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पति पर निर्भर देश की 70 फीसदी महिलाओं को स्वावलंबी बनाने में कितनी कारगर होगी न्यूनतम आय योजना?

Wed, 27 Mar 2019 08:03 PM IST
Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: Jitendra Bhardwaj Updated Wed, 27 Mar 2019 08:03 PM IST
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rahul gandhi nyay scheme women empowerment
राहुल गांधी - फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने पहले दिन 20 फीसदी गरीब परिवारों को न्यूनतम आय योजना के तहत सालाना 72 हजार रुपये देने का चुनावी वादा किया। अगले दिन पार्टी ने यह कह कर एक और मास्टर स्ट्रोक खेल दिया कि वह राशि सीधे महिलाओं के खाते में जाएगी। सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की प्रमुख रंजना कुमारी ने इस बाबत एक सवाल उठाया है कि पति पर निर्भर देश की 70 फीसदी महिलाओं को स्वावलंबी बनाने में राहुल गांधी की यह योजना कितनी कारगर साबित होगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि इससे लोकसभा चुनाव में कोई वोटिंग ट्रेंड बदलेगा, ऐसी संभावना बहुत कम नजर आती है। इससे कुछ सामाजिक समस्याएं तो हल होंगी, मगर महिलाएं स्वालंबी बनेंगी, इसके आसार कम हैं। 
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योजना से मिलने वाली राशि सीधे तौर पर गृहिणी के बैंक खाते में जाएगी, इस पर रंजना कुमारी ने कहा, यह ठीक कदम है। वजह, हमारे देश में दो तिहाई महिलाएं आज भी अपने पति पर निर्भर हैं। पति जैसा भी कहते हैं, महिलाओं को करना पड़ता है। 
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रुपये-पैसे के मामले में यह बात साबित हो चुकी है कि पुरुषों की तुलना में यदि महिलाओं के हाथ में आर्थिक जिम्मेदारी दे दी जाए तो वे परिवार का जीवन बेहतर बना सकती हैं। औरत के पास पैसा आता है तो वह उसे परिवार के स्वास्थ्य, शिक्षा और अच्छे खान-पान पर खर्च करना पसंद करती है। वे पैसे को गलत कार्यों के लिए खर्च नहीं करेंगी। 
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अगर न्यूनतम आय योजना का यही पैसा पुरुषों के खाते में जाएगा तो उसका दुरुपयोग होना तय है। हो सकता है कि पुरुष उस पैसे को सिनेमा पर, नशे पर या अपने किसी दूसरे शौक को पूरा करने के लिए खर्च कर सकता है। 

कई परिवारों में होने वाली हिंसा का कारण पैसा ही होता है। महिला को पति से पैसे मांगने पड़ते हैं तो इसी बात पर उनके बीच तकरार हो जाती है। इसमें महिलाओं को मारपीट और दूसरी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। रंजना कुमारी के मुताबिक, यह सही है कि इससे कई सामाजिक समस्याएं सुलझ जाएंगी, लेकिन महिलाएं स्वावलंबी बनेंगी, ऐसा होने के आसार कम हैं। 

दूसरा, इस योजना का लोकसभा चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यदि कोई यह सोच रहा है कि इससे किसी विशेष पार्टी को फायदा पहुंचेगा तो वह भूल होगी। इससे पहले भी ऐसे कई लुभावने वादे देश के सामने आए हैं। जब इन्हें धरातल पर लागू किया जाएगा, तब तक कई बातें बदल जाती हैं। 

'महिलाओं को रोजगार ज्यादा कारगर साबित होता'

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प्रतीकात्मक तस्वीर
किसी भी सरकार या राजनीतिक पार्टी को यह देखना चाहिए कि महिलाओं के लिए ज्यादा जरूरत किस बात की है। आज उन्हें अपने पांव पर खड़े करना, यही सबसे बड़ी चुनौती है। महिलाओं को अधिक से अधिक रोजगार देने के लिए योजना बननी चाहिए। जब रोजगार होगा तो वे आर्थिक मामलों में पति पर निर्भर नहीं रहेंगी और इससे वे स्वावलंबी भी बन सकेंगी। 

रंजना कुमारी ने कहा, बड़ी बात है महिलाओं को स्वालंबी बनाना। यह तभी संभव है, जब उनके पास रोजगार होगा। यही वजह है कि महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में कम से कम 33 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग की जा रही है। इस मुद्दे पर सभी पार्टियों को आगे आना चाहिए। 
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