रेलवे निजीकरण: सरकार ने वेबसाइट पर गाड़ियों और स्टेशनों की संख्या तक लिख दी, मगर देख नहीं सका विपक्ष
डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, रेलवे निजीकरण का यह काम ऐसे समय पर कर मोदी सरकार ने उसे खत्म करने की दिशा में कदम आगे बढ़ा दिया है। यह मामला देश के लिए एक बहुत बड़ी हार और बर्बादी का कारण साबित होगा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
रेलवे निजीकरण की प्रक्रिया शुरु करने की खबर जैसे ही बाहर आई, प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार पर हमला बोल दिया। पार्टी नेता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, रेलवे निजीकरण का यह काम ऐसे समय पर कर मोदी सरकार ने उसे खत्म करने की दिशा में कदम आगे बढ़ा दिया है। यह मामला देश के लिए एक बहुत बड़ी हार और बर्बादी का कारण साबित होगा।
दूसरी तरफ मोदी सरकार तो कई माह पहले ही यह कदम आगे रख चुकी थी। 'मेक इन इंडिया' प्रोजेक्ट के तहत 'नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन' के कॉलम में साफतौर पर लिखा है कि रेलवे द्वारा 500 पेसेंजर ट्रेन प्राइवेट सेक्टर को सौंपी जाएंगी। साथ ही 225 स्टेशन भी प्राइवेट हाथों में रहेंगे। 25 से ज्यादा शहरों में मेट्रो रेल चलेगी। इस प्रोजेक्ट पर 22.37 बिलियन डॉलर की राशि खर्च होगी। इसमें केंद्र और राज्यों के अलावा प्राइवेट पार्टनर भी शामिल होंगे। इसके बावजूद विपक्ष की नजर वहां तक नहीं पहुंच सकी।
वीरवार को भले ही कांग्रेस नेता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी रेलवे के निजीकरण पर काफी आक्रोश में नजर आए। वे बोले, मैं आपको याद दिला दूं कि हम किस स्केल की बात कर रहे हैं। ये हम छोटी-मोटी बात हम नहीं कर रहे हैं। भारतीय रेलवे विश्व का, एशिया का सबसे बड़ा दूसरे नंबर पर रोजगार देने वाला सिंगल मैनेजेमेन्ट का बड़ा नेटवर्क है।
लगभग ढाई करोड़ लोग रोजाना इसी रेल के जरिए आवागमन करते हैं। एक साल का हिसाब देखें तो तकरीबन साढ़े 7 हजार करोड़ पैसेजेंर इस रेल में सफर करते हैं।अगर रोजगार देने की बात करें तो भारतीय रेलवे विश्व में सातवें नंबर पर रोजगार देता है। 17 मार्च को संसद में कहा गया कि रेलवे का निजीकरण नहीं करेंगे।
सिंघवी ने कहा, हम ये भी जानते हैं कि आप इसे निजीकरण नहीं बोलते। आप कहते हैं ये तो रेलवे का निजीकरण नहीं है,प्राइवेटाइजेशन कुछ लाइन्स का है।इन शब्दों के जाल में कृपा देश को मूर्ख मत बनाईए।
कोरोना की आड़ में चला दिया निजीकरण का प्रस्ताव...
कांग्रेस नेता, सिंघवी यहीं पर नहीं रूके, उन्होंने साफ कह दिया कि कोरोना की आड़ में निजीकरण का प्रस्ताव आगे कर दिया है। विश्व की इतनी भंयकर त्रासदी के दौरान सरकार को निजीकरण करने के लिए ये सबसे अच्छा समय लगा है।
वो ऐसे कि इस समय सब कुछ सस्ते में ही निपट जाएगा। सरकार टेंडर देगी और उसके बाद मांग, दावा और पैमेंट सब न्यूनतम भी होंगे। आखिर रेलवे को इतने सस्ते में क्यों फेंका जा रहा है।इन सबके चलते सरकार का इरादा सही नहीं लगता।कोल माईनिंग के लिए भी कोरोना का समय चुना गया।
कोरोना के बीच नोन कैपिटव में भी कोल माईनिंग का निजीकरण हो सकता है, ये सोचने वाली बात है।इस वक्त किसमें दम है, कौन आर्थिक स्तंभ है, इतना मजबूत है, धनाढ्य है, शक्तिशाली है, जो माईनिंग का अच्छा रेट दे सकता है।
सरकार को ऐसी क्या जल्दबाजी है कि कुछ दिन संसद चलने का इंतजार नहीं कर सकी।बतौर सिंघवी, संसद आप बुलाते नहीं हैं, संसद का वर्चुअल सैशन भी नहीं करते हैं। ऐसे गंभीर मसलों पर संसद में कम से कम विचार-विमर्श तो कर लेते। अब रेलवे की जो लाइन नुकसान में हैं, प्राइवेट हाथ में जाते ही वह फायदे वाली बन जाएगी, ये कैसे होगा। क्या सरकार बताएगी।देश इन सब प्रश्नों की जवाबदेही मांगता है और जवाबदेही के सामने उन्हें सरकार से चुप्पी मिल रही है।