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Rahul Gandhi: राहुल के लद्दाख दौरे की वजह क्या, कहीं यह PM मोदी की छवि से मुकाबला करने की रणनीति तो नहीं?
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लद्दाख यात्रा के दौरान राहुल गांधी
- फोटो :
सोशल मीडिया
विस्तार
कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी 17-18 अगस्त के लिए लद्दाख दौरे पर गए थे, लेकिन अभी लौटे नहीं हैं। वह बाइक से लद्दाख और खारदुंग ला पहुंच कर लोगों से मिल रहे हैं, फोटो खिंचवा रहे हैं, बातें कर रहे हैं। राहुल वहां 25 अगस्त तक रहेंगे। उनका यह दौरा बढ़ा दिया गया है। लद्दाख के अलावा अभी उन्हें कई और क्षेत्रों में जाना है। इसके साथ-साथ कई बड़े सवाल भी हैं? राहुल गांधी लद्दाख गए तो इस बहाने चीनी घुसपैठ का मुद्दा फिर जीवंत हो गया है। ऐसे में क्या वह अब सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि से मुकाबला करने की तैयारी कर रहे हैं?
क्या यह राहुल की भारत जोड़ो यात्रा का अगला चरण है?
राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दूसरे चरण के बारे में कांग्रेस पार्टी के एक पूर्व केंद्रीय मंत्री कहते हैं कि आप इसे भी ऐसा मान सकते हैं। हालांकि, अभी तो राहुल गांधी का यह दौरा दो दिन का था। अब वह 25 अगस्त को अपनी लद्दाख की यात्रा को समाप्त करेंगे।
कांग्रेस पार्टी के सूत्र का कहना है कि राहुल गांधी अपनी भारत जोड़ो यात्रा शुरू करना चाहते हैं। हालांकि, पार्टी के नेता अभी राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत राज्यों के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में लगे हैं। 2024 में लोकसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में कांग्रेस के नेताओं का एक वर्ग सोचता है कि उन्हें लद्दाख की यात्रा जैसे विकल्पों की तरफ ध्यान देना चाहिए। इसमें कांग्रेस पार्टी का भी हित है। सूत्र बताते हैं कि इसकी सबसे बड़ी वजह राहुल गांधी की लगातार बढ़ रही लोकप्रियता और जनता में स्वीकार्यता है। राहुल गांधी की लद्दाख यात्रा और भारत जोड़ो यात्रा के दूसरे चरण के शुरू होने को लेकर कांग्रेस के नेताओं की राय अलग-अलग है।
राहुल गांधी लद्दाख क्यों गए हैं?
कांग्रेस पार्टी के रणनीतिकारों में गिने जाने वाले एक पूर्व मंत्री राहुल गांधी के लद्दाख जाने के बारे में पूछे जाने पर कहते हैं कि वह कांग्रेस पार्टी और विपक्ष के एकमात्र नेता हैं जो समय समय पर राष्ट्रहित के ज्वलंत मुद्दों को उठाते रहते हैं। सूत्र का कहना है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर दोनों तरफ भारत और चीन की सेना 2020 से ही बड़े पैमाने पर तैनात है। चीन के सैनिक भारतीय भू भाग में घुस आए थे और दोनों देशों के बीच में बफर जोन को लकर बनी सहमति भी हमारी जमीन पर है।
उ.प्र. से कांग्रेस के नेता कमल किशोर कमांडो कहते हैं कि सरकार इस मुद्दे पर सरकार पर्दा डालने में जुटी है। राहुल गांधी विपक्ष के नेता का अपना काम रहे हैं। उन्होंने इस मुद्दे को फिर जिंदा कर दिया है और केन्द्र सरकार को इस मुद्दे पर श्वेत पत्र लाना चाहिए। कांग्रेस के ही एक अन्य नेता हैं। वह सुरक्षा और वैश्विक मामलों पर काम कर रहे हैं। वह कहते हैं कि चीन की सेना डेपसांग, डेमचोक में भारतीय भू-भाग पर है। अभी 19 वें दौर की दोनों के सैन्य कमांडरों की वार्ता हुई थी। जितनी भी वार्ताएं हुई हैं, उसमें डेपसांग, डेमचोक जैसे मुद्दे नहीं उठ पा रहे हैं।
क्या प्रधानमंत्री मोदी की छवि से मुकाबले की तैयारी कर रहे हैं राहुल?
कांग्रेस के पुराने महासचिव और कभी कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के करीबियों में गिने जाने वाले एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि अभी इंतजार कीजिए। सूत्र का कहना है कि राहुल गांधी कड़ी मेहनत कर रहे हैं। उनको लेकर लोगों की धारणा बदल रही है। सूत्र का कहना है कि राहुल गांधी के संवाद के तरीके में भी बदलाव देखने में आ रहा है। केन्द्र सरकार के ऊपर राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी का बड़ा दबाव दिखाई दे रहा है। विपक्ष के नेता के नाते यह राहुल गांधी का काम भी है। राहुल गांधी की लद्दाख यात्रा को लेकर भाजपा के नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों की भी प्रतिक्रिया आई है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इसे राहुल की पुरानी आदत बताया है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रतिक्रिया में कहा कि कुछ भी करो, लेकिन भारतीय सुरक्षा बलों का मनोबल गिराने की कोशिश क्यों करते हो? रविशंकर प्रसाद अपनी प्रतिक्रिया का रूख आपरेशन बालाकोट और उरी हमलों का कांग्रेस पार्टी द्वारा सबूत मांगने और 1962 के भारत-चीन युद्ध के नतीजे से जोड़ दिया।
रविशंकर प्रसाद कहते हैं कि ऐसे राहुल गांधी से क्या उम्मीद की जा सकती है? राहुल गांधी की इस यात्रा को लेकर केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, अनुराग ठाकुर की भी प्रतिक्रिया आई। हालांकि राहुल गांधी ने लद्दाख यात्रा के दौरान खुद को सधे हुए बयान तक सीमित कर रखा है। राहुल गांधी ने कल भी बयान दिया कि लद्दाख के लोग कह रहे हैं कि चीन ने हमारी जमीन पर कब्जा किया है। राहुल 19 अगस्त को पेंगोग त्से झील गए। 20 अगस्त को वहीं अपने पिता को श्रद्धांजलि दी। बताते चले कि 2020 में चीनी सैनिकों की घुसपैठ के बाद पेगोंग त्से झील का मुद्दा भी काफी अहम था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद कहते हैं कि राहुल गांधी केन्द्र सरकार को सीधे आईना दिखा रहे हैं।