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सचिन पायलट का नया अंदाज, खुले आसमान तले चारपाई और देशी अंदाज का खाना

Wed, 12 Jun 2019 04:14 PM IST
Gaurav Pandey डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Gaurav Pandey Updated Wed, 12 Jun 2019 04:14 PM IST
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Rajasthan Deputy CM Sachin Pilot is living in a village, will COngress party do so
गांव में दाढ़ी बनाते राजस्थान के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट - फोटो : अमर उजाला

लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस में कई तरह का मंथन जारी है। कोई कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर कुछ सोच रहा है। जैसे एक अध्यक्ष ठीक रहेगा या दो-चार बनाने पड़ेंगे। तो कहीं पर ये विचार हो रहा है कि पार्टी अब मोदी के सामने कैसे और कहां से उठेगी। दूसरी ओर, ऐसे नेता भी मिलेंगे जो अभी तक अपनी हार को पचा नहीं पाए हैं और एक-दूसरे पर निशाना साधे जा रहे हैं। 

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इन सबके बीच राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने एक नई राह पकड़ी है। वे झोपड़ी में रह कर बता रहे हैं कि शासन-प्रशासन यहां से भी चल सकता है। इसके लिए बहुमंजिला इमारतों के वातानुकूलित केबिन ही जरूरी नहीं हैं। अब सवाल ये उठता है कि क्या कांग्रेस पार्टी सचिन पायलट की तरह झोपड़ी में रहना पसंद करेगी।
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बता दें कि लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद कांग्रेस नेता खुद को एक सिमटे दायरे में खड़ा पा रहे हैं। वजह, अभी तक राहुल गांधी का ही नहीं पता कि वे चाहते क्या हैं। खुद मीडिया के सामने आकर उन्होंने कुछ नहीं कहा, लेकिन पार्टी के मुखबिर लगातार कुछ न कुछ रायता फैलाते जा रहे हैं। 
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एक बात साफतौर पर निकलकर सामने आई है कि हारने वाले नेता अभी तक संयुक्त जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं हैं। वे हार का ठीकरा एक-दूसरे पर ही फोड़ने में लगे हैं। राजस्थान में भी ऐसा ही देखने को मिला। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होते हुए भी पार्टी लोकसभा में खाता तक नहीं खोल पाई। सीएम अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच तकरार जैसी खबरें छिप नहीं सकी। 



पिछले दो-तीन दिनों को देखें तो अशोक गहलोत दिल्ली और राजस्थान में बड़ी बैठकें करने में व्यस्त रहे। दूसरी ओर सचिन पायलट राजस्थान के सबसे पिछड़े जिले में पहुंच गए। कोई अनावरण करने नहीं, बल्कि यह बताने के लिए कि सरकार झोपड़ी में रहकर भी चल सकती है।उन्होंने सरकारी गेस्ट हाउस की जगह जालोर के कसेला गांव की एक झोपड़ी में रहना पसंद किया।

खुले आसमान तले चारपाई पर सोए और देशी अंदाज में खाना खाया

रविवार को सचिन पायलट अपने काफिले के साथ जालोर जिले के सांचौर के समीप कासेला गांव पहुंच गए। पायलट खेत में खुले आसमान के नीचे चारपाई पर सोए। जो खाना वहां के किसान खाते हैं, वही पायलट ने खाया। जिनकी झोपड़ी में वे रहे, दरअसल वे सचिन के मित्र भी रहे हैं। उनका नाम जयकिशन बिश्नोई है। एक बार सचिन ने कहा था कि वे बिश्नोई के खेत में आकर रहेंगे।अब वे डिप्टी सीएम बन गए, लेकिन अपना वादा नहीं भूले।



बिलकुल ठेठ अंदाज में नजर आए पायलट ने अपनी शेविंग भी चारपाई पर बैठकर की। रात में खूब गपशप होती तो सुबह चाय पर वे लोगों से चर्चा करते। शासन-प्रशासन, राजनीति, खेती-किसानी और ग्रामीणों की समस्याएं, उन्होंने इन सब विषयों पर जमकर बातचीत की। दिन में उन्होंने अपने विभाग यानी पंचायती राज के कामों की समीक्षा कर कई फाइलें भी निपटाईं। उनके आसपास वीवीआईपी जैसा कुछ नहीं था।

कांग्रेस को दोबारा से उठने का संदेश दे गए पायलट

खुद सचिन पायलट का मानना है कि सरकार और लोगों के बीच दूरी नहीं होनी चाहिए। अगर जनप्रतिनिधि लगातार जनता के संपर्क में रहेंगे तो ही लोकतंत्र सही मायने में आगे बढ़ सकेगा। पायलट का कहना था कि यह बहुत जरूरी है कि कांग्रेस पार्टी के नेता वापस जाकर लोगों से संपर्क साधें। इससे सत्ता और आमजन के बीच की दूरी को कम किया जा सकेगा। जब यह दूरी कम हो जाएगी तो जनहित के कार्यों की कोई भी फाइल पेंडिंग नहीं बचेगी।



कांग्रेस के कई दूसरे नेता भी अब यह मानने लगे हैं कि केवल चुनाव के दौरान जनता के बीच जाने से बात नहीं बनेगी। पायलट एक झोपड़ी में नहीं ठहरे हैं, बल्कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी को यह संदेश दे दिया है कि सरकार तक पहुंचने की राह इन्हीं झोपड़ियों से निकलेगी। हो सकता है कि अगले माह से सभी राज्यों में कांग्रेस पार्टी की इकाईयां जैसे सेवा दल, महिला विंग और युवा कांग्रेस आदि भी गांवों का रुख करती हुई दिखाई दें।

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