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राहुल के आरोपों पर अग्वा वेंटिलेटर के मालिक ने कहा, वह डॉक्टर नहीं है, इसलिए उन्हें डेमो दिखाना चाहूंगा

Tue, 07 Jul 2020 03:35 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनवर अंसारी Updated Tue, 07 Jul 2020 03:35 PM IST
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Rahul Gandhi Not A Doctor, Willing To Give Him A Demo: AgVa Rejects Allegations Of Faulty Ventilators
अग्वा (AgVa) वेंटिलेटर के सह-संस्थापक प्रोफेसर दिवाकर वैश - फोटो : ANI

राहुल गांधी ने रविवार को सरकार पर हमला बोलते हुए कहा था कि वह पीएस केयर्स फंड का इस्तेमाल कर कोविड-19 रोगियों के लिए घटिया वेंटिलेटर खरीद रही है। उन्होंने कहा था कि पीएम केयर्स में अपारदर्शिता से भारतीयों का जीवन खतरे में पड़ता जा रहा है और सार्वजनिक धन का इस्तेमाल घटिया सामग्री खरीदने में हो रहा है।

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वहीं, मंगलवार को इस वेंटिलेटर को बनाने वाली कंपनी अग्वा (AgVa) वेंटिलेटर के सह-संस्थापक प्रोफेसर दिवाकर वैश ने स्पष्टीकरण दिया। वैश ने कहा कि राहुल गांधी ने वेंटिलेटर की जांच किए बिना ही उससे जुड़ी खबर को रीट्वीट कर दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी डॉक्टर तो हैं नहीं, जो उन्हें वेंटिलेटर की जांच करना आता हो। 
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उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय निर्माता नहीं चाहते हैं कि भारतीय वेंटिलेटर को बढ़ावा दिया जाए और इसलिए वे स्वदेशी प्रयासों को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए अगर राहुल गांधी चाहें तो मैं उन्हें वेंटिलेटर कैसे काम करता है, इसका डेमो दिखा सकता हूं। 
 

वैश ने बताया कि वेंटिलेटर में एक प्रक्रिया होती है, जिसे एफआईओ2 कहा जाता है। इसके माध्यम से पता चलता है कि ऑक्सीजन कितना डिलीवर हो रहा है और इससे पता चलता है कि कितनी फीसदी ऑक्सीजन का इस्तेमाल हो रहा है। 

उन्होंने बताया कि हवा में 21 फीसदी ऑक्सीजन होता है, लेकिन कोरोना मरीजों को जरूरत पड़ने पर 100 फीसदी ऑक्सीजन देना पड़ता है। इसलिए हमने अपने ऑक्सीजन को इस तरह तैयार किया है कि यह 21 फीसदी से लेकर 100 फीसदी तक ऑक्सीजन को मरीज को दे सकता है। 

यह भी पढ़ें: कांग्रेस का भाजपा पर हमला, राहुल बोले- पीएम केयर्स कोष में अपारदर्शिता से खतरे में पड़ रही है जिंदगियां

प्रोफेसर ने बताया कि इसकी जानकारी हमने अपने ब्रोशर में दे दी है और यही हम लोगों को बताते भी हैं। अगर आप चाहें तो इसकी जांच भी कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इसकी जांच के लिए हमने एक डिवाइस भी मंगाया है, ताकि हम अपनी बात को सच साबित कर सकें। 

राहुल गांधी डॉक्टर नहीं है, इसलिए उन्हें संशोधन की जानकारी नहीं
राहुल गांधी के आरोपों पर बोलते हुए वैश ने कहा कि कुछ लोग एफआईओ2 यानी ऑक्सीजन की मात्रा को लेकर हम पर आरोप लगा रहे हैं कि हम उसमें गड़बड़ी कर रहे हैं। हम लोगों को बताना चाहते हैं कि हर वेंटिलेटर के अंदर ऑक्सीजन सेंसर लगा होता है, जिसकी धीरे-धीरे दक्षता कम होती जाती है, इसलिए इसको संशोधित करना होता है। हर वेंटिलेटर के अंदर इसकी जांच करने का विकल्प होता है। 

वैश ने कहा कि कई बार आप 100 फीसदी ऑक्सीजन का प्रयोग करते हैं, लेकिन आपको यह 90 फीसदी दिखाई देगा। इस दौरान आपको इसे संशोधित करना होता है और इसे सामान्य स्तर पर लाना होता है। उन्होंने बताया कि यह बात दुनिया के हर एक एनेस्थेटिस्ट को पता है और यही हम भी करते हैं। 

उन्होंने कहा कि अब कुछ वर्तमान कर्मियों और कुछ पूर्व कर्मियों को ये बात नहीं पता थी। उन्होंने मशीन में थोड़ा सा परिवर्तन किया और वह संशोधित होकर 100 फीसदी पर पहुंच गई। राहुल गांधी को यह बात पता नहीं होगी क्योंकि वह डॉक्टर तो हैं नहीं।


वैश ने कहा कि इसलिए उन्होंने उस खबर को रीट्वीट कर दिया, जिसमें वेंटिलेटर के घटिया होने की बात कही गई थी। गांधी ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि वेंटिलेटर में संशोधन प्रक्रिया क्या है और इसे कैसे किया जाता है। इसलिए हम कहना चाहते हैं कि वेंटिलेटर में कोई खामी नहीं है। 

सरकार की तरफ से कोई दबाव नहीं
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें मांग को देखते हुए निर्माण को बड़ी संख्या में करने का दबाव दिया गया, तो उन्होंने कहा कि हम पर कोई दबाव नहीं था। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जांच किए जाने के बाद हमें ऑर्डर दिया गया। वेंटिलेटरों की कई मरीजों पर जांच की गई। मंत्रालय द्वारा इसको लेकर पूरा विश्लेषण किया गया है। 
 

 

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