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राज्यसभा चुनाव: विपक्ष में असंतोष से भाजपा की झारखंड और मप्र में जगी उम्मीद, नटराजन को लेकर नाराजगी

Sat, 06 Jun 2026 06:07 AM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Sat, 06 Jun 2026 06:07 AM IST
सार

राज्यसभा चुनाव को लेकर मध्य प्रदेश में कांग्रेस और झारखंड में कांग्रेस और झामुमो गठबंधन के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। ऐसे में भाजपा ने इन दोनों पार्टियों के मतभेदों का फायदा उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला

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rajya sabha election opposition upset over candidates selection in mp jharkhand
मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी - फोटो : ANI

विस्तार

राज्यसभा चुनाव में मध्यप्रदेश में कांग्रेस और झारखंड में झामुमो-कांग्रेस के बीच जारी खींचतान में भाजपा को अपने लिए नई उम्मीद नजर आ रही है। मध्यप्रदेश में जहां कांग्रेस में बाहरी मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाने से असंतोष है, वहीं सहमति के बिना कांग्रेस के झारखंड में उम्मीदवार घोषित करने से झामुमो नाराज है। इस स्थिति से खुश भाजपा जरूरी संख्याबल की कमी के बावजूद झारखंड में एक और मप्र में तीसरा उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है।
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दरअसल मध्यप्रदेश में पूर्व सीएम दिग्विजय की ना के बाद दूसरे पूर्व सीएम कलमनाथ को उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा थी। हालांकि बृहस्पतिवार को जारी सूची में पार्टी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की करीबी और तेलंगाना की प्रभारी मीनाक्षी नटराजन का नाम था। सूची जारी होने के बाद कांग्रेस में असंतोष है और यह असंतोष पिछले चुनाव की तरह ही क्रॉस वोटिंग का कारण बन सकता है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, कमलनाथ को राज्यसभा टिकट नहीं मिलने से छिंदवाड़ा क्षेत्र के पांच कांग्रेस विधायकों को झटका लगा है। उन्हें उम्मीद थी कि पार्टी पूर्व सीएम को उम्मीदवार बनाएगी। ऐसे में अब इन विधायकों का रुख क्या रहता है, इस पर सभी की नजरें है।
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हालांकि असंतोष की भनक के बाद सतर्क कांग्रेस नेतृत्व ने शनिवार को विधायकों की बैठक बुलाई है। बिहार, हरियाणा और ओडिशा जैसे राज्यों में क्रॉस वोटिंग का नुकसान झेल चुकी पार्टी इस बार मध्य प्रदेश में कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। यही वजह है कि हाल ही में हाईकमान ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व ने साफ संदेश दिया है कि क्रॉस वोटिंग की स्थिति में जवाबदेही तय की जाएगी।
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झारखंड में भी उबाल
राज्य में दो सीटों पर चुनाव है। यहां एक सीट के लिए प्रथम वरीयता के 28 मतों की जरूरत है। विपक्षी गठबंधन के पास दो सीट जीतने के लिए ठीक 56 मत हैं। जबकि भाजपा के पास 24 मत हैं। यहां झामुमो बिना चर्चा के कांग्रेस के उम्मीदवार उतारने से नाराज है। सीएम हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को विधायकों की बैठक् बुलाई, जिसमें एक सुर में दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने की मांग की गई। चूंकि कांग्रेस के पास महज 16 विधायक हैं, ऐसे में उसे 12 मत हासिल करने के लिए सहयोगियों का समर्थन चाहिए। दूसरी ओर भाजपा पहले से ही एक उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर चुकी है। ऐसे में यहां भी विपक्ष के सामने एकजुटता बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।


क्या है गणित
प्रदेश विधानसभा में इस समय 229 विधायक हैं। इनमें भाजपा के पास 164, कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। एक सीट के लिए जरूरत 58 विधायकों के समर्थन की है। इस प्रकार दो सीट जीतने के बाद भाजपा के पास प्रथम वरीयता के अतिरिक्त 48 वोट होंगे। दूसरी ओर कांग्रेस के पास 64 वोट हैं जो जरूरी संख्या बल से 6 ज्यादा हैं। ऐसे में तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए भाजपा को दस अतिरिक्त मत की जरूरत पड़ेगी, जबकि कांग्रेस का हर हाल में एकजुटता दिखानी होगी।
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