रायसीना डायलाग: भूपेंद्र यादव बोले- भारत कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार नहीं, फिर भी इसके समाधान के लिए सबसे अग्रणी भूमिका में
उन्होंने इस बात पर जोर दिया प्रौद्योगिकी ट्रांसफर की आवश्यकता अब पूरी दुनिया को है। खासतौर पर विकासशील देशों को जलवायु वित्त और प्रौद्योगिकी की बहुत आवश्यकता है। इसलिए विकासशील देशों को चाहिए वह उन्हें त्वरित गति से स्थानांतरित करे।
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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत दुनिया में बड़े पैमाने पर हो रहे कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार नहीं है, लेकिन समाधान को लेकर न केवल सक्रिय है, बल्कि दुनिया के जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भारती की महत्ती भूमिका रहेगी। वे सातवें रायसीना डॉयलाग के तीसरे दिन पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों पर देश का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। उन्होंने एक बार फिर याद दिलाया की विकसित देश विकासशील देशों को कार्बन उत्सर्जन को रोकने में सक्षम प्रौद्योगिकियों और वित्त के हस्तांतरण में उदासीन रुख अपनाए हुए हैं। इसके चलते उन्हें तमाम तरह की समस्याओं से दो चार होना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत अपनी प्रकृति विरासत को अक्षुण्ण रखने के साथ आर्थिक विकास की वांछित लीक को प्राप्त करने के लिए अपनी अक्षय ऊर्जा को बढ़ाने के लिए संकल्पित है। यादव ने कहा जिन देशों ने पहले ही विकास के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अंधाधुंध कार्बन उत्सर्जन किया है वह विकासशील देशों को उनके सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने से रोक नहीं सकते हैं। यादव ने कहा भारत की स्थिति बहुत स्पष्ट है कि हम कोयले के प्रयोग को बंद नहीं करने जा रहे हैं, लेकिन अक्षय ऊर्जा क्षमताओं का विस्तार करके हम चरणबद्ध ढंग से कोयले के प्रयोग को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया प्रौद्योगिकी ट्रांसफर की आवश्यकता अब पूरी दुनिया को है। खासतौर पर विकासशील देशों को जलवायु वित्त और प्रौद्योगिकी की बहुत आवश्यकता है। इसलिए विकासशील देशों को चाहिए वह उन्हें त्वरित गति से स्थानांतरित करे। यादव ने कहा कि भारत हाइड्रोजन मिशन और हरित प्रौद्योगिकी पर तेजी से काम कर रहा है, लेकिन दुनिया में हरित प्रौद्योगिकी को लेकर नए तकनीकों को विकासशील देशों के साथ साझा करना चाहिए।
उन्होंने कॉप बैठक में भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि वैश्विक उत्सर्जन समस्या को हल करने में भारत का खास योगदान हैं। देश के प्रधानमंत्री ने बैठक में दुनिया को पंचामृत दिया है। इसमें भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा क्षमता- 2030 तक 500 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इसमें देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का 50 फीसदी अक्षय ऊर्जा से पूरा करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। इसके अलावा कुल अनुमानित कार्बन उत्सर्जन को एक अरब टन करने और अर्थव्यवस्था में इतनी ही समय अवधि में अर्थव्यवस्था में कार्बन की तीव्रता को 45 फीसदी तक कम करना और 2070 तक इसे शून्य करने के लक्ष्य को प्राप्त करना है।
यादव ने पीएम के पंचामृत का संदर्भ देते हुए कहा कि हमारे लिए कोई प्लानेट बी नहीं है। इसलिए पृथ्वी के पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान और उस तुरंत प्रभाव से काम शुरु करना होगा। उन्होंने कहा भारत 20 के उन चुनिंदा देशों में हैं, जिन्होंने अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान से लक्ष्य हासिल किये हैं, जबकि विकसित पैसा देने का वादा निभा नहीं रहे हैं, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण भी आवश्यकता के अनुरूप नहीं हो रहा है।