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Rafale M: पीएम मोदी के फ्रांस दौरे में हो सकती राफेल-एम डील, यह राफेल से कितना अलग, भारत के लिए अहम क्यों?
Sun, 09 Jul 2023 08:29 AM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Sun, 09 Jul 2023 08:29 AM IST
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राफेल एम लड़ाकू विमान
- फोटो :
AMAR UJALA
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13-14 जुलाई को फ्रांस के दौरे पर जाने वाले हैं। पीएम को 14 जुलाई को फ्रांस के राष्ट्रीय दिवस 'बैस्टिल डे' परेड समारोह में बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी 26 राफेल समुद्री लड़ाकू जेट (राफेल एम) खरीदने के लिए अरबों डॉलर के सौदे की घोषणा कर सकते हैं।अमेरिका के बाद पीएम का फ्रांस दौरा भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए अहम साबित हो सकता है। इस बीच जानना जरूरी है कि आखिर राफेल एम है क्या? यह राफेल विमानों से कितना अलग है? इसको लेकर अभी क्या हो रहा है? आइए जानते हैं...
राफेल एम लड़ाकू विमान
- फोटो :
SOCIAL MEDIA
पहले जानते हैं राफेल एम क्या है?
राफेल एम राफेल लड़ाकू विमान का नौसैनिक संस्करण है जिसका पूरा नाम राफेल मैरीटाइम है। दरअसल, लड़ाकू विमान के तीन प्रमुख संस्करण हैं- राफेल सी सिंगल-सीट जो जमीन से इस्तेमाल किए जाने वाला संस्करण है, राफेल बी दो सीटों वाला जमीन से इस्तेमाल किए जाने वाला संस्करण और राफेल एम जो सिंगल-सीट कैरियर-आधारित संस्करण है। राफेल एम का निर्माण फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन ने किया है।
राफेल एम राफेल लड़ाकू विमान का नौसैनिक संस्करण है जिसका पूरा नाम राफेल मैरीटाइम है। दरअसल, लड़ाकू विमान के तीन प्रमुख संस्करण हैं- राफेल सी सिंगल-सीट जो जमीन से इस्तेमाल किए जाने वाला संस्करण है, राफेल बी दो सीटों वाला जमीन से इस्तेमाल किए जाने वाला संस्करण और राफेल एम जो सिंगल-सीट कैरियर-आधारित संस्करण है। राफेल एम का निर्माण फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन ने किया है।
क्या हैं तकनीकी खूबियां?
राफेल एम की लंबाई 15.27 मीटर, ऊंचाई 5.34 मीटर और वजन 10600 किलोग्राम है। इसकी ईंधन क्षमता 4700 किलोग्राम है। हाई अल्टीट्यूड में विमान की अधिकतम गति 1912 किमी/घंटा है, तो कम ऊंचाई पर इसकी रफ्तार 1390 किमी/घंटा है। तीन ड्रॉप टैंक के साथ इसकी रेंज 3700 किमी है। यह विमान किसी वाहक (कैरियर) पर उड़ान भर और उतर सकता है।
इसमें भारतीय वायुसेना को मिले राफेल से 80 फीसदी से अधिक विशेषताएं हैं। बेड़े की समानता के कारण प्रशिक्षण, मरम्मत और रखरखाव के कारण होने वाली बचत ने नौसेना को इन विमानों को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया। लड़ाकू विमान अत्याधुनिक समुद्री प्रणालियों से लैस होंगे, जिनमें युद्धपोतों के अलावा पनडुब्बियों का पता लगाने में सक्षम समुद्री खोज रडार भी शामिल होंगे।
राफेल एम की लंबाई 15.27 मीटर, ऊंचाई 5.34 मीटर और वजन 10600 किलोग्राम है। इसकी ईंधन क्षमता 4700 किलोग्राम है। हाई अल्टीट्यूड में विमान की अधिकतम गति 1912 किमी/घंटा है, तो कम ऊंचाई पर इसकी रफ्तार 1390 किमी/घंटा है। तीन ड्रॉप टैंक के साथ इसकी रेंज 3700 किमी है। यह विमान किसी वाहक (कैरियर) पर उड़ान भर और उतर सकता है।
इसमें भारतीय वायुसेना को मिले राफेल से 80 फीसदी से अधिक विशेषताएं हैं। बेड़े की समानता के कारण प्रशिक्षण, मरम्मत और रखरखाव के कारण होने वाली बचत ने नौसेना को इन विमानों को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया। लड़ाकू विमान अत्याधुनिक समुद्री प्रणालियों से लैस होंगे, जिनमें युद्धपोतों के अलावा पनडुब्बियों का पता लगाने में सक्षम समुद्री खोज रडार भी शामिल होंगे।
राफेल एम लड़ाकू विमान
- फोटो :
SOCIAL MEDIA
अभी इसको लेकर क्या हो रहा है?
प्रधानमंत्री की फ्रांस यात्रा से ठीक एक सप्ताह पहले, रक्षा मंत्रालय का रक्षा खरीद बोर्ड 26 राफेल-एम जेट खरीदने के सौदे पर विचार कर रहा है। भारतीय वायुसेना के पास पहले से ही 36 राफेल हैं जिन्हें जमीन पर हवाई अड्डों पर तैनात किया जा सकता है। जानकारी के मुताबिक, राफेल एम विमान भारतीय वायु सेना द्वारा पहले खरीदे गए लड़ाकू विमानों की तुलना में सस्ते होंगे। इन्हें खुली निविदा का रास्ता अपनाने के बजाय सरकार-से-सरकार सौदे के माध्यम से खरीदा जाएगा।
प्रधानमंत्री की फ्रांस यात्रा से ठीक एक सप्ताह पहले, रक्षा मंत्रालय का रक्षा खरीद बोर्ड 26 राफेल-एम जेट खरीदने के सौदे पर विचार कर रहा है। भारतीय वायुसेना के पास पहले से ही 36 राफेल हैं जिन्हें जमीन पर हवाई अड्डों पर तैनात किया जा सकता है। जानकारी के मुताबिक, राफेल एम विमान भारतीय वायु सेना द्वारा पहले खरीदे गए लड़ाकू विमानों की तुलना में सस्ते होंगे। इन्हें खुली निविदा का रास्ता अपनाने के बजाय सरकार-से-सरकार सौदे के माध्यम से खरीदा जाएगा।
बोईंग एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट जेट
- फोटो :
बोईंग
एफ-18 से आगे निकला राफेल एम
26 लड़ाकू विमान खरीदने के लिए फ्रांसीसी लड़ाकू विमान राफेल और अमेरिकी लड़ाकू विमान एफ-18 में कड़ी टक्कर हुई थी। इन दोनों विमानों का गोवा में एक नौसेना टीम ने व्यापक परीक्षण किया था। परीक्षण के बाद नौसेना ने रक्षा मंत्रालय को सूचित किया कि राफेल-एम उसकी जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्त है। इस तरह से परीक्षण में राफेल एम ने बाजी मारी और नौसेना इसकी डील के लिए आगे बढ़ गई। इसके अलावा भारतीय नौसेना के अधिकारी एक संयुक्त अभ्यास के दौरान राफेल-एम की क्षमताओं से प्रभावित हुए थे।
26 लड़ाकू विमान खरीदने के लिए फ्रांसीसी लड़ाकू विमान राफेल और अमेरिकी लड़ाकू विमान एफ-18 में कड़ी टक्कर हुई थी। इन दोनों विमानों का गोवा में एक नौसेना टीम ने व्यापक परीक्षण किया था। परीक्षण के बाद नौसेना ने रक्षा मंत्रालय को सूचित किया कि राफेल-एम उसकी जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्त है। इस तरह से परीक्षण में राफेल एम ने बाजी मारी और नौसेना इसकी डील के लिए आगे बढ़ गई। इसके अलावा भारतीय नौसेना के अधिकारी एक संयुक्त अभ्यास के दौरान राफेल-एम की क्षमताओं से प्रभावित हुए थे।
INS Vikrant 2022
- फोटो :
Agency (File Photo)
नौसेना के लिए क्यों जरूरी हैं ये विमान?
भारतीय नौसेना अपने पुराने मिग 29K के स्थान पर विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर तैनात करने के लिए एक उपयुक्त लड़ाकू विमान की तलाश कर रही थी। इसकी खोज दसॉल्ट के राफेल मरीन के साथ समाप्त हुई। वहीं भारत हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ मिलकर स्वदेशी डेक-आधारित लड़ाकू विमान विकसित करने की दीर्घकालिक योजना पर भी काम कर रहा है।
इन जुड़वा इंजन वाले डेक-आधारित लड़ाकू विमानों को एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है और इनका निर्माण एचएएल द्वारा किया जाएगा। विमान को पहली बार 2021 में एयरो इंडिया में प्रदर्शित किया गया था। हालांकि, इनको तैनात होने में कुछ साल लगेंगे। इसलिए, नौसेना ने अपनी अल्पकालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए एकमुश्त खरीदारी करने का फैसला किया।
भारतीय नौसेना अपने पुराने मिग 29K के स्थान पर विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर तैनात करने के लिए एक उपयुक्त लड़ाकू विमान की तलाश कर रही थी। इसकी खोज दसॉल्ट के राफेल मरीन के साथ समाप्त हुई। वहीं भारत हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ मिलकर स्वदेशी डेक-आधारित लड़ाकू विमान विकसित करने की दीर्घकालिक योजना पर भी काम कर रहा है।
इन जुड़वा इंजन वाले डेक-आधारित लड़ाकू विमानों को एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है और इनका निर्माण एचएएल द्वारा किया जाएगा। विमान को पहली बार 2021 में एयरो इंडिया में प्रदर्शित किया गया था। हालांकि, इनको तैनात होने में कुछ साल लगेंगे। इसलिए, नौसेना ने अपनी अल्पकालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए एकमुश्त खरीदारी करने का फैसला किया।
राफेल लड़ाकू विमान
- फोटो :
ANI
पहले आ चुके राफेल विमान क्या हैं?
भारतीय वायुसेना के पास में वर्तमान में 36 राफेल विमान हैं। फ्रांस से खरीदा गया 4.5 जेनरेशन का यह विमान दुनिया के सबसे उन्नत तकनीक में एक में शामिल है और युद्ध के किसी भी मोर्चे पर दुश्मन को धूल चटाने की ताकत रखता है। राफेल को मल्टी रोल लड़ाकू विमान भी कहा जाता है। यानी कि यह हवा से हवा और हवा से जमीन पर भी हमला कर सकता है।
दिसंबर 2022 में फ्रांस से खरीदे गए 36 राफेल विमानों में से अंतिम विमान भारतीय सरजमीं पर उतरा था। 2016 में 60,000 करोड़ रुपये से अधिक के सौदे को लेकर यह आखिरी विमान की डिलीवरी थी। ये विमान पश्चिम बंगाल के हाशिमारा और हरियाणा के अंबाला में तैनात हैं।
राफेल को चीन के साथ संघर्ष के दौरान भारतीय वायु सेना में शामिल किया गया था और देश में आने के बाद इन्हें लद्दाख में तैनात किया गया था। IAF ने लंबी दूरी की उल्का हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के साथ-साथ स्कैल्प से हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलों को भी इसमें लगाया है। IAF ने HAMMER मिसाइल को भी राफेल में जोड़ा है।
भारतीय वायुसेना के पास में वर्तमान में 36 राफेल विमान हैं। फ्रांस से खरीदा गया 4.5 जेनरेशन का यह विमान दुनिया के सबसे उन्नत तकनीक में एक में शामिल है और युद्ध के किसी भी मोर्चे पर दुश्मन को धूल चटाने की ताकत रखता है। राफेल को मल्टी रोल लड़ाकू विमान भी कहा जाता है। यानी कि यह हवा से हवा और हवा से जमीन पर भी हमला कर सकता है।
दिसंबर 2022 में फ्रांस से खरीदे गए 36 राफेल विमानों में से अंतिम विमान भारतीय सरजमीं पर उतरा था। 2016 में 60,000 करोड़ रुपये से अधिक के सौदे को लेकर यह आखिरी विमान की डिलीवरी थी। ये विमान पश्चिम बंगाल के हाशिमारा और हरियाणा के अंबाला में तैनात हैं।
राफेल को चीन के साथ संघर्ष के दौरान भारतीय वायु सेना में शामिल किया गया था और देश में आने के बाद इन्हें लद्दाख में तैनात किया गया था। IAF ने लंबी दूरी की उल्का हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के साथ-साथ स्कैल्प से हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलों को भी इसमें लगाया है। IAF ने HAMMER मिसाइल को भी राफेल में जोड़ा है।