Congress: 'नौकरशाही की जंजीरों में फंसे छोटे व्यापारी', राहुल बोले- बड़े उद्योगों को मिली खुली छूट, लेकिन...
राहुल गांधी ने सरकार पर आरोप लगाया कि उसने एकाधिकार को बढ़ावा देकर छोटे और मझोले कारोबारों को नौकरशाही और गलत जीएसटी नीतियों में जकड़ दिया है। वैश्य समुदाय के व्यापार संवाद में कारोबारियों ने संकट और निराशा जताई।
विस्तार
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया है कि सरकार ने बड़े एकाधिकारों को खुली छूट दे दी है, जबकि छोटे और मझोले कारोबारों को नौकरशाही और गलत नीतियों की जंजीरों में जकड़ दिया गया है। उन्होंने कहा कि गलत जीएसटी जैसी नीतियों ने व्यापारियों की कमर तोड़ दी है और देश की उत्पादन आधारित अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।
राहुल गांधी ने यह बातें वैश्य समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ हुए विस्तृत व्यापार संवाद के बाद कहीं। इस संवाद में जूता निर्माण, कृषि उत्पाद, औद्योगिक इलेक्ट्रिकल्स, कागज-स्टेशनरी, ट्रैवल, पत्थर कटिंग, केमिकल और हार्डवेयर जैसे कई क्षेत्रों से जुड़े कारोबारी शामिल थे। प्रतिनिधियों ने राहुल गांधी के सामने कहा कि उनका कारोबार अब 'ढहने की कगार' पर है। गांधी ने इसे खतरे की घंटी बताते हुए कहा कि जो समुदाय हमेशा से रोजगार और संपत्ति का सृजन करता रहा है, वही आज निराशा में है।
"हमारा व्यापार खत्म होने की कगार पर है” - व्यापार संवाद में वैश्य समाज की इस पीड़ा ने सच में झकझोर कर रख दिया।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) December 24, 2025
जिस समाज ने देश की अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक योगदान दिया, आज वही हताश है - ये खतरे की घंटी है।
सरकार ने Monopoly को खुली छूट दे दी है, और छोटे-मध्यम व्यापारियों को… pic.twitter.com/p3V950dCus
एकाधिकार बनाम छोटे व्यापारी
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों का झुकाव कुछ गिने-चुने बड़े कॉरपोरेट घरानों की ओर है। उनके मुताबिक, एकाधिकार और द्वैधाधिकार आधारित शासन मॉडल देश की अर्थव्यवस्था को खोखला कर रहा है। उन्होंने कहा कि छोटे और मझोले व्यापारी, जो देश की रीढ़ हैं, उन्हें नौकरशाही और जटिल नियमों के बोझ तले दबा दिया गया है। गांधी ने इसे सिर्फ नीतिगत विफलता नहीं, बल्कि उत्पादन, रोजगार और देश के भविष्य पर सीधा हमला बताया।
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जीएसटी पर गंभीर सवाल
व्यापारियों ने जीएसटी व्यवस्था को सुधार की जगह उत्पीड़न का औजार” करार दिया। उनका कहना था कि जीएसटी के अव्यावहारिक और तर्कहीन स्लैब जानबूझकर ऐसे बनाए गए हैं, जिससे एमएसएमई टिक न सकें। राहुल गांधी ने पहले भी जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स कहा था। संवाद में यह भी आरोप लगाया गया कि कच्चे माल पर जीएसटी बढ़ाकर और तैयार माल पर घटाकर सरकार केवल उपभोक्ता राहत का भ्रम पैदा कर रही है, जबकि इससे छोटे उद्योगों को सीधा नुकसान हो रहा है।
आत्मनिर्भर भारत’ पर सवाल
व्यापार प्रतिनिधियों ने दावा किया कि आत्मनिर्भर भारत जमीनी हकीकत में एक राजनीतिक नारा बनकर रह गया है। उनके अनुसार, मौजूदा नीतियों के चलते भारत पहले से ज्यादा चीन पर निर्भर होता जा रहा है। उन्होंने राहुल गांधी की इस बात से सहमति जताई कि तीन-चार अरबपति देश को रोजगार नहीं दे सकते। रोजगार तभी पैदा होगा, जब उत्पादन बढ़ेगा और एमएसएमई मजबूत होंगे।
वैश्य समुदाय का समर्थन
संवाद के अंत में व्यापारियों ने कहा कि उन्होंने पहले राहुल गांधी की चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया था, लेकिन अब हालात ने सारी गलतफहमियां दूर कर दी हैं। उन्होंने लोकतांत्रिक भारत, उत्पादन आधारित अर्थव्यवस्था, रोजगार और आर्थिक न्याय के लिए राहुल गांधी के संघर्ष और दृष्टि के साथ खुलकर खड़े होने का संकल्प जताया।
राहुल गांधी के इस बयान के बाद सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस के बीच आर्थिक नीतियों को लेकर टकराव और तेज होने के आसार हैं। जहां कांग्रेस सरकार पर एकाधिकार को बढ़ावा देने का आरोप लगा रही है, वहीं भाजपा अपनी नीतियों को विकासोन्मुखी बताती रही है। आने वाले समय में यह बहस और तेज होने की संभावना है।