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कांग्रेस के तीनों मुख्यमंत्री दिल्ली आए, राहुल गांधी लगाएंगे मंत्रिमंडल पर अंतिम मुहर

Fri, 21 Dec 2018 10:25 AM IST
अमर शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Fri, 21 Dec 2018 10:25 AM IST
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Rahul Gandhi to take final decision on cabinet kamal nath sachin pilot ashok gehlot bhupesh baghel
अशोक गहलोत, भूपेश बघेल, कमलनाथ - फोटो : Amar Ujala
राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री के शपथग्रहण के चार दिन बीत जाने के बाद तक तीनों राज्यों के मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल गठन को लेकर कोई अंतिम फैसले पर नहीं पहुंच पाएं हैं। तीनों राज्यों में मुख्यमंत्रियों ने एक ही दिन 17 दिसंबर को शपथ ग्रहण किया था। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, कमलनाथ और भूपेश बघेल अपने-अपने राज्यों में मंत्रियों के संभावित नामों की सूची लेकर कांग्रेस आलाकमान के पास मौजूद हैं। शुक्रवार को तीनों मुख्यंत्री केंद्रीय पर्यवेक्षकों के साथ बैठक कर इस सूची पर चर्चा करेंगे।
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इस बैठक में मंत्रियों के नामों पर राय-मशवरा किया जाएगा। इसके बाद नामों की सूची कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को देंगे। फिर राहुल मंत्रिमंडल पर शुक्रवार को अंतिम निर्णय लेंगे। अगर नामों का एलान शुक्रवार को हो जाता है सोमवार तक तीनों राज्यों में मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। 
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राजस्थान: गहलोत-सचिन के गुटों में मंत्री पद को लेकर लॉबिंग

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत गुरुवार को दिल्ली पहुंच गए। उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट पहले से यहां मौजूद थे। राजस्थान में पहली बार में 15 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है। प्रदेश के कई विधायक मंत्री पद के लिए दिल्ली में लॉबिंग कर रहे हैं। 
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अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली पिछली कांग्रेस सरकार में भी मंत्रिमंडल गठन में 11 दिनों का वक्त लग गया था। वहीं साल 2013 में वसुंधरा राजे भी चुनाव परिणाम आने के 12 दिनों बाद मंत्रिमंडल पर फैसला कर पाईं थी। 

मध्यप्रदेश : पहली बार जीते विधायक नहीं बनेंगे मंत्री

मध्यप्रदेश में पहली बार में 20 मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। साल 2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अनुभव के साथ-साथ जातिगत समीकरणों के आधार पर मंत्रीपद बांटा जा सकता है। ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह के करीबी विधायकों को भी मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है। 

मध्यप्रदेश की 15वीं विधानसभा का पहला सत्र साल 2019 की जनवरी में होगा। मुख्यमंत्री कमलनाथ गुरुवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मिले और सत्र बुलाए जाने पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने 20 मिनट तक चर्चा की। मुख्यमंत्री ने राज्यपाल से मुलाकात के बाद पत्रकारों को बताया कि विधानसभा सत्र 7 जनवरी से शुरू होगा। 

मुख्यमंत्री ने बताया कि सत्र के पहले दिन विधायकों को शपथ दिलाई जाएगी। विधानसभा सत्र के दूसरे दिन 8 जनवरी को राज्यपाल का अभिभाषण होगा। मंत्रियों को लेकर नामों के कयास पर कमलनाथ ने स्पष्ट किया कि पहली बार विधायक बने नेताओं को मंत्री नहीं बनाया जाएगा। 

समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाजवादी पार्टी (बसपा) के विधायक मंत्रिमंडल में शामिल किए जाएंगे या नहीं? इस सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इन दलों ने समर्थन के लिए कोई शर्त नहीं रखी थी। इसलिए उनके विधायकों को मंत्रिमंडल में रखें या नहीं, इस पर फैसला सपा-बसपा का नेतृत्व को लेना है। 

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल 25 दिसंबर की शाम से 30 दिसंबर तक राजधानी से बाहर रहेंगी। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि इससे पहले मंत्रिमंडल का शपथग्रहण समारोह संपन्न हो सकता है। 

छत्तीसगढ़: अभी 10 विधायक बने सकते हैं मंत्री

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी दिल्ली में मौजूद हैं। खबरों के मुताबिक दिल्ली जाने से पहले भूपेश बघेल ने कहा वे फिलहाल किसी संभावित सूची के साथ दिल्ली नहीं जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाईकमान से चर्चा के बाद ही नाम तय होंगे। संवैधानिक नियमों के अनुसार 68 विधायकों में से सिर्फ 13 ही मंत्री बन सकते हैं। जिसमें से फिलहाल 10 विधायकों को मंत्रीपद की शपथ दिलाई जा सकती है। 


वरिष्ठ विधायकों में रवींद्र चौबे, सत्यनारायण शर्मा और मोहम्मद अकबर को मंत्री पद दिया जा सकता है। एससी, एसटी, ओबीसी और सामान्य वर्ग के विधायकों के साथ-साथ महिला विधायक को भी मंत्रिमंडल में मौका दिया जा सकता है। 
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