंने कहा कि आज हम भारत को आर्थिक और मीलिट्री सुपर पावर बनाने के लिए वचनबद्ध हैं और इस ओर आगे बढ़ रहे हैं। इसके पीछे युवाओं की ताकत है पर हमको विश्वास है।
स्टार्ट-अप से मिले नए मुकाम
उन्होंने कहा कि काबिल नौजवानों की कार्य कुशलता को बढ़ाने के लिए हमने स्टार्ट-अप कल्चल को शुरू किया। हमने इनोवेशन इको सिस्टम को बढ़ावा दिया है। सरकार के प्रयास और नौजवानों के इंटरप्रिन्योरशिप के चलते चलते आज हमारे पास 1 लाख से अधिक स्टार्ट-अप हैं। सरकार रक्षा क्षेत्र में इनोवेशन को बढ़ावा दी रही है। हमने डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरीडोर में स्टार्ट-अप के माध्यम से इनोवेशन को प्रमोट किया है। घरेलु रक्षा उत्पाद पर ध्यान देने का ही नतीजा है कि पहली बार यह 1 लाख 8 हजार करोड़ पहुंच गया है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।
रक्षा निर्यात पर भी पर्याप्त ध्यान दिया गया
उन्होंने कहा कि सरकार ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए रक्षा निर्यात पर भी पर्याप्त ध्यान दिया है। भारत का रक्षा निर्यात का कुल वेल्यू 2016-17 में 1 हजार 521 करोड़ रुपये थी, वह 2022-23 में करीब दस गुना बढ़ कर 16 हजार करोड़ पहुंच गई है। यह सब कुछ नौजवानों की ताकत और वचनबद्धता का ही नतीजा है।
उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में बेहतरीन तरक्की देखी है। उन्होंने कहा, 2014 भारत की कुल जीडीपी अनुमानित 2 ट्रीलियन थी। वह आज बढ़ कर 3.75 ट्रीलियन डॉलर तक पहुंच गई है। 2014 में हम दुनिया के टॉप 10 इकोनॉमी में खड़े थे, भारत आज दुनिया की पांचवीं इकोनॉमी में आकर खड़ा हो गया है। हमारे प्रधानमंत्री ने भी लोगों को आश्वस्त किया है कि 2026 समाप्त होते और 2027 आते-आते भारत की इकोनॉमी दुनिया की टॉप तीन देशों में आकर खड़ी हो जाएगी। भारत की इकोमॉनी इस समय दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली इकोनॉमी है। अगर यही ग्रोथ अगर हमारी बनी रही तो 2047 तक आजादी के 100 वर्षों पूरे होने पर भारत दुनिया की टॉप इकोनॉमी बनकर खड़ा हो जाएगा।
छात्रों में अधिक नवीनता
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि असम ने देश को ऐसे प्रतीक दिए हैं, जिन्होंने कला, वीरता, धर्म और लगभग सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। असम ने वीर लाचित बरफुकन, भूपने हाजरिका, गोपीनाथ बरदोलोई और श्रीमंत शंकरदेव जैसे युगद्रष्टा दिए हैं। उन्होंने कहा कि जहां तक मैं समझ पाया हूं, मैं कह सकता हूं कि युवा छात्रों में शिक्षकों की तुलना में अधिक नयापन होता है।
डिजिटल इंडिया ने तोड़े रिकॉर्ड
उन्होंने कहा कि एक समय था जब यूपीआए और डिजिटल ट्रांजेक्शन की बात की तो लोगों ने मजाक उड़ाया था। कैसे संसद में मजाक उड़ाया गया था। कहा गया था कि हम इनसे देश की जनता को जोड़ नहीं पाएंगे। लेकिन देश की जनता ने उस मजाक का जोरदार जवाब दिया। आपको जानकार खुशी होगी कि बीते नवंबर महीने में रिकॉर्ड 1 हजार 100 करोड़ से भी अधिक ट्रांजेक्शन यूपीआई के माध्मम से ट्रांजेक्शन भारत में हुए हैं, जिसकी कुल वैल्यू 17.40 लाख करोड़ है। यह एक मेजर अचीवमेंट है। दुनिया में किसी देश में भी यूपीआई के माध्मम से इतने बड़े ट्रांजेक्शन नहीं हुए हैं। कैसलेस इकोनॉमी की तरफ यह एक बड़ा कदम है।
शिक्षा को दिया महत्व, शिक्षण संस्थाओं की बढ़ी संख्या
उन्होंने कहा कि देश में उच्च शिक्षा को लेकर सरकार लगातार फोकस कर रही है। 2014 से लेकर अब तक देश में सात नए आईआईटी और सात नए आईआईएम खोले गए हैं। देश में इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों की संख्या भी बढ़ रही है। पिछले नौ वर्षों में 390 विश्वविद्यालय खोली गई हैं। शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य पर भी जोर दिया जा रहा है। आयुषमान भारत योजना के तहत 12 करोड़ परिवारों को पांच लाख तक सालाना हेल्थ इंश्योरेंस देने की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। अब एम्स की संख्या बढ़ कर अब 23 हो गई हैं, बल्कि जन औषधी केंद्रों के माध्यम से कम कीमत पर औषधी उपलब्ध करा रहे हैं।
देश और दुनिया परचम लहरा रहा है विश्वविद्यालय: सिंह
इस मौके पर तेजपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शंभूनाथ सिंह ने विश्वविद्यालय की प्रगति को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि विश्विविद्यालय के हर क्षेत्र में प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है। यहां के प्राध्यापकों, खिलाड़ियों और विद्यार्थी अपनी प्रतिभा से देश और दुनिया में विश्वविद्यालय का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह हमारे विश्वविद्यालय के लिए गौरव का क्षण है, क्योंकि यह समारोह हमारे विद्यार्थियों को एक शिक्षित और जिम्मेदार नागरिक में बदलते हुए पलों का गवाह बना।
इस दौरान डिग्रियां पाकर विद्यार्थियों के चेहरे खिल उठे। विश्वविद्यालय के 21वें दीक्षांत समारोह में 783 विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर (पीजी) डिग्री, 428 को स्नातक (यूजी) की डिग्री, 5 को पीजी डिप्लोमा और 100 से अधिक शोधार्थियों को पीएचडी डिग्री के साथ-साथ दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा माध्यम के 23 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं।