शीत सत्र के पहले ही दिन मनमोहन 'गर्म', अर्थव्यवस्था से लेकर कश्मीर तक के मुद्दे पर सरकार को घेरा
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शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। पूर्व पीएम ने जम्मू व कश्मीर और लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाने से लेकर भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाए। जम्मू व कश्मीर का नाम लिए बिना पूर्व पीएम ने कहा कि राज्य परिषद होने के नाते प्रदेशों की सीमाएं फिर से निर्धारित करने में राज्यसभा की भूमिका ज्यादा होनी चाहिए।
हाल ही में जम्मू कश्मीर और लद्दाख को नए केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया है। उन्होंने राज्यसभा के 250वें सदन के मौके पर आयोजित 'भारतीय राजनीति में राज्यसभा की भूमिका व सुधार की जरूरत' विषय पर चर्चा में भाग लिया था।
मनमोहन सिंह ने कहा, 'कुछ मामलों में इस सदन को ज्यादा सम्मान मिलना चाहिए, लेकिन वर्तमान में ऐसा नहीं है। मसलन राज्यों की सीमाएं फिर से निर्धारित करने जैसा अहम मामला...उन्हें केंद्र शासित प्रदेश में तब्दील करना। राज्य परिषद को ऐसे मामलों से निपटने में ज्यादा शक्ति मिलनी चाहिए।'
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, 'इस तरह के बड़े कदम लेने से पहले सरकार को राज्य परिषद से ज्यादा बेहतर तरीके से सलाह मशविरा करना चाहिए।' संसदीय समिति द्वारा विधेयकों की जांच के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि राज्यसभा के पूरी तरह संचालन के लिए जरूरी है कि बिलों की गहनता से जांच करने की जरूरत है, जहां सदस्य सिर्फ अपना दिमाग ही इस्तेमाल न करें बल्कि इस पर अपनी राय भी दे सकें।
अर्थव्यवस्था पर चिंता जताई :
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी चिंता जताई। कांग्रेस ने उनके भाषणों को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। उन्होंने कहा, 'भारत की अर्थव्यवस्था की स्थिति बेहद चिंताजनक है। मैं यह विपक्षी राजनीतिक पार्टी के सदस्य के रूप में नहीं बल्कि इस देश के नागरिक और अर्थशास्त्र के छात्र के रूप में कह रहा हूं।'
आज जब भारतीय अर्थव्यवस्था निराशाजनक दौर से गुजर रही है, तो सरकार को विशेषज्ञों की सहायता से इसे दुरुस्त करने का काम करना चाहिए। pic.twitter.com/ihw8RUbTpl
— Congress (@INCIndia) November 18, 2019
वर्तमान भारतीय अर्थव्यवस्था की दुर्दशा को सुधारने के लिए भाजपा सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है। भाजपा में नीति और नीयत दोनों की कमी है! pic.twitter.com/SsFEK7NmoT
— Congress (@INCIndia) November 18, 2019
भारतीय अर्थव्यवस्था अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। वर्तमान समय जोखिम भरा है। सरकार को इस मामले में विशेषज्ञों की राय पर विचार करना चाहिए। pic.twitter.com/5LrxMBiEoV
— Congress (@INCIndia) November 18, 2019
सिर्फ 25 फीसदी विधेयक आगे भेजे
मनमोहन सिंह ने कहा कि 16वीं लोकसभा में सिर्फ 25 फीसदी विधेयक ही समितियों को भेजे गए जबकि 15वीं लोकसभा में 71 फीसदी और 14वीं लोकसभा में 60 प्रतिशत मामले भेजे गए थे। उन्होंने आगे कहा, 'आज हम राज्यसभा के 250वें सदन का उत्सव मना रहे हैं, ऐसे में यह देखना उचित है कि क्या हम संविधान विशेषज्ञों की उम्मीदों पर खरे उतर रहे हैं।'
राज्यसभा को बाईपास न किया जाए : मनमोहन
पीएम मोदी के बाद पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने सदन को संबोधित करते हुए कहा, हमें यह सोचना चाहिए कि क्या संविधान निर्माताओं ने जिन विचारों के साथ उच्च सदन का गठन किया था, हमें उसे साकार किया कि नहीं। सिंह ने राज्यों के अधिकार, नए राज्यों के गठन जैसे मामलों में राज्यसभा में ज्यादा प्रभावी चर्चा और ज्यादा समय देने की बात कही।
मनमोहन ने कहा, सरकार द्वारा राज्यसभा की अनदेखी कर जल्दबाजी में महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराने से हमारे संस्थानों का कद एवं महत्व कम होता है। उन्होंने हाल ही में कार्यपालिका द्वारा धन विधेयक के प्रावधानों के दुरुपयोग की घटनाओं पर भी चिंता जताई। सिंह ने कहा कि अनुच्छेद 110 के तहत लोकसभा को वित्तीय मामलों को लेकर विशेष प्रावधान है, लेकिन लोकसभा में वित्त विधेयक बताकर राज्यसभा को बाईपास और नजरअंदाज किया जाता है।
उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष सुनिश्चित करे कि ऐसा दोबारा न हो क्योंकि इससे सदन की गरिमा कम होती है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में लोक महत्व और राज्यों से जुड़े शिक्षा व स्वास्थ्य विषयों पर अधिक समय तक चर्चा होनी चाहिए। सिंह ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने दूसरे सदन को समान भागीदार के रूप में माना था वहीं आंबेडकर चेक एंड बैलेंस को देखते हुए ही दूसरे सदन की जरूरत समझी थी।