फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Rajamohan says China will have to suffer the consequences of showing aggression

चीन को भुगतना होगा आक्रामकता दिखाने का परिणाम, झेलनी पड़ सकती है राष्ट्रवादी जवाबी कार्रवाई : राजामोहन

Thu, 23 Jul 2020 04:14 AM IST
अवधेश कुमार अमर उजाला, नेटवर्क नई दिल्ली
अमर उजाला, नेटवर्क नई दिल्ली Published by: अवधेश कुमार Updated Thu, 23 Jul 2020 04:14 AM IST
विज्ञापन
Rajamohan says China will have to suffer the consequences of showing aggression
भारत चीन गतिरोध - फोटो : iStock
रणनीतिक मामलों के जानकार प्रो. सी राजामोहन ने कहा है कि पूर्वी लद्दाख में चीन के दुस्साहस ने भारत के साथ उसके रिश्तों में बुनियादी बदलाव ला दिया है। करीब तीन दशक से आपसी भरोसा कायम करने की आड़ में चीन की जोर आजमाइश और जमीन हथियाने की उसकी नीति भारत को अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर देश चीन के साथ आर्थिक सहयोग चाहते हैं, लेकिन उसकी विस्तारवादी नीतियों के कारण उसके साथ ऐसी किसी आर्थिक गतिविधियों में शामिल होने से पीछे हट जाते हैं।
विज्ञापन


पूर्वी लद्दाख, दक्षिण और पूर्वी चीन सागर में चीन की आक्रामकता का जिक्र करते हुए राजा मोहन ने कहा कि चीन को इसका खामियाजा भुगतना होगा। उसके गलत आक्रामकता को ‘राष्ट्रवादी जवाब’ का सामन करना पड़ सकता है। इसमें क्षेत्र में फिर से सत्ता संतुलन के लिए जोर आजमाइश भी झेलनी पड़ सकती है। एक साक्षात्कार में राजा मोहन ने कहा, मैं समझता हूं कि चीन ने संभवत: एशिया में राष्ट्रवाद के स्वभाव का बुनियादी तौर पर गलत आकलन किया है। उन्होंने कहा कि एशिया में ज्यादातर देश राष्ट्रवादी हैं और भारत भी राष्ट्रवादी है। पूरे दक्षिण पूर्व एशिया में मजबूत राष्ट्रवाद की भावना है।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र की इच्छा को थोपने के प्रयास की प्रतिक्रिया तो होगी, क्योंकि चीन की तरह ज्यादातर एशियाई देशों ने साम्राज्यवादी ताकतों से लड़ाई लड़ी है। इसलिए वे एशिया में किसी नई शक्ति के प्रभुत्व स्थापित करने के प्रयास को आसानी से नहीं मानेंगे। विख्यात सामरिक मामलों के जानकार ने कहा कि चीन अपने आक्रामक रवैये के कारण कई देशों को अमेरिका के करीब ला दिया है। क्योंकि विश्व बिरादरी अब किसी एक देश के प्रभुत्व को स्वीकार करने को तैयार नहीं है, ऐसे में बीजिंग को बाकी दुनिया के विरोध का सामना करना पड़ेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

देंग शियाओपिंग शासन हर हाल में शांति का पैरोकार था

देंग शियाओपिंग के शासन में 1980 और 90 के दशक में चीन सीमा विवाद को दरकिनार कर क्षेत्रीय सहयोग पर ध्यान केंद्रित करने पर सहमत था। देंग का दर्शन यह कहता था कि सीमा पर हरहाल में शांति बहाली हो। भारत-चीन में सामान्य स्थिति भी देंग के फॉर्मूले पर आधारित था, जिसमें सीमा पर शांति कायम रखने की बात थी। लेकिन शी जिनपिंग के कुछ सालों के नेतृत्व में हमने देखा है कि चीन ने शांति के रुख को त्यागकर दक्षिण चीन सागर, पूर्वी चीन सागर में एकतरफा दावा करने लगा। साथ ही हांगकांग, ताइवान और भारत के मामले में अपने बाहुबल का प्रदर्शन करने लगा।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed