राज्यसभा में बढ़ेगी सपा की ताकत, अमर सिंह की हो सकती है वापसी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राज्यसभा में उत्तर प्रदेश के 11 सदस्यों का कार्यकाल इस जुलाई के अंत तक समाप्त हो जाएगा। इनमें से सबसे ज्यादा छह सदस्य बसपा के हैं, लेकिन नए सदस्यों के मनोनयन में पार्टी को झटका लग सकता है जिसकी ताकत घटना तय है।
नए सदस्यों में सबसे ज्यादा फायदा सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी को मिलेगा जो विधानसभा में विशाल संख्याबल के बूते अपने ज्यादा सदस्यों को राज्यसभा में भेज सकती है। वहीं भाजपा और कांग्रेस जैसे दलों को कोई खास फायदा नहीं होने वाला है। खास बात ये है कि सपा से दूरियों के बाद राज्यसभा की सदस्यता से बाहर रहने वाले पूर्व महासचिव अमर सिंह की वापसी हो सकती है।
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार हाल फिलहाल राज्यसभा में सपा के 15, बसपा के 10 और भाजपा-कांग्रेस के तीन तीन सदस्य हैं। इनमें से जुलाई के अंत तक राज्यसभा से 11 सदस्यों की विदाई हो सकती है।
इनमें भाजपा के मुख्तार अब्बास नकवी, कांग्रेस के कैप्टन सतीश शर्मा, बसपा के सतीश चंद्र मिश्रा और अंबेठ राजन के अलावा सपा के अरविंद सिंह और वयोवृद्ध नेता मोहन सिंह की बेटी कनक लता प्रमुख हैं। पुराने सदस्यों की विदाई के साथ ही राज्यसभा में उत्तर प्रदेश से नुमाइंदगी का गणित भी बहुत हद तक बदल जाएगा।
सपा को होगा फायदा बसपा रहेगी नुकसान में
सपा की ताकत जहां दोगुनी होगी वहीं बसपा की घटकर आधी रह जाएगी। उत्तर प्रदेश विधानसभा में 227 विधायकों के साथ समाजवादी पार्टी अधिकतम छह सदस्यों को राज्यसभा भेज सकती है। जबकि 80 सीटों वाली बसपा के केवल दो सदस्य ही उच्च सदन में जा पाएंगे।
इसके अलावा 42 सदस्यों वाली भाजपा एक सदस्य को राज्यसभा भेज सकती है। सबसे ज्यादा मुश्किलें कांग्रेस के लिए होंगी जो संख्याबल में काफी पिछड़ रही है। 29 विधायकों वाली कांग्रेस के पास राजनीतिक रूप से इतना संख्याबल भी नहीं है कि वह अपने एक नुंमाइंदे को भी राज्यसभा में भेज पाए।
इसके लिए उसे दूसरे दलों को सहारा लेना पड़ेगा। उसकी निगाहें आठ सदस्यों वाले लोकदल पर रहेंगी। इसके अलावा उसे समाजवादी पार्टी का सहारा भी लेना पड़ सकता है। खास बात ये है कि राज्यसभा में जाने वाले नए सदस्यों में सपा की ओर से सबसे चौंकाने वाला नाम पूर्व महासचिव अमर सिंह का हो सकता है।
कभी राज्य से बाहर पार्टी का चेहरा रहे अमर सिंह की सपा मुखिया मुलायम सिंह के साथ बढ़ती नजदीकियों से इस बात की पूरी संभावना जताई जा रही है कि वह राज्यसभा में पार्टी के नए चेहरे हो सकते हैं।
अमर सिंह के साथ मीडिया दिग्गज को रास भेज सकती है सपा
अखबार की मानें तो अमर सिंह के नाम पर सपा हाईकमान की मुहर लग चुकी है उनके अलावा एक मीडिया दिग्गज को भी राज्यसभा भेजने की चर्चाएं हैं। बताया जा रहा है सपा मुखिया मुलायम सिंह और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जल्द इस पर अंतिम निर्णय ले सकते हैं।
वहीं बसपा की ओर से अंतिम मुहर मायावती ही लगाएंगी। सपा के मुकाबले बसपा के सामने मुश्किलें थोड़ा ज्यादा होने वाली हैं क्योंकि वह मात्र दो सदस्य ही भेज सकती है और उन दोनों का चुनाव खासा कठिन होगा।
क्योंकि इनमें से एक सीट तो बसपा महासचिव और पार्टी में नंबर दो कहे जाने वाले सतीश मिश्रा की पक्की मानी जा रही है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि अभी कुछ भी कहना मुश्किल है। पार्टी अध्यक्ष मायावती ही इस पर अंतिम निर्णय लेंगी।
वहीं कांग्रेस में स्थिति थोड़ी विकट दिख रही है, क्योंकि उसे अपने वरिष्ठ नेता और गांधी परिवार के नजदीकी कैप्टन सतीश शर्मा को दोबारा राज्यसभा भेजने में मशक्कत करनी पड़ सकती है। इसके लिए उसे रालोद और सपा का सहारा भी लेना पड़ सकता है।