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Parliament: राज्यसभा में विपक्ष पर भड़के सभापति धनखड़, बोले- 30 वर्षों में कभी इतने स्थगन प्रस्ताव नहीं मिले
Wed, 27 Nov 2024 02:25 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Wed, 27 Nov 2024 02:25 PM IST
सार
राज्यसभा सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि मेरा हमेशा इस बात पर जोर होता है कि उच्च सदन की स्थापित परंपराओं का पालन किया जाए। राज्यसभा सभापति के फैसले का सम्मान करने की जरूरत है।
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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़
- फोटो : एएनआई
विस्तार
गौतम अदाणी के मुद्दे पर विपक्ष केंद्र सरकार पर हमलावर है और संसद की शीतकालीन सत्र भी हंगामे की भेंट चढ़ रहा है। बुधवार को भी विपक्ष के हंगामे के चलते संसद की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। बुधवार को विपक्ष के रवैये पर राज्यसभा सभापति जगदीप धनखड़ ने कड़ी नाराजगी जाहिर की और विपक्ष को नसीहत देते हुए कहा कि उच्च सदन के सदस्यों को सदन की परंपरा का पालन करने की जरूरत है।
स्थगन प्रस्ताव को लेकर नाराज हुए सभापति
दरअसल बुधवार को विपक्ष के कई सांसदों ने स्थगन प्रस्ताव पेश किया। जब उच्च सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो राज्यसभा सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि मेरा हमेशा इस बात पर जोर होता है कि उच्च सदन की स्थापित परंपराओं का पालन किया जाए। राज्यसभा सभापति के फैसले का सम्मान करने की जरूरत है। सदन के नियम 267 (स्थगन प्रस्ताव) के तहत इतने कई प्रस्ताव मिले हैं। बीते 30 वर्षों के कार्यकाल को देखें तो इस दौरान कई सरकारें और प्रशासन सत्ता में आए, लेकिन कभी भी प्रस्तावों की संख्या एकल अंक से ज्यादा नहीं रही। इसके बाद सभापति ने किसी स्थगन प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी, जिसके बाद विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया और सदन की कार्यवाही गुरुवार तक स्थगित करनी पड़ी।
बुधवार को आम आदमी पार्टी के एक सांसद ने नोटिस देकर दिल्ली की कानून व्यवस्था और राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते अपराधों पर चर्चा की मांग की। वहीं सुष्मिता देव, राघव चड्ढा, तिरुची शिवा, संतोष कुमार पी आदि विपक्षी सांसदों ने मणिपुर हिंसा के मामले पर चर्चा की मांग की। जॉन बिटास, ए ए रहीम, रामगोपाल यादव और अब्दुल वहाब ने उत्तर प्रदेश के संभल में हुई हिंसा के मामले पर संसद में चर्चा के लिए प्रस्ताव पेश किया था। सांसदों की मांग थी कि सदन के अन्य कार्यों को स्थगित करके उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों पर चर्चा की जाए।
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क्या है स्थगन प्रस्ताव
गौरतलब है कि संसदीय नियमों के तहत स्थगन प्रस्ताव, ऐसे राष्ट्रीय मुद्दों पर लाया जाता है, जिन पर तुरंत चर्चा की जरूरत होती है और जिनके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। स्थगन प्रस्ताव के तहत सदन की सभी सामान्य प्रक्रिया को स्थगित कर उस मुद्दे पर चर्चा की मांग की जाती है। विपक्ष अदाणी और संभल बवाल पर चर्चा की मांग कर रहा है। हालांकि सत्ता पक्ष का आरोप है कि कांग्रेस अदाणी मामले पर सिर्फ राजनीति कर रही है।
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स्थगन प्रस्ताव को लेकर नाराज हुए सभापति
दरअसल बुधवार को विपक्ष के कई सांसदों ने स्थगन प्रस्ताव पेश किया। जब उच्च सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो राज्यसभा सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि मेरा हमेशा इस बात पर जोर होता है कि उच्च सदन की स्थापित परंपराओं का पालन किया जाए। राज्यसभा सभापति के फैसले का सम्मान करने की जरूरत है। सदन के नियम 267 (स्थगन प्रस्ताव) के तहत इतने कई प्रस्ताव मिले हैं। बीते 30 वर्षों के कार्यकाल को देखें तो इस दौरान कई सरकारें और प्रशासन सत्ता में आए, लेकिन कभी भी प्रस्तावों की संख्या एकल अंक से ज्यादा नहीं रही। इसके बाद सभापति ने किसी स्थगन प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी, जिसके बाद विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया और सदन की कार्यवाही गुरुवार तक स्थगित करनी पड़ी।
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बुधवार को आम आदमी पार्टी के एक सांसद ने नोटिस देकर दिल्ली की कानून व्यवस्था और राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते अपराधों पर चर्चा की मांग की। वहीं सुष्मिता देव, राघव चड्ढा, तिरुची शिवा, संतोष कुमार पी आदि विपक्षी सांसदों ने मणिपुर हिंसा के मामले पर चर्चा की मांग की। जॉन बिटास, ए ए रहीम, रामगोपाल यादव और अब्दुल वहाब ने उत्तर प्रदेश के संभल में हुई हिंसा के मामले पर संसद में चर्चा के लिए प्रस्ताव पेश किया था। सांसदों की मांग थी कि सदन के अन्य कार्यों को स्थगित करके उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों पर चर्चा की जाए।
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क्या है स्थगन प्रस्ताव
गौरतलब है कि संसदीय नियमों के तहत स्थगन प्रस्ताव, ऐसे राष्ट्रीय मुद्दों पर लाया जाता है, जिन पर तुरंत चर्चा की जरूरत होती है और जिनके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। स्थगन प्रस्ताव के तहत सदन की सभी सामान्य प्रक्रिया को स्थगित कर उस मुद्दे पर चर्चा की मांग की जाती है। विपक्ष अदाणी और संभल बवाल पर चर्चा की मांग कर रहा है। हालांकि सत्ता पक्ष का आरोप है कि कांग्रेस अदाणी मामले पर सिर्फ राजनीति कर रही है।