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पूर्वोत्तर में बारिश का कहर: मिजोरम में भूस्खलन, अरुणाचल में एक लाख परिवार बाढ़ से प्रभावित

Tue, 14 Jul 2026 08:26 PM IST
राहुल कुमार अमर उजाला ब्यूरो, गुवाहाटी
अमर उजाला ब्यूरो, गुवाहाटी Published by: राहुल कुमार Updated Tue, 14 Jul 2026 08:26 PM IST
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Rain havoc in the Northeast: Landslides in Mizoram; one lakh families affected by floods in Arunachal
पूर्वोत्तर में बारिश का तांडव। - फोटो : एक्स

पूर्वोत्तर राज्यों में लगातार हो रही बारिश अब बड़े संकट का रूप ले चुकी है। मिजोरम में भारी बारिश के कारण भूस्खलन से नुकसान हुआ है, जबकि अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ और भूस्खलन से एक लाख से अधिक परिवार प्रभावित हुए हैं। राज्य में करीब 85 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा है। वहीं सड़क, पुल और संचार व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस बीच राज्यसभा सांसद ताई टागक ने केंद्र सरकार से विशेष बाढ़ राहत पैकेज जारी करने की मांग की है।

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मिजोरम में समय रहते खाली कराए गए घर, टला बड़ा हादसा
मिजोरम के लुंगलेई जिले के तावीपुई साउथ गांव में मंगलवार तड़के भारी भूस्खलन हुआ। सुबह करीब पांच बजे हुए इस हादसे में दो मकान, सड़क किनारे स्थित एक भोजनालय और एक दुकान मलबे में समा गए। हालांकि, इलाके में पिछले कई दिनों से मिट्टी खिसकने की घटनाएं हो रही थीं। इसे देखते हुए स्थानीय लोगों और प्रशासन ने पहले ही मकानों को खाली करा लिया था। इससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। भूस्खलन के कारण लुंगलेई और लावंगतलाई जिलों को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग-2 भी प्रभावित हुआ है। लगातार मिट्टी खिसकने के कारण मलबा हटाने का काम फिलहाल शुरू नहीं किया जा सका है।
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अरुणाचल में एक लाख परिवार प्रभावित, 85 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को नुकसान
अरुणाचल प्रदेश से राज्यसभा सांसद ताई टागक ने कहा कि राज्य के 28 जिलों में बाढ़ और भारी बारिश से एक लाख से अधिक परिवार प्रभावित हुए हैं। प्रारंभिक आकलन के अनुसार करीब 85 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा पशुपालन, मत्स्य पालन और स्थानीय बाजार भी प्रभावित हुए हैं।
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उन्होंने कहा कि लगातार बारिश, नदियों के उफान और बादल फटने की घटनाओं के कारण राज्य के कई हिस्सों में हर दिन नए इलाके आपदा की चपेट में आ रहे हैं। क्षतिग्रस्त सड़कों, बह चुके पुलों और मलबे के कारण कई दूरदराज के गांवों तक राहत और बचाव दल भी नहीं पहुंच पा रहे हैं।

सीमावर्ती क्षेत्रों में संपर्क बहाल करना सबसे बड़ी चुनौती
सांसद ने बताया कि अंजाव, तवांग और लोअर सियांग समेत कई जिलों में रणनीतिक महत्व वाली सड़कें, पुल और पुलियाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं। वहीं अपर सुबनसिरी जिले के निलिंग सर्किल और कुरुंग कुमे जिले के पारसी पारलो जैसे कई इलाकों में संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है।

उन्होंने कहा कि चीन, भूटान और म्यांमार से लगने वाली सीमाओं के कारण अरुणाचल प्रदेश का रणनीतिक महत्व काफी अधिक है। ऐसे में सीमावर्ती इलाकों तक संपर्क बहाल करने और अस्थायी पुलों के निर्माण के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।


केंद्र से विशेष राहत पैकेज की मांग
ताई टागक ने कहा कि आपदा का पैमाना इतना बड़ा है कि राज्य सरकार अकेले इससे निपटने में सक्षम नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार से अरुणाचल प्रदेश के लिए विशेष बाढ़ राहत पैकेज जारी करने की मांग की। उन्होंने बताया कि केंद्र की अंतर-मंत्रालयी टीम नुकसान का आकलन करने के लिए राज्य का दौरा कर चुकी है, लेकिन कई दुर्गम गांवों तक पहुंचना संभव नहीं हो पाया। सांसद ने राहत कार्यों में जुटे जिला प्रशासन, राज्य आपदा मोचन बल और अन्य एजेंसियों के प्रयासों की भी सराहना की।

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