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राहुल का मिशन कर्नाटक शुरूः मंदिर, मठ और दरगाह जाकर साधेंगे सियासत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Updated Tue, 06 Feb 2018 12:38 PM IST
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राहुल गांधी
- फोटो : amar ujala
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तू डाल-डाल मैं पात-पात के तर्ज पर बीजेपी और कांग्रेस एक के बाद एक चुनावी अभियान का शुरुआत कर रही है। पिछले दिनों जहां पीएम नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक में चुनावी बिगुल फूंका और वीएस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद का प्रबल दावेदार घोषित किया वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी 10 फरवरी से कर्नाटक के चार दिनों के चुनावी दौरे की शुरुआत करने जा रहे हैं।
अपने चुनावी दौरे के दौरान मंदिर मंदिर मत्था टेक रहे राहुल इस दौरे के दौरान भी हुलीगेम्मा मंदिर, गवी सिद्धेश्वरा मठ और ख्वाजा नवाज दरगाह जाएंगे और इसके जरिए प्रदेश के वोटरों को साधने का प्रयास करेंगे। राहुल कर्नाटक 10 से 13 फरवरी तक कर्नाटक में रहेंगे।
कर्नाटक विधानसभा चुनाव मार्च-अप्रैल में होना है हालांकि चुनाव आयोग ने 225 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव की तारीख की घोषणा नहीं की है। बता दें कि वर्षों तक कई राज्यों में कांग्रेस का डंका बजता रहा है लेकिन अब पंजाब और कर्नाटक दो ही ऐसे बड़े राज्य हैं जहां कांग्रेस की सरकार है।
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यह भी पढ़ें: पीएम मोदी का बड़ा ऐलान- कर्नाटक में येदियुरप्पा होंगे बीजेपी के सीएम उम्मीदवार
राहुल बंगलूरू से अपने कर्नाटक दौरे की शुरुआत करेंगे और वहीं से राज्य के अन्य जिलों में भी जाएंगे। अपने चार दिनों के दौरे के दौरान राहुल गांधी किसानों, बुद्धिजीवियों और छात्रों सहित राज्य के सबसे पिछड़े लोगों समेत कई सभाओं को संबोधित करेंगे।
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अपने चुनावी दौरे के दौरान मंदिर मंदिर मत्था टेक रहे राहुल इस दौरे के दौरान भी हुलीगेम्मा मंदिर, गवी सिद्धेश्वरा मठ और ख्वाजा नवाज दरगाह जाएंगे और इसके जरिए प्रदेश के वोटरों को साधने का प्रयास करेंगे। राहुल कर्नाटक 10 से 13 फरवरी तक कर्नाटक में रहेंगे।
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कर्नाटक विधानसभा चुनाव मार्च-अप्रैल में होना है हालांकि चुनाव आयोग ने 225 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव की तारीख की घोषणा नहीं की है। बता दें कि वर्षों तक कई राज्यों में कांग्रेस का डंका बजता रहा है लेकिन अब पंजाब और कर्नाटक दो ही ऐसे बड़े राज्य हैं जहां कांग्रेस की सरकार है।
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राहुल बंगलूरू से अपने कर्नाटक दौरे की शुरुआत करेंगे और वहीं से राज्य के अन्य जिलों में भी जाएंगे। अपने चार दिनों के दौरे के दौरान राहुल गांधी किसानों, बुद्धिजीवियों और छात्रों सहित राज्य के सबसे पिछड़े लोगों समेत कई सभाओं को संबोधित करेंगे।
BJP के कुल 40 विधायक और कांग्रेस के 122 विधायक हैं
Rahul Gandhi
इस चुनावी दौरे के दौरान राहुल गांधी का फोकस कर्नाटक की 224 सदस्यीय विधानसभा में उन जिलों पर होगा जहां लिंगायतों का बोलबाला है। बता दें कि इस चुनाव में भी बीजेपी और कांग्रेस अपनी- अपनी नाक बचाने के लिए उतरेंगे। यहां फिलहाल BJP के कुल 40 विधायक हैं और कांग्रेस के 122 विधायक है। बीजेपी का मंसूबा गुजरात की तरह यहां भी 150 सीट जीतने का है। जबकि सिद्धरमैया अपनी सरकार बचाने के लिए भरपूर कोशिश करेंगे। वहीं सत्ता के अन्य दावेदार जनता दल सेकुलर भी हैं जिनके 40 विधायक हैं। जनता दल सेकुलर को भी इस चुनाव में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़नी है।
बता दें कि राहुल अपने मंदिर और मठ दर्शन से कर्नाटक के अलग अलग वर्गों को साधने का प्रयास करेंगे। राहुल के मठ जाने का मकसद राज्य में सबसे मजबूत माने जाने वाले समुदाय लिंगायतों का साधना है। बता दें कि कर्नाटक में वीर शैव मठों का जबरदस्त प्रभाव है। इन मठों ने 20वीं सदी के आरंभ से ही जन शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी संस्थाएं बनाना शुरू कर दिया था। करीब 17 फीसदी लिंगायत का बोलबाला है।
फिलहाल प्रदेश में लिंगायतों के एक हजार से ज्यादा मठ हैं। उनकी देखादेखी वोक्कलिग्गा और तमाम अन्य जातियों ने भी अपने मठ और उनके तहत शिक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी संस्थाएं बना रखी हैं और सारी राजनीतिक पार्टियां इसके द्वारा ही वोटरों को साधने में लगी हैं।
बता दें कि बीजेपी ने एकबार फिर बीएस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर एक पासा फेंका है वहीं सिद्धारमैया ने लिंगायतों को अल्पसंख्यक दर्जा देने का पासा फेंका था मगर आरएसएस के दखल से बीजेपी उसे रोकने में कामयाब रही है।
बता दें कि राहुल अपने मंदिर और मठ दर्शन से कर्नाटक के अलग अलग वर्गों को साधने का प्रयास करेंगे। राहुल के मठ जाने का मकसद राज्य में सबसे मजबूत माने जाने वाले समुदाय लिंगायतों का साधना है। बता दें कि कर्नाटक में वीर शैव मठों का जबरदस्त प्रभाव है। इन मठों ने 20वीं सदी के आरंभ से ही जन शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी संस्थाएं बनाना शुरू कर दिया था। करीब 17 फीसदी लिंगायत का बोलबाला है।
फिलहाल प्रदेश में लिंगायतों के एक हजार से ज्यादा मठ हैं। उनकी देखादेखी वोक्कलिग्गा और तमाम अन्य जातियों ने भी अपने मठ और उनके तहत शिक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी संस्थाएं बना रखी हैं और सारी राजनीतिक पार्टियां इसके द्वारा ही वोटरों को साधने में लगी हैं।
बता दें कि बीजेपी ने एकबार फिर बीएस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर एक पासा फेंका है वहीं सिद्धारमैया ने लिंगायतों को अल्पसंख्यक दर्जा देने का पासा फेंका था मगर आरएसएस के दखल से बीजेपी उसे रोकने में कामयाब रही है।