Rajasthan: भाजपा का संदेश, वसुंधरा राजे खुद ही तय कर लें राजनीति की पारी
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विस्तार
छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री के चेहरे ने राजस्थान को सीधा संदेश दिया है। भाजपा महासचिव अरुण सिंह पहले कह चुके हैं संसदीय बोर्ड के निर्णय को सभी को मानना पड़ेगा। भाजपा मुख्यालय में भी हर व्यक्ति पहले से आश्वस्त है कि राजस्थान में वसुंधरा कोशिश चाहे जितनी कर लें, लेकिन मुख्यमंत्री नया चेहरा ही होगा। अब यह माना जा रहा है कि भावी मुख्यमंत्री के चेहरे के चयन में पार्टी के शीर्ष नेता अपने मूल सिद्धांत पर कायम हैं। जयपुर के सूत्र बताते हैं कि छत्तीसगढ़ के बाद मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा के बाद गुलाबी नगरी जयपुर में हलचल थमने लगी है।
क्या है चर्चा?
छत्तीसगढ़ के भावी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह से अच्छी केमिस्ट्री रखते हैं। बताते हैं उनके मुख्यमंत्री बनने में रमन सिंह की पूरी सहमति है। वैसे भी विष्णुदेव साय पुराने, मंझे, साफ-सुथरी छवि वाले कर्मठी नेता हैं। उनकी सरगुजा क्षेत्र में अच्छी पकड़ है। सबको साथ लेकर चलते हैं। इसी तरह से मध्यप्रदेश के भावी मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की गुडबुक वाले नेता हैं। भाजपा ने लोकसभा 2024 के रोडमैप को अहमियत दी है। मध्यप्रदेश के बहाने उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्यप्रदेश की अन्य पिछड़ा वर्ग की राजनीति को भी बड़ा संदेश दिया है। साय के जरिए आदिवासी समाज को साधा है। इसका असर उड़ीसा, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड समेत तमाम राज्यों में पड़ना तय माना जा रहा है।
भाजपा के दिल्ली में बैठे सूत्रों का अनुमान है कि राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह और मध्यप्रदेश के निवर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जैसा भाव मिलने में दिक्कत आ सकती है। पार्टी के मध्यप्रदेश से आने वाले एक प्रवक्ता ने कहा कि राजस्थान को लेकर अच्छा संदेश नहीं जा रहा है। वसुंधरा राजे एक वरिष्ठ राजनेता हैं। हम उनका सम्मान करते हैं।
भाजपा के एक पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मीडिया का काम है, अनुमान लगाया। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के भावी मुख्यमंत्री के नाम को लेकर यह फेल हो गई है। राजस्थान में भी ऐसा कुछ हो तो कोई आश्चर्य नहीं। सूत्र का कहना है कि हमें भी नहीं पता कि राजस्थान की कमान किसके हाथ में होगी। मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सरोज पांडे और विनोद तावड़े पर्यवेक्षक के तौर पर जयपुर में होंगे। भाजपा विधायक दल की बैठक होगी। इसके बाद सभी को पता चल जाएगा कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा?
'काल्पनिक सवाल का जवाब आप वसुंधरा राजे से पूछ लीजिए?'
मध्यप्रदेश के भावी मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव को निवर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंच पर शुभकामना दी। ऐसा ही छत्तीसगढ़ में हुआ। रमन सिंह ने भी यही किया। यह पूछे जाने पर कि क्या वसुंधरा से इतर किसी नाम की घोषणा होने पर पूर्व मुख्यमंत्री उन्हें शुभकामना देने के लिए मंच पर होंगी? भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि वह काल्पनिक सवाल का उत्तर नहीं जानते। इसका जवाब तो राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री ही दे सकती हैं। दरअसल, वसुंधरा राजे के बारे में आम है कि वह पिछले कई सालों से पार्टी के कार्यक्रमों में शरीक नहीं हो रही थीं। खासकर सतीश पूनिया पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहने के दौरान उन्होंने खास तौर से दूरी बना रखी थी। सतीश पूनिया का पूरा कार्यकाल भी वसुंधरा को उपेक्षित रखने के लिए जाना जाता है। ऐसे में लाजिमी है कि वसुंधरा के अलावा कोई दूसरा और मनपसंद चेहरा न चुने जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री मंच पर अनुपस्थित रह सकती हैं।