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Indian Railways: रेलवे ने पिछले 16 महीनों में हर तीन दिन में एक भ्रष्ट अधिकारी को हटाया, अब तक 139 पर कार्रवाई
Wed, 23 Nov 2022 11:05 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 23 Nov 2022 11:05 PM IST
सार
सूत्रों ने कहा कि दो वरिष्ठ ग्रेड वाले अधिकारियों को बुधवार को बर्खास्त किया गया। उनमें से एक को सीबीआई ने हैदराबाद में पांच लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा था जबकि दूसरा तीन रुपये की घूस लेते हुए रांची में पकड़ा गया।
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रिश्वत।
- फोटो : डेमो
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विस्तार
रेलवे ने पिछले 16 महीनों में प्रत्येक तीन दिन में एक काम न करने वाले या भ्रष्ट अधिकारी को हटाया गया। अधिकारियों ने बताया कि 139 अधिकारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लेने के लिए मजबूर किया गया, जबकि 38 को सेवा से हटा दिया गया।
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सूत्रों ने कहा कि दो वरिष्ठ ग्रेड वाले अधिकारियों को बुधवार को बर्खास्त किया गया। उनमें से एक को सीबीआई ने हैदराबाद में पांच लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा था जबकि दूसरा तीन रुपये की घूस लेते हुए रांची में पकड़ा गया।
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एक अधिकारी ने बताया, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का प्रदर्शन को लेकर स्पष्ट संदेश है। जुलाई 2021 से हमने प्रत्येक तीन दिन में रेलवे के एक भ्रष्ट अधिकारी को बाहर किया है। रेलवे का कार्मिक और प्रशिक्षण सेवा नियम कहता है कि एक सरकारी कर्मचारी को कम से कम तीन महीने का नोटिस या समान अवधि के लिए भुगतान करने के बाद सेवानिवृत्त या बर्खास्त किया जा सकता है।
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यह कार्रवाई काम न करने वाले अधिकारियों को बाहर निकालने के केंद्र के प्रयासों का हिस्सा है। जुलाई 2021 में रेल मंत्री के रूप में अश्विनी वैष्णव ने कार्यभार संभालने के बाद अधिकारियों को बार-बार चेतावनी दी है कि अगर वे अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकते हैं तो वीआरएस लें और घर बैठें।
जिन लोगों को वीआरएस लेने के लिए मजबूर किया गया या बर्खास्त किया गया है, उनमें इलेक्ट्रिकल और सिग्नलिंग, मेडिकल और सिविल सेवाओं के अधिकारी, स्टोर, यातायात और यात्रिक विभागों के कर्मचारी शामिल हैं। वीआरएस के तहत एक कर्मचारी को सेवा के प्रत्येक वर्ष के लिए दो महीने के वेतन के बराबर वेतन दिया जाता है।