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Pranab Mukherjee: भरोसे की कमी के कारण मेरे पिता को राजीव गांधी ने कैबिनेट से हटाया, शर्मिष्ठा मुखर्जी का दावा
Tue, 12 Dec 2023 01:18 AM IST
गुलाम अहमद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गुलाम अहमद
Updated Tue, 12 Dec 2023 01:18 AM IST
सार
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपने पिता के कई सहयोगियों की टिप्पणियों को उद्धृत किया जो मानते थे कि प्रणब मुखर्जी राजीव गांधी के लिए मुख्य चुनौतीकर्ता के रूप में उभर सकते थे।
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शर्मिष्ठा मुखर्जी
विस्तार
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने भरोसे में कमी के कारण उनके पिता को अपने मंत्रिमंडल से हटा दिया था। शर्मिष्ठा ने अपने पिता पर लिखी किताब 'प्रणब, माई फादर: अ डॉटर रिमेंबर्स' के लॉन्च के अवसर पर पत्रकारों से कहा, मेरे पिता के बारे में राजीव गांधी या सोनिया गांधी क्या सोचते थे ये तो वही दोनों जानते हैं, लेकिन जहां तक मेरे पिता का अपना विश्लेषण था, उन्होंने अपने नोट्स में लिखा था कि राजीव गांधी ये सोचते थे कि मैं एक सख्त व्यक्ति (टफ नट्स) हूं जो किसी की भी बात आंख मूंदकर नहीं मान सकता। शायद यही वजह थी कि उन्होंने कैबिनेट से मेरे पिता को हटा दिया।
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शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपने पिता के कई सहयोगियों की टिप्पणियों को उद्धृत किया, जो मानते थे कि प्रणब मुखर्जी राजीव गांधी के लिए मुख्य चुनौतीकर्ता के रूप में उभर सकते थे। शर्मिष्ठा ने कहा, इंदिरा जी और राजीव जी, दोनों के कैबिनेट में रहे बाबा (प्रणब) के सहयोगी रहे एक वरिष्ठ नेता ने कहा, उन्हें महसूस होता था कि बाबा राजीव गांधी की सत्ता के लिए चुनौती बन सकते थे, इसलिए भी उन्हें कैबिनेट से हटा दिया गया।
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शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि उनके पिता प्रणब मुखर्जी कहा करते थे कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ उनका कार्यकाल उनके राजनीतिक जीवन का 'स्वर्णिम काल' था। शर्मिष्ठा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बारे में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब के आकलन पर भी बात की, जिसको लेकर उनकी किताब के कुछ अंशों पर विवाद खड़ा हो गया है। शर्मिष्ठा ने कहा कि उनके पिता भी उस प्रस्तावित अध्यादेश के विरोध में थे, जिसकी एक प्रति राहुल गांधी ने सितंबर 2013 में एक संवाददाता सम्मेलन में फाड़ दी थी, लेकिन उनका मानना था कि इस पर संसद में चर्चा की जानी चाहिए।
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मेरे पिता और प्रधानमंत्री मोदी ने एक टीम के रूप में काम किया...
राहुल गांधी ने जिस अध्यादेश की प्रति फाड़ी थी, उसका उद्देश्य दोषी विधायकों को तत्काल अयोग्य ठहराने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को दरकिनार करना था। साथ ही यह प्रावधान किया गया था कि वे हाईकोर्ट में अपील लंबित होने तक संसद और विधानसभा के सदस्य के रूप में बने रह सकते हैं। शर्मिष्ठा ने कहा कि उन्होंने ही अपने पिता को अध्यादेश फाड़ने की खबर सुनाई थी। वह बहुत गुस्से में थे। उन्होंने यह भी कहा कि देश के राष्ट्रपति के रूप में उनके पिता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक टीम के रूप में काम किया।
पूर्व नौकरशाह पवन के वर्मा के साथ पुस्तक पर बातचीत के दौरान उन्होंने अपने पिता के आरएसएस कार्यक्रम में भाग लेने के विरोध को भी याद किया। शर्मिष्ठा ने कहा, मैंने बाबा से उनके फैसले पर तीन-चार दिनों तक लड़ाई की। एक दिन उन्होंने कहा कि यह मैं नहीं, बल्कि देश इसकी इजाजत दे रहा है। बाबा को लगा कि लोकतंत्र पूरी तरह से बातचीत के बारे में है। यह विपक्ष के साथ बातचीत के बारे में है।
कांग्रेस नेताओं के पुस्तक के विमोचन पर नहीं पहुंचने से दुख हुआ...
पुस्तक की आलोचना पर शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि कांग्रेस के किसी भी वरिष्ठ नेता ने इस पुस्तक पर बात नहीं की है, केवल पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा है कि वह इस पर टिप्पणी नहीं कर सकते क्योंकि उन्होंने इसे नहीं पढ़ा है। शर्मिष्ठा ने कहा कि कांग्रेस नेताओं में केवल चिदंबरम ही पुस्तक के विमोचन पर पहुंचे, इससे उन्हें दुख हुआ है। राजनीति छोड़ चुकीं शर्मिष्ठा ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी के बारे में अपने पिता के विचारों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की कोशिश नहीं की है। शर्मिष्ठा ने कहा कि उनके पिता अक्सर कहते थे कि कांग्रेस ने संसदीय लोकतंत्र की स्थापना की और इसे बनाए रखने का काम पार्टी का है।