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Rajya Sabha: 'मणिपुर में राष्ट्रपति शासन नहीं चाहता केंद्र', अमित शाह बोले- बातचीत आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता

Fri, 04 Apr 2025 07:34 AM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Fri, 04 Apr 2025 07:34 AM IST
सार

मणिपुर में 2023 में हुई हिंसा में अब तक 200 से ज्यादा लोग मर चुके हैं। मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू है। इसे लेकर राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने प्रस्ताव पेश किया। जिसे सदन ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया। 

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Rajya Sabha: Centre not want President's rule in Manipur, Amit Shah said - dialogue is the only way forward
वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह - फोटो : PTI

विस्तार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार सुबह राज्यसभा में मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाने की मंजूरी के लिए प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने कहा कि केंद्र मणिपुर में राष्ट्रपति शासन नहीं चाहता है। मणिपुर के कुकी और मैतेई समुदाय को यह समझना होगा कि बातचीत ही आगे बढ़ने का एक रास्ता है। दोनों समुदायों के साथ 13 बैठकें हो चुकी हैं। जल्द ही दोनों समुदायों की अंतिम बैठक दिल्ली में होगी। इसके बाद राज्यसभा में मणिपुर राष्ट्रपति शासन का प्रस्ताव पारित हो गया। 
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उन्होंने कहा कि मणिपुर हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद मई 2023 में राज्य में हिंसा भड़की। इस आदेश से आदिवासी समुदाय आरक्षण खत्म होने को लेकर असुरक्षा से घिर गया और आदिवासी बनाम गैर आदिवासी मुद्दा बन गया। यह धार्मिक संघर्ष या आतंकवाद या कानून व्यवस्था फेल होने का मामला नहीं है। इस जातीय हिंसा में अब तक मारे गए 260 लोगों में से 70 फीसदी लोगों की हत्या पहले 15 दिन में हुई है। 
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केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि जातीय हिंसा को 15 दिन में नियंत्रित करना मुश्किल होता है। राज्य में पहली बार ऐसी हिंसा नहीं हुई है। पहले भी ऐसे मामलों को शांत करने में सालों लग गए। भाजपा ने कभी भी इन घटनाओं का राजनीतिकरण नहीं किया। विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिकरण करके मणिपुर के जख्मों पर नमक छिड़क रहे हैं। 

जल्द होगी अंतिम बैठक
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि राज्य सभा में प्रस्ताव इसलिए देर से लाया गया क्योंकि बैठकें चल रहीं हैं। बजट सत्र के दौरान भी दो बैठकें हुईं और जल्द ही दिल्ली में दोनों समुदायों के साथ तीसरी और अंतिम बैठक होगी। मुझे उम्मीद है कि दोनों समुदाय समझेंगे और बातचीत का रास्ता अपनाएंगे। मणिपुर के सीएम एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद नौ फरवरी को राष्ट्रपति शासन राजनीतिक शून्यता के कारण लगाया गया था, न कि राज्य विधानसभा में कांग्रेस पार्टी द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने के कारण।


उन्होंने कहा कि मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि कांग्रेस के पास राज्य सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं थी। किसी भी विधायक ने सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया। 13 फरवरी को पीआर लगाया गया, लेकिन उससे पहले भी नवंबर, दिसंबर, जनवरी और मार्च के महीनों में शून्य हिंसा की सूचना मिली थी। गलतफहमी पैदा नहीं की जानी चाहिए।

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खरगे ने की श्वेत पत्र की मांग
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार को राज्यसभा में मणिपुर हिंसा की जांच की मांग की। साथ ही उन्होंने मणिपुर में चल रही स्थिति की पूरी जानकारी सामने लाने के लिए केंद्र सरकार से सदन में श्वेत पत्र पेश करने को कहा। खरगे ने राज्यसभा में कहा कि मणिपुर पिछले दो सालों से हिंसा से जूझ रहा है, और केंद्र सरकार राज्य में शांति कायम करने में नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि इस हिंसा में 260 से अधिक लोग मारे गए हैं और 60,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हो गए हैं। साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि हिंसा के कारण मणिपुर की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है और जीएसटी संग्रह में गिरावट आई है।

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