{"_id":"688f2fd0df5f995dcd093178","slug":"rajasthan-high-court-bans-wife-from-going-abroad-software-engineer-moves-supreme-court-2025-08-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"SC: राजस्थान हाईकोर्ट ने पत्नी के विदेश जाने पर लगाई रोक, साॅफ्टवेयर इंजीनियर ने किया सुप्रीम कोर्ट का रुख","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
SC: राजस्थान हाईकोर्ट ने पत्नी के विदेश जाने पर लगाई रोक, साॅफ्टवेयर इंजीनियर ने किया सुप्रीम कोर्ट का रुख
Sun, 03 Aug 2025 03:16 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: बशु जैन
Updated Sun, 03 Aug 2025 03:16 PM IST
सार
राजस्थान हाईकोर्ट ने शादी का झांसा देकर एक महिला से दुष्कर्म के आरोपी एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को निर्देश दिया था कि अगर वह नौकरी के लिए विदेश जाना चाहता है तो उसकी पत्नी को भारत में रहना होगा। सुप्रीम कोर्ट में याचिका में आरोपी ने कहा कि उसकी पत्नी अमेरिका में कार्यरत है। हाईकोर्ट ने पत्नी को सुने या पक्षकार बनाए बिना भारत में रहने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पत्नी के विदेश जाने पर रोक लगाने के राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दुष्कर्म के आरोपी सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। राजस्थान हाईकोर्ट ने शादी का झांसा देकर एक महिला से दुष्कर्म के आरोपी एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को निर्देश दिया था कि अगर वह नौकरी के लिए विदेश जाना चाहता है तो उसकी पत्नी को भारत में रहना होगा। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई आठ अगस्त को होगी।
याचिकाकर्ता सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने हाईकोर्ट के फैसले को प्रक्रियात्मक अनियमितता का उल्लंघन कहा। उसने सुप्रीम कोर्ट में याचिका में कहा कि उसकी पत्नी अमेरिका में कार्यरत है। हाईकोर्ट ने पत्नी को सुने या पक्षकार बनाए बिना भारत में रहने का निर्देश दिया। अधिवक्ता अश्विनी दुबे के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया कि उच्च न्यायालय का निर्देश त्रुटिपूर्ण है। साथ ही संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
वकील ने तर्क दिया कि यह निर्देश प्रक्रियागत अनियमितता और कानूनी विकृति से ग्रस्त है, क्योंकि इसे प्रभावित व्यक्ति की सुनवाई का अवसर दिए बिना ही पारित कर दिया गया। याचिकाकर्ता भारतीय पासपोर्ट धारक और भारतीय नागरिक है। वह किसी अन्य देश का नागरिक नहीं है। वह अमेरिका में महावाणिज्य दूतावास के नियंत्रण में रहेगा। उसके फरार होने की कोई संभावना नहीं है क्योंकि वह कार्य वीजा पर अपनी आजीविका कमाने के लिए विदेश जाने को तैयार है और इसलिए उसके फरार होने का कोई सवाल ही नहीं है।
विज्ञापन
याचिका में कहा गया है कि वह एक निश्चित अवधि के लिए जेल जाएंगे। उन्होंने इस न्यायालय के समक्ष शपथ ली है कि वह निर्देश मिलने पर सुनवाई के लिए उपलब्ध रहेंगे। इसलिए सुनवाई में देरी का कोई सवाल ही नहीं है और उनके फरार होने का भी कोई सवाल नहीं है।
यह था मामला
सॉफ्टवेयर इंजीनियर के खिलाफ अजमेर के क्रिश्चियनगंज पुलिस थाने में दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया है। याचिका के मुताबिक आरोपी और महिला की मुलाकात एक ऑनलाइन वैवाहिक साइट पर हुई थी और वे लगभग चार वर्षों से एक-दूसरे को जानते थे। युवक ने शिकायतकर्ता से यह वादा करके अंतरंग संबंध बनाए कि वह उससे शादी करेगा। गिरफ्तारी की आशंका के चलते इंजीनियर ने अग्रिम जमानत याचिका दायर की, जिसे मंजूर कर लिया गया। इसके बाद उसने रोजगार के लिए अमेरिका जाने की अनुमति के लिए ट्रायल कोर्ट में आवेदन किया। इसे निचली अदालत ने खारिज कर दिया। जिस पर उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने उसे विदेश जाने की अनुमति दे दी, लेकिन यह शर्त लगा दी कि उसकी पत्नी को भारत में ही रहना होगा।
विज्ञापन
याचिकाकर्ता सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने हाईकोर्ट के फैसले को प्रक्रियात्मक अनियमितता का उल्लंघन कहा। उसने सुप्रीम कोर्ट में याचिका में कहा कि उसकी पत्नी अमेरिका में कार्यरत है। हाईकोर्ट ने पत्नी को सुने या पक्षकार बनाए बिना भारत में रहने का निर्देश दिया। अधिवक्ता अश्विनी दुबे के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया कि उच्च न्यायालय का निर्देश त्रुटिपूर्ण है। साथ ही संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
विज्ञापन
वकील ने तर्क दिया कि यह निर्देश प्रक्रियागत अनियमितता और कानूनी विकृति से ग्रस्त है, क्योंकि इसे प्रभावित व्यक्ति की सुनवाई का अवसर दिए बिना ही पारित कर दिया गया। याचिकाकर्ता भारतीय पासपोर्ट धारक और भारतीय नागरिक है। वह किसी अन्य देश का नागरिक नहीं है। वह अमेरिका में महावाणिज्य दूतावास के नियंत्रण में रहेगा। उसके फरार होने की कोई संभावना नहीं है क्योंकि वह कार्य वीजा पर अपनी आजीविका कमाने के लिए विदेश जाने को तैयार है और इसलिए उसके फरार होने का कोई सवाल ही नहीं है।
विज्ञापन
याचिका में कहा गया है कि वह एक निश्चित अवधि के लिए जेल जाएंगे। उन्होंने इस न्यायालय के समक्ष शपथ ली है कि वह निर्देश मिलने पर सुनवाई के लिए उपलब्ध रहेंगे। इसलिए सुनवाई में देरी का कोई सवाल ही नहीं है और उनके फरार होने का भी कोई सवाल नहीं है।
यह था मामला
सॉफ्टवेयर इंजीनियर के खिलाफ अजमेर के क्रिश्चियनगंज पुलिस थाने में दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया है। याचिका के मुताबिक आरोपी और महिला की मुलाकात एक ऑनलाइन वैवाहिक साइट पर हुई थी और वे लगभग चार वर्षों से एक-दूसरे को जानते थे। युवक ने शिकायतकर्ता से यह वादा करके अंतरंग संबंध बनाए कि वह उससे शादी करेगा। गिरफ्तारी की आशंका के चलते इंजीनियर ने अग्रिम जमानत याचिका दायर की, जिसे मंजूर कर लिया गया। इसके बाद उसने रोजगार के लिए अमेरिका जाने की अनुमति के लिए ट्रायल कोर्ट में आवेदन किया। इसे निचली अदालत ने खारिज कर दिया। जिस पर उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने उसे विदेश जाने की अनुमति दे दी, लेकिन यह शर्त लगा दी कि उसकी पत्नी को भारत में ही रहना होगा।
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन