Rajasthan: कांग्रेस आलाकमान के सामने भले ही एकजुट दिखे गहलोत-पायलट, लेकिन पिक्चर अभी बाकी है!
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
विस्तार
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस में अशोक गहलोत और सचिन पायलट खेमे के बीच चल रही सियासी खींचतान को खत्म करने में पार्टी हाईकमान भले जुट गया हो, लेकिन प्रदेश की सियासत में अगले 48 घंटे बेहद अहम होने जा रहे हैं। सचिन का अल्टीमेटम मंगलवार को खत्म हो रहा है। इसी बीच कांग्रेस नेतृत्व ने सुलह की कोशिशें तेज कर दी हैं। अगर सीएम गहलोत इन मांगों को नहीं मानते हैं, तो सचिन के सामने नया संकट खड़ा हो जाएगा। वे अपने उन समर्थकों को क्या जवाब देंगे। जिन्हें वे जनसंघर्ष पैदल यात्रा के दौरान वादा कर चुके हैं कि 31 मई तक सरकार हमारी मांगों पर कोई विचार नहीं करती है तो हम अगले आंदोलन की तैयारी करेंगे। मांगे पूरी नहीं होने की स्थिति में सचिन फिर गहलोत सरकार के खिलाफ कोई मोर्चा खोलते हैं, तो फिर कांग्रेस हाईकमान क्या फैसला लेता है। यह भी देखने लायक होगा।
यह भी पढ़ें: Politics: पायलट संग बैठक से पहले गहलोत के बयान से बढ़ी सियासी सरगर्मियां, कांग्रेस हाईकमान को कर दिया इशारा!
हाव भाव बता रहे हैं कि पिक्चर अभी बाकी है
सोमवार शाम को चार घंटे चली बैठक में पार्टी नेतृत्व ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के साथ बंद कमरे में चर्चा की। इस बैठक में आलाकमान दोनों नेताओं के बीच चल रही उठापटक को शांत करने में सफल रहा। लेकिन बैठक के बाद जब गहलोत और पायलट बाहर आए, तो उनके हावभाव बता रहे थे कि पिक्चर अभी बाकी है। दोनों नेताओं के चेहरे पर हल्की मुस्कान जरूर थी, लेकिन दोनों चुप थे। दोनों ने न कोई बयान दिया, न ही कोई इशारा किया। न ही दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा। बैठक के बाद प्रदेश की सियासत को समझने वाले दावा कर रहे हैं कि इसके पहले 9 बार कांग्रेस नेतृत्व दोनों नेताओं के बीच सुलह करवा चुका है। लेकिन हर बार कि तरह इस बार भी नतीजा शून्य ही रहेगा। वजह साफ है इन दोनों नेताओं के मनभेद का इलाज नहीं है।
कांग्रेस नेतृत्व ने बैठक में तय किया कि राजस्थान में अगला विधानसभा चुनाव दोनों नेता मिलकर लड़ेंगे। अभी दोनों के बीच एक फेज की बातचीत होनी बाकी है। मैराथन बैठक में पायलट मुद्दे के समाधान का क्या फॉर्मूला तय किया गया, यह अभी साफ नहीं है, लेकिन पायलट का अल्टीमेटम 30 मई को खत्म हो रहा था, ऐसे में हाईकमान ने इस मुद्दे पर निर्णायक हल जरूर निकाला होगा। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने सुलह का दावा किया है, लेकिन अभी तक सचिन पायलट ने कोई बयान नहीं दिया है। अब पायलट के बयान का इंतजार है। पायलट की तीनों मांगों और सियासी मुद्दों पर फैसला कांग्रेस अध्यक्ष खरगे को करना है। सुलह के फॉर्मूले को उजागर नहीं करके अभी केवल हाईकमान पर फैसला छोड़ने की बात कही है। सचिन ने तीन मांगों को पूरा नहीं करने पर आंदोलन की चेतावनी दी थी। माना जा रहा है कि पायलट अब सुलह के बाद आंदोलन नहीं करेंगे। पायलट की तीन मांगों और उनके सियासी मुद्दों पर क्या सहमति बनी उसे गुप्त रखा गया है।
सचिन के फैसले पर टिकीं सबकी निगाहें
पार्टी के विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस आलाकमान ने चार घंटे की इस बैठक में पावर शेयरिंग को लेकर कोई चर्चा नहीं की है। चुनाव में दोनों नेताओं की क्या भूमिका होगी, इसे लेकर भी हाईकमान ने कोई फैसला नहीं किया है। दोनों नेताओं के बीच यह युद्ध विराम फिलहाल अस्थाई है। प्रदेश की राजनीति में आने वाले 48 घंटे बहुत ही अहम होने वाले हैं। क्योंकि सचिन पायलट का अल्टीमेटम मंगलवार को खत्म हो रहा है। पायलट ने पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे की सरकार के करप्शन पर हाई लेवल कमेटी बनाने, आरपीएससी को भंग कर पुनर्गठन करने और पेपर लीक से प्रभावित बेरोजगारों को मुआवजा देने की मांग रखी थी। तीनों मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी है। अब तक तीनों में से किसी मांग को सरकार ने नहीं माना है। इससे पहले ही हाईकमान ने सुलह की कोशिशें तेज कर दी है।
सूत्र कहते हैं कि सचिन पायलट की तीन मांगें सरकार से जुड़ी हैं। अपनी यात्रा के दौरान भी पायलट ने कई बार कह चुके हैं कि उनकी मांगों पर सरकार को रास्ता निकालना है, कांग्रेस पार्टी को नहीं। सीएम अशोक गहलोत उनकी मुआवजे की मांग को बुद्धि का दिवालियापन कह चुके हैं। अगर सीएम गहलोत इन मांगों को नहीं मानते हैं तो सचिन के सामने नया संकट खड़ा हो जाएगा। वे समर्थकों को क्या जवाब देंगे। मांग पूरी नहीं होने के बाद अगर सचिन फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हैं, तो फिर कांग्रेस हाईकमान क्या फैसला लेता है। यह भी देखने लायक होगा। इसलिए आने वाले अगले 48 घंटे प्रदेश की राजनीति में बहुत अहम होंगे। अब यह देखने वाली बात होगी कि अब सचिन क्या कदम उठाते हैं।
कभी भी टूट सकता है दोनों नेताओं के बीच का ये युद्धविराम
अमर उजाला से चर्चा में राजस्थान कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद कहते हैं कि दिल्ली में केसी वेणुगोपाल ने अशोक गहलोत और सचिन पायलट को एक मंच पर लाकर एकजुटता का मैसेज तो दे दिया। लेकिन वे सभी सवालों से बचते हुए नजर आए जिनके जवाब राजस्थान के कांग्रेस कार्यकर्ताओं और लोगों को चाहिए। पार्टी चुनावी तैयारी जोर शोर से कर रही है। दोनों नेताओं के बीच चल रही खींचतान से अब कांग्रेस नेता भी परेशान हो गए हैं। वे भी दबी जुबान में कहते हैं कि अगर ऐसा ही चलेगा, तो पार्टी जीतते जीतते हार जाएगी। वरिष्ठ नेताओं ने यह जरूर बोल दिया कि दोनों ने नेता एकजुट होकर चुनाव लड़ेगे। लेकिन पार्टी यह साफ हीं किया कि सीएम गहलोत और सचिन पायलट के साथ किस तरह पार्टी चुनाव लड़ेगी। सुलह के लिए किन मुद्दों पर बात बन पाई है। अभी पार्टी ने यह भी स्पष्ट नहीं किया है। कुल मिलाकर कहा जाए तो सुलह के फार्मूले पर सस्पेंस बरकरार है। कांग्रेस नेतृत्व के साथ हुए चार घंटे के मंथन में दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी पर थोड़ा विराम जरूर लगेगा। लेकिन यह कब टूट जाए यह किसी को नहीं पता है। दोनों नेताओं के बीच यह युद्धविराम लंबे समय तक चलने की संभावना बहुत कम नजर आ रही है।
यह भी पढ़ें: Rajasthan: गहलोत-पायलट आए साथ, दोनों नेताओं ने फैसला आलाकमान पर छोड़ दिया, पायलट नहीं करेंगे आंदोलन
विवाद पर कांग्रेस नेतृत्व लेगा फैसला
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर चार घंटे तक चली बैठक के बाद पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि राजस्थान में कोई विवाद नहीं है। जो मतभेद हैं उस पर पार्टी आलाकमान बाद में फैसला करेंगे। बैठक में फिलहाल यही तय हुआ है कि राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट दोनों के नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाएगा। जो अंदरूनी बातें हैं, उनका निस्तारण पार्टी अपने स्तर पर कर लेगी। फिलहाल पार्टी का फोकस राजस्थान में कांग्रेस की सरकार को रिपीट करने का है। ऐसे में हम सब मिलकर पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ेंगे।