{"_id":"66fbde7b0878bee71e08d5ac","slug":"rahul-gandhi-targeted-15-lakh-votes-in-haryana-beyond-caste-and-religion-this-can-create-trouble-for-bjp-2024-10-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Haryana: क्यों जाति-मजहब से परे हैं हरियाणा में 15 लाख वोट, राहुल की इस गारंटी ने BJP के लिए खड़ी कर दी मुसीबत","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Haryana: क्यों जाति-मजहब से परे हैं हरियाणा में 15 लाख वोट, राहुल की इस गारंटी ने BJP के लिए खड़ी कर दी मुसीबत
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
हरियाणा में विधानसभा की जंग
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
हरियाणा के विधानसभा चुनाव में अब महज तीन दिन शेष बचे हैं। सभी दलों ने चुनावी माहौल को अपने पक्ष में करने के लिए पूरा जोर लगा रखा है। कांग्रेस पार्टी के स्टार प्रचारक और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव प्रचार खत्म होने तक यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने प्रदेश में 15 लाख ऐसे वोट, जो जाति या मजहब से परे माने जाते हैं, उन पर खास फोकस किया है। इन वोटरों को कांग्रेस के पक्ष में करने के लिए राहुल गांधी ने गारंटी भी दे दी है। यही वजह है कि अब उनकी गारंटियों के चलते भाजपा, मुसीबत में फंसती हुई दिखाई पड़ रही है।राहुल ने कह दिया है कि हम सामाजिक सुरक्षा के लिए पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करेंगे। कांग्रेस पार्टी को उम्मीद है कि 'पुरानी पेंशन' बहाली का दांव, कांग्रेस के पक्ष में सरकारी कर्मियों और उनके परिजन व रिश्तेदारों के वोट बटोरने में कारगर साबित होगा। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी, भूपेंद्र हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा सहित पार्टी के अन्य नेता भी अपनी रैलियों में ओपीएस लागू करने की गारंटी दे रहे हैं।
बता दें कि हरियाणा में पुरानी पेंशन बहाली एक बड़ा चुनावी मुद्दा बना हुआ है। दोनों प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस, इस मुद्दे पर अलग मत रखते हैं। जहां कांग्रेस पार्टी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में 'पुरानी पेंशन' देने की घोषणा कर रखी है तो दूसरी तरफ भाजपा की राज्य इकाई और विधानसभा चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार, ओपीएस को लेकर असमंजस में हैं। हालांकि ये नेता इस मुद्दे पर यह कहते हुए अपना पल्ला झाड़ लेते हैं कि ये तो केंद्र सरकार का मामला है। केंद्र सरकार ने पिछले दिनों ओपीएस पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। सरकारी कर्मियों के लिए एनपीएस के स्थान पर अब यूपीएस लाई गई है। इसे पहली अप्रैल 2025 से लागू किया जाना है।
पीएम मोदी ने 14 सितंबर को कुरुक्षेत्र में आयोजित एक चुनावी जनसभा में पेंशन को लेकर बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा, कर्मचारियों की हितैषी भाजपा सरकार 'नई पेंशन स्कीम' लेकर आई है। इसमें कर्मचारियों के लिए निश्चित पेंशन की गारंटी है। इस नई पेंशन स्कीम 'यूपीएस' का व्यापक स्वागत हुआ है। सरकारी कर्मचारियों ने इस पर खुशी जताई है।
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि सरकारी कर्मचारी, यूपीएस को लेकर खुश नहीं हैं। कर्मचारियों की एक ही मांग 'पुरानी पेंशन बहाली' है। इस मांग को लेकर सरकारी कर्मचारी कई वर्षों से आंदोलन और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। पेंशन बहाली संघर्ष समिति के राज्य प्रधान विजेंद्र धारीवाल कहते हैं, केंद्र सरकार ने यूपीएस के जो लाभ गिनाएं हैं, उन्हें तो कर्मचारियों ने रिजेक्ट कर दिया है। इतने वर्षों से सरकारी कर्मचारी जो आंदोलन कर रहे थे, वह यूपीएस के लिए नहीं था। कर्मचारियों की एक ही मांग थी, पुरानी पेंशन लागू कराना। प्रदेश का हर कर्मचारी चाहता है कि उसे पुरानी पेंशन मिले। जो भी पार्टी ओपीएस बहाली का वादा करेगी, उसे ही कर्मचारियों, उनके परिवार व रिश्तेदारों के वोट मिलेंगे। पिछले दिनों मुख्यमंत्री नायब सैनी ने सरकारी कर्मियों को लेकर सख्त बयान दिया था। उन्होंने कहा था, भाजपा सरकार बनने के बाद अधिकारियों व कर्मचारियों पर सख्ती करेंगे।
बतौर धारीवाल, जो लोग यह सोचते हैं कि कर्मचारियों की छोटी संख्या, चुनाव में क्या नुकसान पहुंचाएगी, उन्हें चुनावी नतीजों के बाद कर्मियों की ताकत का अहसास होगा। हरियाणा में लगभग 2.71 लाख सरकारी कर्मचारी हैं। इसके अलावा 1.55 लाख से अधिक पेंशनर्स हैं। अगर सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर के परिवारों को मिलाएं तो यह संख्या करीब 15 लाख के आसपास पहुंच जाती है।
इस बार विधानसभा चुनाव में अधिकांश सीटें ऐसी हैं, जहां पर हार जीत का अंतर अधिक नहीं होगा। कांग्रेस पार्टी ने भले ही लोकसभा चुनाव में ओपीएस बहाली को अपने घोषणा पत्र में जगह नहीं दी थी, लेकिन अब हरियाणा के चुनाव में पुरानी पेंशन को प्रमुख गारंटियों में शामिल किया गया है। भाजपा इस मामले में अपना रवैया स्पष्ट कर चुकी है। केंद्र सरकार ने यूपीएस को लागू करने की बात कही है। खास बात ये है कि पंद्रह लाख वोट, सीधे ओपीएस से जुड़े हैं। इन्हें जाति या धर्म के दायरे में नहीं बांधा जा सकता। अभी तक प्रदेश में ओपीएस के लिए जितने भी आंदोलन या प्रदर्शन हुए हैं, उनमें सभी जाति व धर्मों के कर्मचारियों ने भाग लिया है। ये कर्मचारी ओपीएस के मामले में दलगत राजनीति से भी परे बताए जाते हैं।
हरियाणा में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने सरकारी कर्मचारियों को साधने में कोई कसर बाकी नहीं रखी है। राहुल कह रहे हैं कि हम सामाजिक सुरक्षा के लिए पुरानी पेंशन योजना को दोबारा से बहाल करेंगे। इतना ही नहीं, उन्होंने अग्निवीर योजना को खत्म करने की बात कही है। राहुल ने यह भी कहा कि 'अग्निवीर योजना' इसलिए लाई गई है, क्योंकि केंद्र सरकार अग्निवीरों को पेंशन नहीं देना चाहती। इस बयान पर गुरुग्राम के बादशाहपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, राहुल बाबा झूठ बोलने की मशीन हैं। अग्निवीर योजना, सेना को जवान रखने के लिए बनाई गई है। हरियाणा सरकार और भारत सरकार, अग्निवीरों को पेंशन वाली नौकरी देगी।