भक्तों के सफर को मिलेगी रफ्तार: काशी, खाटू श्याम-उज्जैन के लिए प्रोजेक्ट मंजूर, यात्रियों को होगा ये फायदा
काशी, खाटू श्याम और उज्जैन (महाकाल) जाने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए रेलवे ने बड़ी राहत देने वाला फैसला लिया है। त्योहारों और पीक सीजन में ट्रेनों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए रेलवे ने तीन राज्यों में अहम रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें औड़िहार–वाराणसी सिटी के बीच तीसरी लाइन, रींगस-सीकर सेक्शन की लाइन डबलिंग और उज्जैन के नाईखेड़ी–चिंतामण गणेश के बीच बाईपास लाइन शामिल है। रेलवे के मुताबिक, इन प्रोजेक्ट्स से ट्रेनों की आवाजाही तेज होगी। भीड़भाड़ कम होगी और धार्मिक-पर्यटन रूट्स पर यात्रियों को ज्यादा सुविधाजनक सफर मिल सकेगा।
उत्तर प्रदेश: 497.07 करोड़ रुपये
रेलवे ने उत्तर पूर्व रेलवे के अंतर्गत औड़िहार से वाराणसी सिटी के बीच तीसरी रेल लाइन के निर्माण को मंजूरी दी है। यहां यात्री ट्रेनों के साथ साथ मालगाड़ियों का भी भारी दबाव रहता है। इस रूट से सीमेंट, कोयला, खाद्यान्न, लोहा-स्टील और औद्योगिक सामग्री जैसी जरूरी वस्तुओं का परिवहन होता है। तीसरी लाइन बनने के बाद इस मार्ग पर दोनों दिशाओं में रोजाना 7.13 अतिरिक्त ट्रेनें चलाने की क्षमता बनेगी। जबकि माल ढुलाई में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
राजस्थान: 470.34 करोड़ रुपये
उत्तर पश्चिम रेलवे के अंतर्गत राजस्थान में रींगस सीकर सेक्शन की लाइन डबलिंग को मंजूरी दी गई है। यह परियोजना पूरी होने के बाद इस रूट पर दोनों दिशाओं में रोजाना करीब पांच अतिरिक्त ट्रेनें चलाने की संभावना बन जाएगी। इससे राजस्थान के औद्योगिक इलाकों और धार्मिक स्थलों की कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी। खासतौर पर खाटू श्याम मंदिर और सालासर बालाजी जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों तक पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है।
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मध्य प्रदेश: 189.04 करोड़ रुपये
पश्चिम रेलवे के अंतर्गत उज्जैन में नाईखेड़ी से चिंतामण गणेश तक प्रस्तावित बाईपास लाइन को मंजूरी दी गई है। रेलवे के मुताबिक, यह परियोजना एक रणनीतिक डायवर्सन के तौर पर काम करेगी, जिससे उज्जैन जंक्शन पर ट्रेनों को रिवर्स (दिशा बदलने) की जरूरत खत्म हो जाएगी। इससे सेक्शन की क्षमता बढ़ेगी और ऑपरेशनल व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी। यह रूट धार्मिक और पर्यटन यातायात के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। खासकर 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले को देखते हुए इस परियोजना से ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुचारू होने की उम्मीद है। इससे महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिल सकती है। रिवर्सिंग खत्म होने से देरी घटेगी और ट्रेनों का समय-पालन बेहतर होगा।