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राज्यसभा चुनाव: भाजपा ने गुजरात के बाद राजस्थान-कर्नाटक में भी कांग्रेस को उलझाया

Fri, 12 Jun 2020 03:40 AM IST
योगेश साहू हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली। 
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली।  Published by: योगेश साहू Updated Fri, 12 Jun 2020 03:40 AM IST
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Rajya Sabha elections: BJP confuses Congress in Rajasthan-Karnataka after Gujarat
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

राज्यसभा की 18 सीटों पर 19 जून को होने वाला चुनाव दिलचस्प हो गया है। भाजपा ने गुजरात के बाद अब कांग्रेस को राजस्थान और कर्नाटक में भी उलझा दिया है। पार्टी की कोशिश इन दोनों राज्यों में कांग्रेस में जारी अंतर्कलह का फायदा उठाने की है।

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भाजपा से अपने विधायकों को बचाने के लिए राजस्थान में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने पार्टी विधायकों को एक रिसॉर्ट में भेज दिया है तो कर्नाटक में विधायकों को अलग-अलग गुटों में बांटकर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। राजस्थान में तीन सीटों पर चुनाव होने हैं।
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संख्या बल के हिसाब से इनमें से कांग्रेस को दो और भाजपा को एक सीट मिलनी तय है लेकिन भाजपा ने दो उम्मीदवारों को उतारकर चुनाव को रोचक बना दिया है। दरअसल चर्चा यह है कि कांग्रेस ने जिन दो नेताओं को चुनाव में उतारा है, उनमें केसी वेणुगोपाल की उम्मीदवारी से पार्टी का एक गुट खुश नहीं है। भाजपा की निगाहें इसी असंतुष्ट धड़े पर हैं।
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राज्य में एक उम्मीदवार को जिताने के लिए 51 विधायकों के समर्थन की जरूरत है। कांग्रेस के पास आधिकारिक रूप से 107 तो भाजपा के साथ 75 विधायक हैं। इस दृष्टि से भाजपा को अपना दूसरा उम्मीदवार जिताने के लिए 27 और विधायकों की जरूरत पड़ेगी। जाहिर तौर पर अगर कांग्रेस ने भाजपा को सेंध लगाने का मौका नहीं दिया तो उसे एक ही सीट पर संतोष करना पड़ेगा।

कर्नाटक में भी पेच

राजस्थान की तरह भाजपा ने कर्नाटक चुनाव में भी पेच फंसा दिया है। यहां चार सीटों पर चुनाव है। सीटों की दृष्टि से यहां भाजपा और कांग्रेस-जदएस को दो-दो सीटें मिलनी हैं। मगर चुनाव मैदान में निर्दलीय संगमेश चिकनकरगुंडा के उतरने से लड़ाई दिलचस्प हो गई है।

चर्चा है कि भाजपा ने ही संगमेश को मैदान में उतारा है। यहां एक उम्मीदवार को जिताने के लिए 45 विधायकों का समर्थन चाहिए। भाजपा के पास 117 विधायक हैं। मतलब दो उम्मीदवारों को जिताने के बाद उसके पास 27 अतिरिक्त वोट हैं।

ऐसे में अगर निर्दलीय उम्मीदवार ने 18 अतिरिक्त वोट जुटा लिए तो कांग्रेस-जदएस के लिए मुश्किल होगी। इससे बचने के लिए कांग्रेस की पहल पर पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा को उम्मीदवार बनाया गया है। पहले भी कांग्रेस-जदएस के विधायक टूट चुके हैं।

मध्यप्रदेश-गुजरात में भी झटका

भाजपा मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थक विधायकों को तोड़ कर पहले ही कांग्रेस को झटका दे चुकी है। ज्योतिरादित्य को उम्मीदवार बनाकर पार्टी यहां पहले ही दो सीट पक्की कर चुकी है। दूसरी तरफ गुजरात में भाजपा ने कांग्रेस की राह में रोड़े बिछा दिए हैं।

8 विधायकों के इस्तीफे के बाद कांग्रेस अपने दम पर दो सीट जीतने की हैसियत खो चुकी है। इस राज्य में एक सीट जीतने के लिए 35.1 विधायकों का समर्थन चाहिए। कांग्रेस के 8 विधायकों के इस्तीफे के बाद उसके विधायकों की संख्या 73 से घटकर 65 रह गई है।

जबकि भाजपा के पास 103 विधायक हैं। उसे तीन सीटें जीतने के लिए 106 विधायकों का समर्थन चाहिए। ऐसे में सारा दारोमदार अब बीटीपी के दो, एक-एक एनसीपी और निर्दलीय विधायकों पर है। कांग्रेस के लिए मुश्किल यह है कि इन चार विधायकों के समर्थन के बावजूद उसका दूसरा उम्मीदवार सीधे तौर पर जीतने की स्थिति में नहीं है।

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