स्मृति शेष : राहत की लाइनें बनीं आजकल के युवाओं का फलसफा
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मशहूर शायर और कवि राहत इंदौरी भले ही दुनिया को अलविदा कह गए हों लेकिन उनकी कविताएं, शायरियां और उनकेे किस्से उन्हें चाहने वालों के दिलों में हमेशा जिंदा रखेंगे। ‘बुलाती है मगर जाने का नई’ जैसी लिखीं लाइनें तो आजकल के युवाओं के बीच इस्तेमाल करने का फलसफा बन गई हैं। राहत सिर्फ शायरी और कविताएं ही नहीं करते थे, बल्कि उन्होंने हिंदी फिल्मों जैसे, खुद्दार, मुन्ना भाई एमबीबीएस, मिशन कश्मीर, करीब, इश्क, घातक जैसी फिल्मों के लिए गीत भी लिखे।
सिनेमा में गीतकार राहत इंदौरी की संगीतकार अनु मलिक से खूब पटी। अनु मलिक गम जाहिर करते हुए कहते हैं, ‘यह मेरे लिए बहुत दुखद खबर है। वह बहुत ही जिंदादिल इंसान थे। कमाल के शायर थे। उनसे मेरी पहली मुलाकात महेश भट्ट की फिल्म ‘सर’ के दौरान हुई। उन्होंने वहां ‘आज हमने दिल का हर किस्सा तमाम कर दिया’ लिखा।
अनु कहते हैं, जब उन्हें इंदौर से गीत लिखने के लिए बुलाया गया तो वह बहुत खुश हुए। उन्हें महेश और मुकेश भट्ट से मिलवाया गया और फिल्म का यह गीत लिखने के लिए कहा गया। यह गाना हिट हो गया तो हमारा सिलसिला शुरू हुआ। वह शायर तो कमाल के थे लेकिन उन्हें ढूंढना बहुत मुश्किल था।
हे ईश्वर! बेहद दुखद! इतनी बेबाक जिंदगी और ऐसा तरंगित शब्द-सागर इतनी खामोशी से विदा लेगा, सोचा नहीं था। शायरी के मेरे सफर और काव्य-जीवन के ठहाकेदार किस्सों का एक बेहद जिंदादिल हमसफर हाथ छुड़ाकर चला गया। -कुमार विश्वास, प्रख्यात कवि