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ताकत: भारत के लड़ाकू विमान राफेल से उड़ी चीन व पाक की नींद, अपने एयर डिफेंस पोस्चर में किया बदलाव

Fri, 23 Apr 2021 02:20 PM IST
प्रियंका तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रियंका तिवारी Updated Fri, 23 Apr 2021 02:20 PM IST
सार

मार्च में जब से राफेल लड़ाकू विमानों में लैस हैमर मिसाइल का टेस्ट हुआ है, तब से ही चीन और पाकिस्तान दोनों के एयर डिफेंस पोस्चर (हवाई रक्षा मुद्रा) में बदलाव आया है। 

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Rafale weaponry prompts China and Pakistan to alter their defence posture
राफेल लड़ाकू विमान - फोटो : ANI

विस्तार

भारत के लड़ाकू विमानों के बेड़े में राफेल के शामिल होने से चीन और पाकिस्तान की नींद गायब हो चुकी है तभी तो ये दोनों देश न सिर्फ अपनी सामरिक ताकत बढ़ाने में जुट गए हैं, बल्कि मजबूरन उन्हें अपने लड़ाकू विमानों की पोजिशनिंग को भी बदलना पड़ रहा है। इस मामले के जानकारों की मानें तो मार्च में जब से राफेल लड़ाकू विमानों में लैस हैमर मिसाइल का टेस्ट हुआ है, तब से ही चीन और पाकिस्तान दोनों के एयर डिफेंस पोस्चर (हवाई रक्षा मुद्रा) में बदलाव आया है। 

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पड़ोसी देशों ने अपने लड़ाकू विमानों की पोजिशनिंग में किया बदलाव

राफेल लड़ाकू विमानों में लगी हैमर मिसाइल 60 किलोमीटर दूर तक किसी भी तरह के लक्ष्य को ध्वस्त कर सकती है। इस मिसाइल का निशाना बहुत सटीक बताया जाता है। हैमर हथियार टेस्टिंग के दौरान लोकेशन पर अपने टारगेट को ध्वस्त करने में सफल रहा।

रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों की मानें तो भारतीय वायुसेना के अंबाला बेस में पहले राफेल स्क्वाड्रन के पूरा होने पर चीन और पाकिस्तान की नींद हराम हो गई। अंबाला एयरबेस पर राफेल की तैनाती के तुरंत बाद चीन ने अपने कथित 4.5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान जे-20 को तिब्बत और शिनजियांग एयरबेस में आगे की ओर तैनात कर दिया।

वहीं, पाकिस्तान ने भी राफेल लड़ाकू के स्पष्ट और मौजूदा खतरे से निपटने के लिए अपने चीन से खरीदे जेएफ- 17 लड़ाकू विमान को भी अहम फॉरवर्ड बेसों में तैनात कर दिया।

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4.5वीं पीढ़ी का विमान है राफेल

चीन का कहना है कि यूएस एफ-22 और एफ-35 लड़ाकू विमान के बाद उसका जे-20 तीसरा ऐसा विमान है जो पांचवीं पीढ़ी का फाइटर प्लेन है। हालांकि, चीन का यह दावा गलत साबित होता है, क्योंकि अमेरिका के पांचवीं पीढ़ी के विमान में कनार्ड नहीं होता है, जबकि चीन के जे-20 में कनार्ड लगा हुआ है।

अधिकारियों ने कहा कि चीनी जे-20 में वही कनार्ड है जो राफेल में लगा है। बता दें कि राफेल 4.5वीं पीढ़ी का विमान है, जिसमें रडार से बच निकलने की तरकीब है। राफेल से पहले भारतीय वायुसेना के पास अब तक के विमान मिराज-2000 और सुखोई-30 एमकेआई या तो तीसरी पीढ़ी या चौथी पीढ़ी के विमान हैं।

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घातक मीका, मेटेओर और स्काल्प मिसाइलों से लैस है राफेल

चीनी और पाकिस्तानी एयर पोस्चर में भी वायुसेना के राफेल को शामिल करने के साथ बदलाव आया, क्योंकि राफेल को मेटेओर यानी हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल से लैस किया गया है। राफेल को हवा और जमीन दोनों जगहों पर अपने टारगेट को तबाह करने के लिए घातक मीका, मेटेओर और स्काल्प मिसाइलों से लैस किया गया है।

हैमर से पहले राफेल में 500 किलोमीटर की रेंज वाली स्काल्प मिसाइल इसे सबसे ज्यादा मारक बनाती है। वहीं, मेटेओर एयर-टू-एयर मिसाइल का निशाना अचूक है और मीका दुश्मनों के मंसूबों को तोड़कर रख देती। अब तो राफेल को हैमर मिसाइल से भी लैस कर दिया गया है जो कि काफी खतरनाक हथियार है, जिसे जीपीएस की उपलब्धता के बिना भी भारतीय टेरिटरी से लॉन्च किया जा सकता है।

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