कोर्ट से बाहर राफेल पर तकरार जारी रहेगी
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सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील पर सवाल उठाने वालीं सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं, लेकिन अदालत से बाहर इस मसले को लेकर तकरार जारी रहेगी। शुक्रवार को सर्वोच्च अदालत का यह फैसला आते ही भाजपा ने इसे भुनाने में तनिक सी भी देरी नहीं की। केंद्र सरकार के मंत्रियों से लेकर भाजपा के पदाधिकारियों ने एक साथ कांग्रेस पार्टी पर हमला बोल दिया। संसद के अंदर भी इस मुद्दे को लेकर जबरदस्त हंगामा हुआ। लोकसभा में मांग की गई कि राहुल गांधी सदन में आकर माफी मांगे, जबकि राज्यसभा में वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा, हम राफेल पर चर्चा के लिए तैयार हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी ने भी साफ कर दिया कि वह इस मसले पर चुप नहीं बैठेगी। राफेल का सच सामने आए, इसके लिए संयुक्त संसदीय कमेटी (जेपीसी) का गठन किया जाए।
बता दें कि पांच राज्यों के चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी ने राफेल डील में हुए कथित भ्रष्टाचार को लेकर भाजपा पर हमला बोला था। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी ने चुनावी जनसभाओं में राफेल पर मोदी सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ा था। इतना ही नहीं, कांग्रेस पार्टी ने अपने संवाददाता सम्मेलनों में भी यह बात कही थी कि वे इस मुद्दे को 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रमुख मुदा बनाएंगे। इस मसले पर पार्टी की यूथ इकाई ने दिल्ली में कई बार विरोध प्रदर्शन भी किया था।
राफेल विमानों की खरीद पर कोर्ट दखल नहीं दे सकता
अब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई द्वारा अपने फैसले में यह कहना कि राफेल विमानों की खरीद पर कोर्ट दखल नहीं दे सकता। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को सौदे की प्रक्रिया में क्लीन चिट देते हुए कहा कि विमानों की खरीद को लेकर भी कोर्ट दबाव नहीं बना सकता। देश के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा, पसंद का ऑफसेट पार्टनर चुने जाने में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है और व्यक्तिगत सोच के आधार पर रक्षा खरीद जैसे संवेदनशील मामलों में जांच नहीं करवाई जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से मोदी सरकार को भारी राहत पहुंची है।कांग्रेस पार्टी ने संसद का शीतकालीन सत्र शुरु होने से पहले यह घोषणा कर दी थी कि लोकसभा और राज्यसभा में राफेल घोटाले का मुद्दा जोरशोर से उठाया जाएगा। यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी और दूसरे कांग्रेसी नेताओं ने भी साफ कर दिया है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला हमारे लिए कोई दुख की बात नहीं है। पार्टी तब तक चुप नहीं बैठेगी, जब तक इसकी जांच के लिए जेपीसी का गठन नहीं हो जाता। कांग्रेस पार्टी के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का कहना है कि हम जनता की अदालत में जाएंगे। जनता की अदालत सबसे बड़ी है। रणदीप सुरजेवाला ने कहा, मोदी जेपीसी का गठन करने से क्यों डर रहे हैं। जेपीसी में भी तो उनकी पार्टी का बहुमत रहेगा। उन्हें तुरंत जेपीसी का गठन कराना चाहिए। जेपीसी की जांच में राफेल का सच दुनिया के सामने आ जाएगा
भाजपा के लिए संजीवनी से कम नहीं सुप्रीम कोर्ट का फैसला...
राफेल पर आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला भाजपा और उसके सहयोगी दलों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। पार्टी इस मुद्दे पर अभी तक बैकफुट पर दिखाई पड़ती थी। हालांकि कांग्रेस के हमले के बाद पार्टी अपनी सफाई भी देती रही है, लेकिन इनके नेताओं के चेहरे पर वह रौनक नहीं होती थी, जो आज देखी जा रही है। कांग्रेस पार्टी लंबे समय से यह मांग कर रही थी कि शीतकालीन सत्र में जेपीसी का गठन किया जाए। इस मांग पर भी भाजपा की ओर से कोई खास प्रतिक्रिया नहीं मिलती थी।
शुक्रवार को जब कोर्ट ने राफेल पर फैसला सुनाया तो पार्टी नेताओं ने उसी अंदाज में कांग्रेस पार्टी पर हमला बोल दिया, जैसे कांग्रेस पार्टी इस मसले को लेकर भाजपा पर हमलावर होती थी। केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली का राज्यसभा में यह कहना है कि हम राफैल पर चर्चा के लिए तैयार हैं, उनकी यह बात कहीं न कहीं सुप्रीम कोर्ट से मिली संजीवनी की ओर इशारा कर रही थी।
अब भाजपा भी अपने आगामी कार्यकर्मों में इस मसले को जनता के बीच ले जाएगी। भाजपा नेताओं का कहना है कि हम लोगों को बताएंगे कि कांग्रेस पार्टी ने राफेल के मामले को घोटाला बताकर रक्षा मामलों में बेवजह हस्तक्षेप करने और केंद्र सरकार को बदनाम करने का प्रयास किया है।