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Rajasthan: केंद्र की योजनाओं से ज्यादा लोकप्रिय हैं गहलोत की ये स्कीम्स, कर्नाटक-हिमाचल प्लान से BJP देगी मात

Wed, 05 Jul 2023 05:08 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Wed, 05 Jul 2023 05:08 PM IST
सार

अमर उजाला से चर्चा में भाजपा के एक वरिष्ठ सांसद कहते हैं कि कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार की फ्री बिजली, 25 लाख तक मुफ्त इलाज और सामाजिक सुरक्षा के तहत पेंशन सहित कई योजनाओं ने प्रदेश में माहौल बदला है। आज जिस तरह मुख्यमंत्री अशोक गहलोत चुनावी साल में एक के बाद एक घोषणाएं करते हैं, इससे भाजपा में अंदरूनी खलबली मची हुई है...

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Rajasthan: These schemes of ashok Gehlot are more popular than the schemes of Center
Rajasthan - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

कर्नाटक चुनाव में जबरदस्त जीत हासिल करने के बाद अब कांग्रेस पार्टी की नजरें राजस्थान पर हैं। प्रदेश में दूसरी बार जीत हासिल करने के लिए पार्टी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर गई है। सीएम अशोक गहलोत आए दिन नई योजनाओं की घोषणा करते हुए नजर आ रहे हैं। गहलोत सरकार की कई स्कीम ऐसी भी हैं, जिन्हें पार्टी हिमाचल और कर्नाटक में लागू करने का वादा कर सत्ता में आई है। कई योजनाएं ऐसी भी हैं जो प्रदेश में मोदी सरकार की स्कीम्स से ज्यादा लोकप्रिय नजर आ रही हैं। सीएम गहलोत भी अपनी इस स्कीम को न सिर्फ गेम चेंजर बता रहे हैं, बल्कि वे इस स्कीम के जरिए सरकार के रिपीट होने के दावे भी कर रहे हैं।

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यह भी पढ़ें: Congress: हाईकमान ने राजस्थान PCC को लौटाई नियुक्तियों की लिस्ट, कल AICC में प्रदेश संगठन की बैठक

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कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश में जो मुद्दे कांग्रेस की जीत का कारण बने, अब राजस्थान में उन्हीं मुद्दों के सहारे भाजपा ने सत्ता में वापसी का रोडमैप तैयार किया है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी का कहना है कि कांग्रेस के शासन में 50 प्रतिशत कमीशनखोरी है। भ्रष्टाचार चरम पर है। यह ऐसा मुद्दा है जो आम जन से जुड़ा है। इस मुद्दे को लेकर हम चुनाव में उतरेंगे। इसके अलावा राजस्थान में भाजपा मोदी सरकार के नौ साल के काम को घर-घर पहुंचाने के लिए हर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्र में अभियान चला रही है।

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अमर उजाला से चर्चा में भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ सांसद कहते हैं कि कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार की फ्री बिजली, 25 लाख तक मुफ्त इलाज और सामाजिक सुरक्षा के तहत पेंशन सहित कई योजनाओं ने प्रदेश में माहौल बदला है। आज जिस तरह मुख्यमंत्री अशोक गहलोत चुनावी साल में एक के बाद एक घोषणाएं करते हैं, इससे भाजपा में अंदरूनी खलबली मची हुई है। हालांकि पार्टी ने भी इनका जवाब देने के लिए नई रणनीति तैयार कर ली है। चुनाव से पहले भ्रष्टाचार, परीक्षाओं में धांधली, किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को भाजपा अपने प्रमुख हथियार के रूप में इस्तेमाल करेगी। गहलोत की योजनाओं का असर कम करने के लिए पार्टी इन मुद्दों को हवा देगी।

राजस्थान में गहलोत की इन योजनाओं से भाजपा है परेशान

महंगाई राहत योजनाएं: इस बार के विधानसभा चुनावों में महंगाई बड़ा मुद्दा बनकर उभर रहा है। कर्नाटक के चुनाव में भी कांग्रेस ने इसे भाजपा सरकार के खिलाफ खूब भुनाया है। प्रदेश में कांग्रेस सरकार के खिलाफ माहौल नहीं बने, इसलिए गहलोत ने चुनाव से पहले हर जिले में महंगाई राहत कैंप लगाकर माहौल बदलने की कोशिश की है। लेकिन भाजपा के पास इसकी काट नजर नहीं आ रही है। गहलोत की महंगाई राहत योजनाओं में लाभ लेने वाले लोगों के रजिस्ट्रेशन लगातार बढ़ रहे हैं। भाजपा कांग्रेस की इन योजनाओं को चुनावी हथकंडा बता रही हैं। पार्टी का कहना है कि साढ़ चार तक कांग्रेस को महंगाई क्यों नजर नहीं आई।

500 रुपये में सिलेंडर: प्रदेश में महंगाई राहत कैंप के बाद सबसे ज्यादा प्रचलित योजना 500 रुपये में गैस सिलेंडर है। 1150 रुपये में आने वाला गैस सिलेंडर कांग्रेस सरकार 500 रुपये में दे रही है। गहलोत ने इस साल के बजट में गरीब परिवारों को 500 रुपये में सिलेंडर देने की घोषणा की थी।

25 लाख तक मुफ्त इलाज: प्रदेश में चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना के नाम से शुरू की गई। योजना में 25 लाख तक का मुफ्त इलाज की सुविधा है। कांग्रेस सरकार ने इसे 5 लाख से शुरू करके 25 लाख तक पहुंचा दिया है। अब तक इस योजना में राजस्थान के 1 करोड़ 14 लाख से ज्यादा परिवार रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं। इस योजना में रजिस्ट्रेशन कराने वाले परिवारों का 10 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा भी किया जा रहा है।

मुफ्त बिजली: हर घर को 100 यूनिट फ्री बिजली स्कीम से गहलोत सरकार ने आम लोगों को बड़ी राहत दी है। वहीं प्रदेश में किसानों को 2000 यूनिट फ्री बिजली दी जा रही है।

फ्री राशन, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा: कांग्रेस सरकार ने विधानसभा चुनावों को देखते हुए गरीबों को फ्री राशन की योजना तो लागू की ही है। गांवों में मनरेगा की तर्ज पर शहरों इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना के तहत 125 दिन रोजगार देने से लोगों को राहत देने की कोशिश की है। वहीं, अन्नपूर्णा फूड पैकेट योजना में फ्री राशन के लिए अब तक 95 लाख से ज्यादा लोग पंजीयन करवा चुके हैं, जबकि एक हजार रुपये न्यूनतम सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना में अब तक 46 लाख लोग अपना रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं।

बस किराए में महिलाओं को छूट: महिला मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार की ओर से महिलाओं को रोडवेज की सभी श्रेणी की बसों के किराए में 50 फीसदी छूट देने का एलान भी सीएम गहलोत कर चुके हैं। पहले सामान्य श्रेणी की बसों में 30 फीसदी छूट दी जा रही थी। इसका लाभ ग्रामीण महिलाओं को मिलता था, लेकिन शहरी महिलाएं ज्यादा लाभ नहीं ले पाती थीं। अब मुख्यमंत्री ने एलान कर दिया है कि सभी श्रेणी की बसों में 50 फीसदी की छूट दी जाएगी।

भाजपा के पास नहीं है ओपीएस की काट

इन योजनाओं के अलावा गहलोत ने पूरे प्रदेश में ओल्ड पेंशन को लागू कर भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। कांग्रेस ने इसका फायदा हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक के चुनाव में भी उठाया। प्रदेश के लाखों कर्मचारियों से जुड़ी इस स्कीम को लेकर गहलोत बार-बार बयान दे रहे हैं कि अगर कांग्रेस सरकार रिपीट नहीं हुई तो भाजपा ओपीएस को बंद कर देगी। गहलोत के इन बयानों का बीजेपी के पास कोई तोड़ नहीं है। वह न तो यह कह पा रही कि ओपीएस को जारी रखा जाएगा और न ही यह कह पा रही कि सरकार में आने के बाद इसे बंद किया जाएगा। राजस्थान के तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस सरकार ओपीएस लागू कर चुकी हैं। वहीं मध्यप्रदेश में कमलनाथ ने भी वादा किया है कि अगर कांग्रेस सरकार सत्ता में आती है तो प्रदेश में पुरानी पेंशन स्कीम लागू की जाएगी।

मोदी के कामों से जवाब देगी भाजपा

भाजपा के नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ का कहना है कि कांग्रेस की योजनाएं ही कांग्रेस को खा जाएगी। इन्होंने घोषणाएं तो लंबी चौड़ी कर दीं, बजट में प्रावधान किया नहीं। चुनाव में कांग्रेस की योजनाओं पर मोदी सरकार के नौ साल के काम भारी पड़ेंगे। मोदी सरकार ने नौ साल में हर वर्ग को राहत दी है। राजस्थान में ऐसे लाखों लाभार्थी हैं जिन्हें मोदी सरकार की योजनाओं का लाभ मिला है। कांग्रेस ने चुनावी फायदा लेने के लिए महज पांच माह पहले लोकलुभावन योजनाएं लागू की हैं, लेकिन राजस्थान का मतदाता उसके झांसे में आने वाला नहीं है। आज आम आदमी यह बात समझता है कि कांग्रेस ने साढ़े चार साल में कुछ नहीं किया और अब जब चुनाव सिर पर है तो वह मतदाताओं को भ्रमित करने के लिए ऐसी योजनाएं लागू कर रही है।

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