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Jaishankar: चीन से सीमा विवाद के बीच जयशंकर का राहुल गांधी पर तंज, बोले- वे चीनी राजदूत से ही क्लास ले रहे

Sun, 07 May 2023 06:24 PM IST
कुमार विवेक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Sun, 07 May 2023 06:24 PM IST
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"Rahul Gandhi taking classes on China from Chinese ambassador," says EAM Jaishankar
S Jaishankar - फोटो : Social Media

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि वह चीनी राजदूत से चीन पर क्लास ले रहे हैं। मोदी सरकार की विदेश नीति विषय पर उन्होंने कहा, 'मैं राहुल गांधी से चीन पर क्लास लेने की सोच रहा था लेकिन मुझे पता चला कि वह खुद ही चीनी राजदूत से चीन पर क्लास ले रहे हैं। चीन के मसले पर राहुल गांधी की ओर से मोदी सरकार पर लगाए गए आरोपों पर जवाब देते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ये बातें कही।

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जयशंकर बोले- हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि विदेशों में देश की स्थिति कमजोर ना करें

जयशंकर ने डोकलाम संकट के दौरान भारत में चीन के राजदूत के साथ राहुल गांधी की मुलाकात का जिक्र किया। जयशंकर ने राहुल को निशाने पर लेते हुए कहा, "उन्होंने (राहुल ने) उस दौरान सरकार पर हमला करते हुए कहा कि भारत ने चीन के हाथों नया क्षेत्र गंवा दिया। मैं जानता हूं कि राजनीति में सब कुछ राजनीतिक होता है। मैं इसे स्वीकार करता हूं। लेकिन मुझे लगता है कि कुछ मुद्दों पर हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम कम से कम इस तरह से व्यवहार करें कि विदेशों में अपनी (भारत की) सामूहिक स्थिति को कमजोर न करें, जो हमने चीन के मामले में पिछले तीन वर्षों में देखा है।"
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विदेशी मंत्री ने राहुल गांधी की गलतबयानी और भ्रामक वक्तव्य देने का आरोप लगाया

जयशंकर ने भ्रामक आख्यानों और गलत बयानी पर भी निशाना साधा और उदाहरण दिया, एक पुल जिसे चीनी पैंगोंग त्सो पर बना रहे थे। उस मामले में भी गलतबयानी की गई। वास्तविकता यह थी कि इस विशेष क्षेत्र में पहले चीनी 1959 में आए थे, और फिर उन्होंने 1962 में इस पर कब्जा कर लिया। लेकिन इस तरह से इसे सामने नहीं रखा गया था। कुछ तथाकथित आदर्श गांवों के मामले में भी ऐसा ही हुआ वे उन क्षेत्रों पर बनाए गए थे जिन्हें हमने 62 में या 62 से पहले ही खो दिया था।


जयशंकर ने कहा कि आपने शायद ही कभी मुझे 1962 के बारे में यह कहते हुए सुना होगा कि, ऐसा नहीं होना चाहिए था, या इसमें किसी की गलत हैं, या कोई जिम्मेदार है। जो हुआ वह हो गया। यह हमारी सामूहिक विफलता या जिम्मेदारी थी। जरूरी नहीं कि मैं इसे राजनीतिक रंग दे दूं। वास्तव में चीन के साथ गंभीर बातचीत कह जरूरत है। मैं यह स्वीकार करने के लिए तैयार हूं कि इस पर अलग-अलग दृष्टिकोण हैं, लेकिन अगर इस मामले में सिर्फ स्लैगिंग हो तो मैं उसके बाद क्या कह सकता हूं?

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